अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या: संसद में एनकाउंटर की मांग से जेल में मौत तक, तीन राज्यों में दहशत की पूरी कहानी
राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की 29 जून को हत्या कर दी गई। हत्या के आरोप में भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु का नाम सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों एक ही बैरक में बंद थे और आरोप है कि विष्णु ने तौलिये से गला घोंटकर जगन की हत्या कर दी।
इस घटना ने न केवल राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक ऐसे अपराधी के जीवन का अंत भी कर दिया जिसने करीब तीन दशक तक राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में आतंक का पर्याय बनकर राज किया।
जेल के भीतर हुई हत्या, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर हुई, जहां हार्डकोर अपराधियों को रखा जाता है। आरोप है कि हत्या से पहले दोनों कैदियों ने साथ समय बिताया और बाद में बैरक के भीतर ही विवाद के दौरान जगन गुर्जर की गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
जेल प्रशासन ने घटना के बाद तत्काल जांच शुरू कर दी है। पुलिस और जेल विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि हाई सिक्योरिटी बैरक में हत्या जैसी गंभीर घटना कैसे हुई और सुरक्षा में कहीं चूक तो नहीं हुई।
1994 में अपराध की दुनिया में रखा कदम
धौलपुर जिले के भवूतीपुरा गांव निवासी जगन गुर्जर का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था। उसके पिता शिवचरण गुर्जर स्थानीय बाबू महाराज मंदिर में पूजा-पाठ कराते थे और परिवार दूध का व्यवसाय भी करता था।
बताया जाता है कि मंदिर समिति के साथ विवाद के बाद हुए मारपीट के मामले में पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए जगन चंबल के बीहड़ों में चला गया। यही घटना उसके अपराध की दुनिया में प्रवेश का कारण बनी।
इसके बाद वह कुख्यात डकैत मोहन गुर्जर के गिरोह में शामिल हुआ और बाद में अपना अलग गैंग बना लिया।
हत्या, डकैती और अपहरण सहित 125 से अधिक मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जगन गुर्जर के खिलाफ 125 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट, अपहरण, रंगदारी, अवैध हथियार और अन्य गंभीर अपराध शामिल थे।
कुछ सार्वजनिक बयानों में उसके खिलाफ 150 से अधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज मामलों की संख्या अलग-अलग समय पर भिन्न बताई गई है।
उसका आतंक इतना अधिक था कि कई मामलों में गवाह अदालत में बयान देने से डरते थे, जिसके कारण वह अनेक मामलों में बरी भी हो गया।
संसद में उठी थी एनकाउंटर की मांग
जून 2019 में सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में जगन गुर्जर का मुद्दा उठाते हुए उसके एनकाउंटर की मांग की थी।
उन्होंने कहा था कि चंबल क्षेत्र में जगन गुर्जर का आतंक कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है और सरकार को उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
इसी वजह से जगन गुर्जर को देश का पहला ऐसा डकैत माना जाता है जिसके एनकाउंटर की मांग संसद में सार्वजनिक रूप से उठी।
एनकाउंटर के डर से तीन बार किया आत्मसमर्पण
जगन गुर्जर कई वर्षों तक पुलिस से बचता रहा, लेकिन एनकाउंटर का भय उसके भीतर लगातार बना रहा। यही कारण था कि उसने अलग-अलग समय पर तीन बार आत्मसमर्पण किया।
2001 में तत्कालीन धौलपुर एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ के सामने पहला सरेंडर।
30 जनवरी 2009 को कैमरी मेले में तत्कालीन कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में दूसरा आत्मसमर्पण।
19 अगस्त 2018 को तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के समक्ष तीसरा सरेंडर।
हालांकि हर बार जेल से बाहर आने के बाद वह फिर अपराध की दुनिया में लौट गया।
कभी 12 लाख का इनामी डकैत
राजस्थान पुलिस ने एक समय जगन गुर्जर पर 12 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
वर्ष 2008 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को उड़ाने की धमकी देकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।
उस समय राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की पुलिस संयुक्त रूप से उसकी तलाश में लगी हुई थी।
आतंक का ऐसा दौर कि गांवों में शादियां तक रुक गईं
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2005 के आसपास जगन गुर्जर का इतना खौफ था कि धौलपुर और चंबल के कई गांवों में लोग रात के समय बाहर निकलने से डरते थे।
उसके आतंक के कारण कई गांवों में विवाह समारोह तक टाल दिए जाते थे। बताया जाता है कि उसके अपने गांव में भी वर्षों तक शादियां नहीं हुईं और उसका परिवार भी गांव छोड़कर चला गया था।
अपराध से नहीं बदला रिश्ता
हालांकि आत्मसमर्पण के बाद उसने कई बार सामान्य जीवन जीने का दावा किया, लेकिन उसका व्यवहार लगातार हिंसक बना रहा।
उस पर छोटी-छोटी बातों पर लोगों से मारपीट करने, दुकानदारों से विवाद करने, वाहन पंचर बनाने वाले से झगड़ा करने और महिलाओं के साथ मारपीट जैसे कई नए मामले भी दर्ज हुए।
उसने अपनी बेटी की शादी के दौरान अपराध छोड़ने की सार्वजनिक कसम भी खाई थी, लेकिन बाद में फिर कई आपराधिक मामलों में उसका नाम सामने आया।
सुरक्षा की मांग भी की थी
बाद के वर्षों में जगन गुर्जर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग भी की थी।
उसका कहना था कि जेल से बाहर आने के बाद कई लोग उसकी हत्या करना चाहते हैं और उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं।
2022 में फिर विवादों में आया
जनवरी 2022 में उसने तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक वीडियो जारी कर जान से मारने की धमकी दी थी।
इसके बाद पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार किया। हालांकि उसने इसे आत्मसमर्पण बताया था, जबकि पुलिस ने इसे गिरफ्तारी बताया।
जेल में हत्या की जांच जारी
29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हुई हत्या के बाद पुलिस और जेल प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हत्या का आरोप सहबंदी विष्णु पर है, जो भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड का आरोपी है।
फिलहाल पुलिस हत्या के पीछे के कारण, जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और संभावित लापरवाही की जांच कर रही है। मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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