नेपाल-चीन की बढ़ती नजदीकियां! तिब्बत से काठमांडू तक कनेक्टिविटी प्लान तेज, क्या भारत के लिए बढ़ेगी रणनीतिक चुनौती

नेपाल-चीन की बढ़ती नजदीकियां! तिब्बत से काठमांडू तक कनेक्टिविटी प्लान तेज, क्या भारत के लिए बढ़ेगी रणनीतिक चुनौती

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नेपाल और चीन अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सीमा पार कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने ट्रांस-हिमालयन नेटवर्क के विकास पर जोर दिया है, जिसमें रेलवे, ऊर्जा और आधारभूत संरचना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।

इस पहल को चीन अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा मान रहा है, जबकि रणनीतिक विशेषज्ञ इसे दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अहम माना जा रहा है।

तिब्बत से काठमांडू तक रेल और ऊर्जा कनेक्टिविटी पर फोकस

नेपाल और चीन के बीच हुई हालिया बातचीत में काठमांडू-तिब्बत रेलवे परियोजना और केरुंग-चिलिमे ट्रांसमिशन लाइन जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य नेपाल को चीन के साथ बेहतर सड़क, रेल और ऊर्जा नेटवर्क से जोड़ना है।

नेपाल सरकार का मानना है कि इससे देश की व्यापारिक क्षमता बढ़ेगी और वह एक "लैंड-लॉक्ड" देश से "लैंड-लिंक्ड" देश के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकेगा।

भारत की बढ़ सकती हैं रणनीतिक चिंताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय है। नेपाल और चीन के बीच मजबूत होती कनेक्टिविटी भविष्य में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि नेपाल लगातार यह कहता रहा है कि वह संतुलित विदेश नीति अपनाना चाहता है और सभी पड़ोसी देशों के साथ समान रूप से सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है।

नेपाल की नई कूटनीतिक रणनीति

नेपाल के विदेश मंत्री ने हालिया विदेश दौरों के दौरान संकेत दिए कि उनका देश आर्थिक विकास और क्षेत्रीय संपर्क को प्राथमिकता दे रहा है। सरकार का लक्ष्य परिवहन, व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाकर नेपाल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

इसी रणनीति के तहत चीन के साथ सीमा पार परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

BRI परियोजनाओं पर बनी हुई है बहस

चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजनाओं को लेकर दुनिया के कई देशों में अलग-अलग राय रही है। समर्थकों का मानना है कि इससे आधारभूत ढांचे का विकास होता है, जबकि आलोचक इसे रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने का माध्यम मानते हैं।

नेपाल-चीन की नई पहल को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है और आने वाले समय में इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर पड़ सकता है।

फिलहाल दोनों देश सीमा पार कनेक्टिविटी को नई गति देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जबकि भारत समेत क्षेत्र के अन्य देशों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।