150 साल पुरानी कोलकाता ट्राम सेवा को मिलेगा नया जीवन: आधुनिकीकरण, नए रूट और विश्वस्तरीय तकनीक के साथ तैयार होगा भविष्य का ट्राम नेटवर्क

150 साल पुरानी कोलकाता ट्राम सेवा को मिलेगा नया जीवन: आधुनिकीकरण, नए रूट और विश्वस्तरीय तकनीक के साथ तैयार होगा भविष्य का ट्राम नेटवर्क

देश की सबसे पुरानी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में शामिल और कोलकाता की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली 150 वर्ष पुरानी ट्राम सेवा को पुनर्जीवित करने की दिशा में पश्चिम बंगाल सरकार ने व्यापक योजना तैयार की है। सरकार ने ट्राम नेटवर्क के आधुनिकीकरण, विस्तार और तकनीकी उन्नयन के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इंजीनियरिंग एवं परिवहन परामर्श कंपनी RITES लिमिटेड को विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन (Detailed Feasibility Study) और तकनीकी सर्वेक्षण का जिम्मा सौंपा है।

सरकार का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक ट्राम सेवा को संरक्षित करना नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक शहरी परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित करते हुए कोलकाता के नए विकसित हो रहे क्षेत्रों तक पहुंचाना भी है। प्रस्तावित योजना के तहत साल्टलेक, न्यू टाउन, राजारहाट, कालीघाट और दक्षिणेश्वर जैसे क्षेत्रों में ट्राम नेटवर्क के विस्तार की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

कोलकाता ट्राम: भारत की सबसे पुरानी सार्वजनिक परिवहन सेवा

कोलकाता ट्राम का इतिहास लगभग डेढ़ शताब्दी पुराना है। इसकी शुरुआत 24 फरवरी 1873 को घोड़ों द्वारा खींची जाने वाली ट्राम सेवा के रूप में हुई थी। बाद में वर्ष 1902 में कोलकाता एशिया का पहला शहर बना जहां इलेक्ट्रिक ट्राम सेवा शुरू हुई।

समय के साथ यह ट्राम नेटवर्क शहर के सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन माध्यमों में शामिल हो गया। एक समय ऐसा था जब ट्राम का नेटवर्क शहर के अधिकांश हिस्सों तक फैला हुआ था और सैकड़ों ट्राम प्रतिदिन लाखों यात्रियों को सेवा प्रदान करती थीं।

हालांकि पिछले तीन दशकों में बढ़ते सड़क यातायात, मेट्रो रेल विस्तार, निजी वाहनों की संख्या में वृद्धि और सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के कारण ट्राम नेटवर्क लगातार सिमटता गया। कई मार्ग बंद कर दिए गए और वर्तमान में केवल सीमित रूटों पर ही ट्राम का संचालन जारी है।

ट्राम पुनरुद्धार परियोजना का उद्देश्य

राज्य सरकार का मानना है कि ट्राम केवल एक परिवहन साधन नहीं बल्कि कोलकाता की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण नई योजना में दो प्रमुख उद्देश्यों पर काम किया जा रहा है—

पहला, वर्तमान ट्राम नेटवर्क को आधुनिक तकनीक के साथ पुनर्जीवित करना।

दूसरा, शहर के तेजी से विकसित हो रहे नए इलाकों तक ट्राम नेटवर्क का विस्तार करना, ताकि इसे भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित किया जा सके।

RITES करेगी विस्तृत तकनीकी और आर्थिक सर्वे

सरकार द्वारा नियुक्त RITES लिमिटेड इस परियोजना के लिए चरणबद्ध सर्वेक्षण करेगी। सर्वे के दौरान केवल ट्रैक की स्थिति का ही मूल्यांकन नहीं किया जाएगा, बल्कि पूरे ट्राम नेटवर्क की तकनीकी, आर्थिक और परिचालन क्षमता का व्यापक अध्ययन किया जाएगा।

सर्वे में निम्नलिखित पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा—

वर्तमान ट्राम ट्रैक और ओवरहेड विद्युत प्रणाली की स्थिति
ट्राम डिपो, वर्कशॉप और रखरखाव सुविधाओं का आधुनिकीकरण
प्रतिदिन यात्रियों की संख्या और भविष्य की संभावित मांग
परिचालन लागत और राजस्व मॉडल
ट्रैफिक प्रबंधन के साथ ट्राम संचालन का समन्वय
नए रूटों की तकनीकी व्यवहार्यता
भूमि उपलब्धता और निर्माण लागत
पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन
आधुनिक रोलिंग स्टॉक (नई ट्राम) की आवश्यकता

RITES अपनी रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगी, जिसके बाद राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

किन क्षेत्रों तक ट्राम नेटवर्क बढ़ाने की योजना?

नई योजना के तहत कोलकाता के पारंपरिक ट्राम कॉरिडोर से बाहर निकलकर तेजी से विकसित हो रहे नए शहरी क्षेत्रों को भी ट्राम नेटवर्क से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।

प्रस्तावित विस्तार क्षेत्रों में शामिल हैं—

साल्टलेक (बिधाननगर)
न्यू टाउन
राजारहाट
कालीघाट
दक्षिणेश्वर

इन क्षेत्रों में आधुनिक ट्राम कॉरिडोर विकसित करने की व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन इलाकों में भविष्य में आबादी और कार्यालयों की संख्या बढ़ने के साथ सार्वजनिक परिवहन की मांग भी तेजी से बढ़ेगी।

विदेशी तकनीक से होगा आधुनिकीकरण

राज्य सरकार ट्राम प्रणाली को केवल पुराने स्वरूप में पुनः शुरू नहीं करना चाहती, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक बनाना चाहती है।

इसके लिए यूरोप और अन्य देशों में संचालित आधुनिक ट्राम प्रणालियों का अध्ययन किया जा रहा है। प्रस्तावित सुविधाओं में शामिल हो सकती हैं—

वातानुकूलित (Air Conditioned) ट्राम
लो-फ्लोर डिजाइन
व्हीलचेयर अनुकूल प्रवेश
ऊर्जा दक्ष (Energy Efficient) इलेक्ट्रिक मोटर
पुनर्जनन ब्रेकिंग प्रणाली (Regenerative Braking)
GPS आधारित लाइव ट्रैकिंग
डिजिटल डिस्प्ले और यात्री सूचना प्रणाली
CCTV निगरानी
पैनिक बटन और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली
स्मार्ट कार्ड, QR कोड और डिजिटल टिकटिंग
मोबाइल ऐप आधारित टिकट बुकिंग

इन तकनीकों का उद्देश्य ट्राम को आज की सार्वजनिक परिवहन आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।

पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन मोबिलिटी पर फोकस

ट्राम पूरी तरह बिजली से संचालित होती है और प्रत्यक्ष रूप से धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं करती। इसी कारण इसे सबसे पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में शामिल किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि ट्राम नेटवर्क का विस्तार होता है तो—

पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों पर निर्भरता कम होगी।
कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
ट्रैफिक जाम कम करने में मदद मिलेगी।
सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ेगा।
सतत (Sustainable) शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
आर्थिक और पर्यटन लाभ

सरकार का मानना है कि ट्राम नेटवर्क का आधुनिकीकरण केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।

कोलकाता आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक ट्राम यात्रा को शहर की पहचान के रूप में देखते हैं। आधुनिक सुविधाओं के साथ ट्राम सेवा शुरू होने से हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

साथ ही ट्राम परियोजना के विस्तार से—

निर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा।
रखरखाव और संचालन में नए रोजगार सृजित होंगे।
स्थानीय उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।
अंतिम निर्णय सर्वे रिपोर्ट के बाद

सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सभी प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में हैं। RITES द्वारा सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन रूटों पर विस्तार संभव है, कितनी लागत आएगी और परियोजना को किस समयसीमा में लागू किया जाएगा।

निष्कर्ष

कोलकाता ट्राम सेवा के पुनरुद्धार की यह योजना भारत की सबसे पुरानी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यदि परियोजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो कोलकाता अपनी ऐतिहासिक ट्राम विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे 21वीं सदी की आधुनिक, स्मार्ट और पर्यावरण-अनुकूल शहरी परिवहन प्रणाली में बदलने वाला देश का पहला शहर बन सकता है। इससे न केवल सार्वजनिक परिवहन को नई पहचान मिलेगी, बल्कि शहर के सतत विकास, पर्यटन और हरित परिवहन लक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण गति मिलने की उम्मीद है।