पूर्व मंत्री हनुमंत सिंह का निधन, लंबी बीमारी के बाद लखनऊ में ली अंतिम सांस

पूर्व मंत्री हनुमंत सिंह का निधन, लंबी बीमारी के बाद लखनऊ में ली अंतिम सांस

उत्तर प्रदेश के पूर्व गन्ना मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता का 84 वर्ष की आयु में निधन, मंगलवार को राप्ती नदी के सिंसई घाट पर होगा अंतिम संस्कार

 उत्तर प्रदेश के पूर्व गन्ना मंत्री, वरिष्ठ भाजपा नेता और प्रसिद्ध अधिवक्ता हनुमंत सिंह का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति, विधि जगत और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन को प्रदेश की सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

निधन की सूचना मिलते ही बलरामपुर स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार के अनुसार उनका अंतिम संस्कार मंगलवार सुबह 10 बजे बलरामपुर के राप्ती नदी स्थित सिंसई घाट पर पूरे राजकीय सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा।

लंबी बीमारी के बाद अस्पताल में निधन

परिजनों और पार्टी सूत्रों के अनुसार, हनुमंत सिंह पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने के बाद उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर सामने आते ही भाजपा संगठन, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके आवास पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।

भाजपा ने बताया जनसेवा का प्रतीक

भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी डी.पी. सिंह बैस ने कहा कि हनुमंत सिंह का जीवन समाज सेवा, न्याय और जनकल्याण के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि वे केवल भाजपा के वरिष्ठ नेता ही नहीं थे, बल्कि सभी दलों के नेताओं और आम लोगों के बीच सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे।

उन्होंने कहा कि गरीबों, किसानों और जरूरतमंद लोगों की मदद करना उनकी कार्यशैली का प्रमुख हिस्सा था और वे हमेशा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते थे।

बस्ती से बलरामपुर तक का सफर

हनुमंत सिंह का जन्म वर्ष 1942 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के मरवटिया गांव में हुआ था।

उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 1965 में बलरामपुर में वकालत की शुरुआत की। अपनी कानूनी समझ, ईमानदारी और निष्पक्ष कार्यशैली के कारण वे जल्द ही जिले के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में शामिल हो गए।

उन्होंने कई वर्षों तक न्यायिक क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए गरीब और जरूरतमंद लोगों की कानूनी सहायता भी की। यही कारण था कि उन्हें केवल एक सफल वकील ही नहीं बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी पहचान मिली।

राजनीति में 1985 से सक्रिय भूमिका

हनुमंत सिंह ने वर्ष 1985 में पहली बार बलरामपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

इसके बाद वर्ष 1989 में वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। जनता के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही और वर्ष 1991 में वे दोबारा विधानसभा पहुंचे।

उनकी प्रशासनिक क्षमता और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में उन्हें गन्ना उद्योग एवं चीनी मिलें विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

किसानों के हितों के लिए किए उल्लेखनीय कार्य

गन्ना मंत्री के रूप में हनुमंत सिंह ने प्रदेश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया।

उन्होंने गन्ना उत्पादकों के हितों की रक्षा, चीनी मिलों के संचालन में सुधार तथा किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रयास किए।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनका कार्यकाल किसान हितैषी नीतियों और उद्योग के विकास के लिए याद किया जाता है।

हालांकि 1991 के बाद हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने चुनाव लड़ा, लेकिन दोबारा विधानसभा नहीं पहुंच सके। इसके बावजूद वे संगठन और सामाजिक कार्यों में लगातार सक्रिय रहे।

सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी निभाई अहम भूमिका

हनुमंत सिंह राजनीति के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी लगातार सक्रिय रहे।

वे कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे और शिक्षा, न्याय, ग्रामीण विकास तथा जनकल्याण के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते रहे।

स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि की थी जो किसी भी व्यक्ति की समस्या सुनने और उसका समाधान कराने का प्रयास करते थे।

परिवार से मिली राष्ट्रवादी सोच

हनुमंत सिंह को राष्ट्रवादी विचारधारा की प्रेरणा अपने पिता केसरी सिंह से मिली।

केसरी सिंह सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहते थे तथा वर्ष 1952 में हिंदू महासभा के प्रत्याशी के रूप में बस्ती विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके थे।

इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि ने हनुमंत सिंह को सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी।

परिवार में कौन-कौन हैं

हनुमंत सिंह अपने पीछे एक बड़ा परिवार छोड़ गए हैं।

उनके परिवार में पुत्र अखिलेश प्रताप सिंह, पुत्रियां मीटा सिंह और गुड़िया सिंह हैं। उनके छोटे भाई शिव प्रताप सिंह भी उनके साथ रहते थे। इसके अलावा उनके परिवार में अन्य भाई-बहन और कई रिश्तेदार हैं।

अंतिम संस्कार मंगलवार को

परिवार के अनुसार, पूर्व मंत्री हनुमंत सिंह का अंतिम संस्कार मंगलवार सुबह 10 बजे बलरामपुर के राप्ती नदी स्थित सिंसई घाट पर किया जाएगा।

अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को बलरामपुर स्थित आवास पर रखा जाएगा, जहां राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, अधिवक्ता और आम नागरिक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति

हनुमंत सिंह के निधन को उत्तर प्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। वे ऐसे नेताओं में गिने जाते थे जिन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में किसानों, गरीबों तथा आम लोगों के हितों को प्राथमिकता दी।

राजनीतिक जीवन, न्यायिक अनुभव और सामाजिक सरोकारों के कारण उन्होंने बलरामपुर ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके निधन के साथ प्रदेश ने एक अनुभवी राजनेता, वरिष्ठ अधिवक्ता और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया।