Bullet Train: नए कॉरिडोर में चलेगी देसी तकनीक, BTCS से विदेशी सिग्नल सिस्टम पर निर्भरता घटाएगा भारत
हाईस्पीड रेल के लिए भारत तैयार कर रहा अपना ट्रेन कंट्रोल सिस्टम, दिल्ली-बनारस समेत 7 नए कॉरिडोर में इस्तेमाल की तैयारी
भारत अपनी हाईस्पीड रेल परियोजनाओं को लेकर एक बड़ी तकनीकी पहल कर रहा है। देश में प्रस्तावित नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए भारतीय रेलवे अपना स्वदेशी सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम विकसित कर रहा है। इस सिस्टम को भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) नाम दिया गया है।
रेलवे का लक्ष्य है कि भविष्य में बनने वाले हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के संचालन के लिए भारत को विदेशी तकनीक और प्रोटोकॉल पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े। BTCS को भारतीय परिस्थितियों, जरूरतों और रेलवे नेटवर्क के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
यह तकनीक देश में प्रस्तावित करीब 7,000 किलोमीटर लंबे हाईस्पीड रेल नेटवर्क के लिए अहम भूमिका निभा सकती है।
7 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी
देश में फिलहाल पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना (MAHSR) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सात नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को भी मंजूरी दी है।
इन प्रस्तावित कॉरिडोर में दिल्ली से बनारस सहित कई प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली हाईस्पीड रेल परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार इन परियोजनाओं के लिए रूट प्लान, डिजाइन और तकनीकी जरूरतों पर काम कर रही है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जैसे-जैसे हाईस्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार होगा, वैसे-वैसे एक स्वदेशी और भरोसेमंद ट्रेन कंट्रोल सिस्टम की जरूरत भी बढ़ेगी।
BTCS क्या है और क्यों तैयार किया जा रहा है?
भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) एक आधुनिक हाईस्पीड रेल सिग्नलिंग और कंट्रोल तकनीक होगी। यह सिस्टम ट्रेन की गति, सुरक्षा, ट्रैक पर संचालन और आपात स्थिति में नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को संभालने में मदद करेगा।
हाईस्पीड ट्रेनों में सिग्नलिंग सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक होता है, क्योंकि 300 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति वाली ट्रेनों के लिए सामान्य सिग्नलिंग व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती।
BTCS को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि इसे भारतीय रेलवे के अलग-अलग हाईस्पीड कॉरिडोर में आसानी से लागू किया जा सके।
विदेशी तकनीक की जगह स्वदेशी समाधान पर जोर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में फिलहाल विदेशी तकनीक आधारित सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। इस परियोजना में यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
लेकिन भविष्य की परियोजनाओं को देखते हुए रेलवे अब अपनी खुद की तकनीक विकसित करना चाहता है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार BTCS—
भारत की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया जाएगा।
कम लागत में लागू किया जा सकेगा।
देश में बनने वाले हाईस्पीड रेल नेटवर्क के लिए उपयोगी होगा।
घरेलू कंपनियों और तकनीकी संस्थानों को बढ़ावा देगा।
भविष्य में दूसरे देशों को निर्यात भी किया जा सकता है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर में लग रहा ETCS सिस्टम
देश के पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना में फिलहाल ETCS लेवल-2 आधारित सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है।
इस सिस्टम को 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है।
नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस परियोजना के सिग्नलिंग सिस्टम के लिए करीब 4,100 करोड़ रुपये का अनुबंध दिनेशचंद्र आर अग्रवाल इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड और जर्मनी की सीमेंस के कंसोर्टियम को दिया था।
इस सिस्टम के जरिए ट्रेन की गति, लोकेशन और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी लगातार नियंत्रित की जाती है।
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल में भी ETCS तकनीक
भारत में हाईस्पीड और सेमी हाईस्पीड रेल परियोजनाओं में आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक का इस्तेमाल पहले से हो रहा है।
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर में भी ETCS लेवल-2 आधारित सिग्नलिंग सिस्टम लगाया गया है। इसी तकनीक की मदद से नमो भारत ट्रेन का संचालन किया जा रहा है।
रेलवे अब इन अनुभवों के आधार पर अपनी स्वदेशी तकनीक को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
BTCS से घरेलू उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि स्वदेशी ट्रेन कंट्रोल सिस्टम विकसित होने से भारत में रेलवे उपकरण बनाने वाली कंपनियों को बड़ा अवसर मिलेगा।
हाईस्पीड रेल के लिए सिग्नलिंग सिस्टम, कंट्रोल उपकरण और सुरक्षा तकनीक के क्षेत्र में घरेलू कंपनियां आगे आ सकेंगी।
इससे न केवल लागत कम होगी बल्कि भारत हाईस्पीड रेल तकनीक के क्षेत्र में एक मजबूत निर्माता के रूप में उभर सकता है।
जापान की आपत्ति के बाद बढ़ी चर्चा
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में जापान की भूमिका को लेकर भी चर्चा होती रही है। जापान इस परियोजना में तकनीकी सहयोग दे रहा है।
हाल ही में जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारत द्वारा ओपन-सोर्स सिग्नलिंग तकनीक विकसित करने के फैसले पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा था कि भारत को जापानी तकनीक पर अधिक निर्भर रहना चाहिए।
हालांकि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत का उद्देश्य किसी देश की तकनीक को नजरअंदाज करना नहीं है, बल्कि अपनी जरूरतों के अनुसार मजबूत और आत्मनिर्भर सिस्टम तैयार करना है।
जापानी तकनीक के विकल्प भी खुले
रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि यदि जापानी कंपनियां उपयुक्त प्रस्ताव देती हैं तो भारत उनके तकनीकी समाधानों पर भी विचार कर सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन और सिग्नलिंग सिस्टम का चयन सुरक्षा, गुणवत्ता और संचालन की जरूरतों के आधार पर किया जाएगा।
रेलवे का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, तेज और विश्वस्तरीय हाईस्पीड रेल सेवा उपलब्ध कराना है।
भारत में बढ़ेगा हाईस्पीड रेल नेटवर्क
भारत सरकार आने वाले वर्षों में हाईस्पीड रेल नेटवर्क को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है।
बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के जरिए प्रमुख आर्थिक और धार्मिक शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी विकसित करने का लक्ष्य है।
यदि BTCS सफल रहता है तो यह भारत के लिए केवल एक रेलवे तकनीक नहीं, बल्कि हाईस्पीड परिवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
भविष्य में भारत केवल बुलेट ट्रेन चलाने वाला देश नहीं, बल्कि हाईस्पीड रेल तकनीक विकसित करने वाला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
news desk MPcg