NEET UG पेपर लीक केस में CBI की बड़ी कार्रवाई: 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, NTA विशेषज्ञों समेत कई लोगों पर आरोप; 360 गवाह और 43 अहम सबूत पेश

NEET UG पेपर लीक केस में CBI की बड़ी कार्रवाई: 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, NTA विशेषज्ञों समेत कई लोगों पर आरोप; 360 गवाह और 43 अहम सबूत पेश

NEET UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की है। CBI की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Branch) ने मंगलवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।

जांच एजेंसी के अनुसार, चार्जशीट में पेपर लीक की कथित साजिश, प्रश्नपत्र के स्रोत, उसे हासिल करने वाले लोगों और अभ्यर्थियों तक पहुंचाने वाली पूरी कड़ी से जुड़े तथ्य शामिल किए गए हैं। CBI ने चार्जशीट में बड़ी संख्या में गवाहों और दस्तावेजी व डिजिटल सबूतों को भी शामिल किया है।

अब इस मामले की सुनवाई पेपर लीक मामलों के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में आगे बढ़ेगी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पेश किए गए सबूतों की समीक्षा करेगी।

CBI की चार्जशीट में 13 आरोपी शामिल

CBI ने जिन 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े विषय विशेषज्ञ, कथित बिचौलिए और कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग शामिल हैं।

चार्जशीट में शामिल आरोपियों में:

मनीषा मंधारे – NTA बायोलॉजी विशेषज्ञ
प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी – NTA केमिस्ट्री विशेषज्ञ
मनीषा संजय हवालदार – NTA फिजिक्स विशेषज्ञ
मनीषा संजय वाघमारे – कथित बिचौलिया
धनंजय निवृत्ति लोखंडे – कथित बिचौलिया
शुभम माधुकर खैरनार – कथित बिचौलिया
यश यादव – कथित बिचौलिया
मंगलिलाल बिवाल – कथित बिचौलिया
विकास बिवाल – कथित बिचौलिया
दिनेश बिवाल – कथित बिचौलिया
डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे – कथित बिचौलिया
शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर – RCC कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के मालिक
तेजस हर्षदकुमार शाह – APMA कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में फिजिक्स फैकल्टी और COO

शामिल हैं।

CBI के अनुसार, मामले में गिरफ्तार सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 अहम सबूत

CBI ने अदालत में दाखिल चार्जशीट में बड़ी मात्रा में जांच सामग्री शामिल की है।

जांच एजेंसी के मुताबिक:

360 गवाहों के बयान रिकॉर्ड किए गए हैं।
422 दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
43 महत्वपूर्ण सबूतों को अदालत में पेश किया गया है।

CBI का कहना है कि जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक की पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पहचान की गई है।

पेपर लीक की कड़ी का पता लगाने का दावा

CBI ने दावा किया है कि जांच में यह पता लगाया गया कि कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र कहां से हासिल हुआ और किस माध्यम से आगे पहुंचाया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ आरोपियों ने कथित रूप से प्रश्नपत्र हासिल करने, उसे सुरक्षित रखने और अभ्यर्थियों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।

CBI ने डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और पूछताछ के आधार पर आरोपियों की भूमिका तय करने की बात कही है।

92 जगहों पर हुई थी छापेमारी

मामले की जांच के दौरान CBI ने कई राज्यों में कार्रवाई की।

एजेंसी ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई स्थानों पर छापेमारी की।

इस दौरान CBI ने:

मोबाइल फोन
लैपटॉप
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
दस्तावेज
अन्य डिजिटल सामग्री

बरामद की।

इन सभी उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।

डिजिटल फॉरेंसिक जांच में जुटाए गए सबूत

CBI ने जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा का विश्लेषण कराया।

एजेंसी के अनुसार, डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग विशेषज्ञों की राय और विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट को भी जांच में शामिल किया गया है।

CBI का कहना है कि इन रिपोर्टों के आधार पर परीक्षा से पहले कथित रूप से प्रश्नों के प्रसार की पुष्टि हुई है।

बैंक खाते और डीमैट अकाउंट किए गए फ्रीज

जांच एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े आर्थिक लेनदेन की भी जांच की।

CBI के अनुसार:

आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज किए गए।
बैंक लॉकर की जांच की गई।
एक डीमैट अकाउंट को भी फ्रीज किया गया।

एजेंसी ने आर्थिक गतिविधियों और कथित पेपर लीक नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच की।

12 मई 2026 को दर्ज हुई थी FIR

CBI के मुताबिक, NEET UG पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के आधार पर 12 मई 2026 को FIR दर्ज की गई थी।

FIR दर्ज होने के बाद CBI ने मामले की जांच शुरू की।

जांच के लिए एजेंसी ने विशेष टीमों का गठन किया, जिसमें:

72 CBI अधिकारी
8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ

शामिल थे।

पहली गिरफ्तारी 13 मई को हुई थी

CBI के अनुसार, इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को की गई थी।

इसके बाद जांच आगे बढ़ने के साथ कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इनमें NTA से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जिन पर जांच एजेंसी ने कथित रूप से पेपर लीक नेटवर्क में भूमिका होने का आरोप लगाया है।

इन कानूनों के तहत दर्ज किया गया मामला

CBI ने आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में कार्रवाई की है।

मामले में:

आपराधिक साजिश
धोखाधड़ी
विश्वासघात
सबूत मिटाने
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024

के तहत कार्रवाई की गई है।

इसके अलावा BNS 2023 की धाराओं:

315(5)
318(4)
61(2)
238
303(2)

और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं 13(2) और 13(1)(a) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

मामले की जांच अभी जारी

CBI ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि फॉरेंसिक जांच और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत में आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। गवाहों के बयान, दस्तावेज और डिजिटल सबूतों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

NEET UG पेपर लीक मामला क्यों बना था बड़ा मुद्दा?

NEET UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है, जिसमें हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं।

पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन को लेकर देशभर में सवाल उठे थे।

CBI की चार्जशीट को इस मामले में जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए सबूत कानूनी रूप से कितने मजबूत साबित होते हैं।