विधानसभा के मानसून सत्र से पहले JPSC को मिलेगा नया अध्यक्ष? नियुक्ति की तैयारी तेज, एल. खियांग्ते से CID की पूछताछ जारी

विधानसभा के मानसून सत्र से पहले JPSC को मिलेगा नया अध्यक्ष? नियुक्ति की तैयारी तेज, एल. खियांग्ते से CID की पूछताछ जारी

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में लंबे समय से अध्यक्ष का पद खाली होने के कारण राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और नई नियुक्ति प्रक्रियाओं पर लगा विराम जल्द समाप्त हो सकता है। राज्य सरकार विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले नए अध्यक्ष की नियुक्ति करने की तैयारी में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ऐसे सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी की तलाश कर रही है जिसकी प्रशासनिक छवि निष्पक्ष, ईमानदार और विवादों से मुक्त रही हो, ताकि आयोग की कार्यप्रणाली पर दोबारा भरोसा कायम किया जा सके।

दूसरी ओर, JPSC के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते से मंगलवार को राज्य की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने पूछताछ की। यह पूछताछ आयोग से जुड़े मामलों की जांच के क्रम में की जा रही है। हालांकि, जांच एजेंसियों या सरकार की ओर से पूछताछ के विषय में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

अध्यक्ष पद खाली होने से ठप हुई चयन प्रक्रिया

21 जुलाई को एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद से JPSC में अध्यक्ष का पद रिक्त है। आयोग के नियमों के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और परीक्षा संबंधी निर्णय प्रभावित होते हैं। इसका सीधा असर राज्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों पर पड़ा है।

आयोग ने अगस्त और सितंबर में प्रस्तावित सात प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। इन परीक्षाओं में शामिल होने की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों को अब नई परीक्षा तिथियों का इंतजार है। अधिकारियों का कहना है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद ही इन परीक्षाओं की संशोधित तिथियां घोषित की जा सकेंगी।

विधानसभा सत्र से पहले फैसला संभव

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र निकट है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को सदन में उठा सकता है, क्योंकि आयोग में अध्यक्ष का पद खाली रहने से सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

इसी कारण सरकार चाहती है कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले कैबिनेट की बैठक में नए अध्यक्ष के नाम पर अंतिम निर्णय ले लिया जाए। इससे विपक्ष के संभावित सवालों का जवाब भी मिल सकेगा और आयोग की सामान्य कार्यप्रणाली दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ होगा।

किसे मिल सकती है जिम्मेदारी?

सरकारी सूत्रों के अनुसार इस बार सरकार ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी को प्राथमिकता दे सकती है जिसकी सेवा अवधि निष्पक्ष और बेदाग रही हो। संभावित उम्मीदवारों में केवल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) ही नहीं, बल्कि भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

झारखंड लोक सेवा आयोग में इससे पहले भी विभिन्न अखिल भारतीय सेवाओं के सेवानिवृत्त अधिकारियों को अध्यक्ष बनाया जाता रहा है। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद ही होगा।

वर्तमान में आयोग में कौन-कौन सदस्य?

फिलहाल आयोग में तीन सदस्य कार्यरत हैं—

अजिता भट्टाचार्य
अनिमा हांसदा
जमाल अहमद

प्रशासनिक स्तर पर यह भी चर्चा है कि स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति तक इन तीनों में से किसी एक सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष (Acting Chairman) का प्रभार दिया जा सकता है, ताकि आयोग के नियमित प्रशासनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित न हों। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।

लंबित हैं कई भर्ती प्रक्रियाएं

अध्यक्ष पद रिक्त होने का असर केवल सात स्थगित परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। आयोग के समक्ष पहले से लंबित कई भर्ती प्रक्रियाएं और नई नियुक्तियों के प्रस्ताव भी फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में हजारों पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया JPSC के माध्यम से होनी है। ऐसे में अध्यक्ष की नियुक्ति में अधिक देरी होने पर भर्ती कैलेंडर भी प्रभावित हो सकता है, जिससे युवाओं में असंतोष बढ़ने की आशंका है।

एल. खियांग्ते से CID की पूछताछ

इसी बीच मंगलवार को पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते रांची स्थित CID कार्यालय पहुंचे, जहां जांच अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह पूछताछ आयोग से जुड़े कुछ मामलों की जांच के तहत की जा रही है।

हालांकि, अब तक CID ने आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि पूछताछ किन विशेष आरोपों या मामलों के संबंध में की जा रही है। जांच जारी होने के कारण एजेंसी ने फिलहाल विस्तृत टिप्पणी करने से भी परहेज किया है।

अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता

JPSC की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई परीक्षा तिथियों की घोषणा कब होगी। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि लगातार परीक्षा स्थगित होने से उनकी तैयारी और करियर की योजना प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार जल्द अध्यक्ष नियुक्त कर देती है तो आयोग लंबित परीक्षाओं का संशोधित कैलेंडर जारी कर सकता है और भर्ती प्रक्रियाओं को दोबारा गति मिल सकती है।

आगे क्या?

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र से पहले राज्य मंत्रिमंडल नए अध्यक्ष की नियुक्ति को मंजूरी दे सकता है। यदि ऐसा होता है तो JPSC की रुकी हुई परीक्षा प्रक्रियाएं, नई भर्तियां और लंबित चयन कार्य दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।

फिलहाल सभी की नजर राज्य सरकार के अगले फैसले और CID की जांच पर टिकी हुई है। दोनों घटनाक्रम आने वाले दिनों में झारखंड की भर्ती व्यवस्था और प्रशासनिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकते हैं।