CJP प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद, CJI ने जताई नाराजगी; कहा- लंच तक समाधान नहीं हुआ तो कोर्ट करेगा हस्तक्षेप

CJP प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद, CJI ने जताई नाराजगी; कहा- लंच तक समाधान नहीं हुआ तो कोर्ट करेगा हस्तक्षेप

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चल रहे CJP (Citizens for Justice Platform) के विरोध-प्रदर्शन के बीच सुरक्षा कारणों से कई दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से उठाई गई आपत्ति पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट कहा कि यदि लंच ब्रेक तक कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया, तो सुप्रीम कोर्ट स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करेगा।

मामला विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के बंद होने से जुड़ा है, जिसके कारण वकीलों, न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट कर्मचारियों और मुकदमों की सुनवाई के लिए आने वाले पक्षकारों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली में चल रहे CJP विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने राजधानी के कई संवेदनशील मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इनमें सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन भी शामिल है।

स्टेशन बंद होने से सर्वोच्च न्यायालय आने वाले हजारों वकील, कोर्ट स्टाफ और मुकदमेबाज प्रभावित हुए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इस मुद्दे को अदालत के समक्ष उठाया और कहा कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए कम-से-कम अधिकृत व्यक्तियों को स्टेशन का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

SCBA ने क्या मांग रखी?

सुनवाई के दौरान SCBA के अध्यक्ष विकास सिंह ने अदालत को बताया कि स्टेशन पूरी तरह बंद होने से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि—

जिन वकीलों के पास प्रॉक्सिमिटी कार्ड हैं,
जिन पक्षकारों के पास वैध सुप्रीम कोर्ट एंट्री पास है,
और कोर्ट के अधिकृत कर्मचारियों को

सुरक्षा जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलने की अनुमति दी जा सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्टेशन पर एक निर्धारित निकास बिंदु (Exit Point) पर सुरक्षा जांच की व्यवस्था कर केवल अधिकृत व्यक्तियों को प्रवेश या निकास दिया जा सकता है, जबकि अन्य यात्रियों को अगले स्टेशन पर उतरने के लिए कहा जा सकता है।

CJI ने क्या कहा?

मामले पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को पहले ही DMRC और संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

CJI ने कहा कि संबंधित अधिकारी इस मुद्दे का समाधान तलाश रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि लंच तक समाधान नहीं निकला, तो अदालत स्वयं आवश्यक आदेश देने पर विचार करेगी।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि न्यायालय इस मामले को केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं मानता, बल्कि न्याय तक पहुंच (Access to Justice) से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न के रूप में देख रहा है।

वकीलों के हित में जारी किया गया विशेष सर्कुलर

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी दी कि अदालत प्रशासन की ओर से एक विशेष सर्कुलर जारी किया गया है।

इस सर्कुलर में सभी अदालतों से कहा गया है कि यदि किसी वकील की अनुपस्थिति मेट्रो स्टेशन बंद होने या यातायात संबंधी बाधाओं के कारण हुई है, तो केवल अनुपस्थिति के आधार पर उसके मुवक्किल के खिलाफ प्रतिकूल आदेश (Adverse Order) पारित न किया जाए।

इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा व्यवस्था के कारण किसी भी पक्षकार को न्यायिक नुकसान न उठाना पड़े।

सुरक्षा बनाम न्यायिक पहुंच का सवाल

दिल्ली में बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा कारणों से मेट्रो स्टेशनों को बंद करना नई बात नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट परिसर के सबसे निकट स्थित मेट्रो स्टेशन के बंद होने से न्यायिक कार्यों पर सीधा प्रभाव पड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन साथ ही न्यायालय तक वकीलों, न्यायिक अधिकारियों और आम नागरिकों की निर्बाध पहुंच भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में दोनों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

DMRC की भूमिका

DMRC आमतौर पर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों के आधार पर संवेदनशील परिस्थितियों में मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद करता है। ऐसे निर्णयों का उद्देश्य भीड़ नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।

हालांकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह सवाल उठा कि क्या सुरक्षा उपायों के साथ सीमित और नियंत्रित प्रवेश की व्यवस्था की जा सकती है, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित न हों।

आगे क्या हो सकता है?

यदि प्रशासन और DMRC लंच तक कोई व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत नहीं करते, तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले में औपचारिक न्यायिक आदेश जारी कर सकता है। अदालत यह भी तय कर सकती है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए अधिकृत व्यक्तियों के लिए स्टेशन को किस प्रकार संचालित किया जाए।

फिलहाल सभी की निगाहें DMRC, दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

मुख्य बिंदु
CJP प्रदर्शन के चलते सुरक्षा कारणों से सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद किया गया।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने स्टेशन बंद होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
CJI ने कहा कि लंच तक समाधान नहीं निकला तो सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करेगा।
SCBA ने अधिकृत वकीलों और कोर्ट स्टाफ को सुरक्षा जांच के बाद स्टेशन उपयोग की अनुमति देने का सुझाव दिया।
अदालत ने पहले ही सर्कुलर जारी कर कहा है कि वकीलों की अनुपस्थिति के कारण किसी पक्षकार के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित न किए जाएं।
मामला सुरक्षा व्यवस्था और न्याय तक निर्बाध पहुंच के बीच संतुलन स्थापित करने से जुड़ा माना जा रहा है।