यूपी में मानसून का कहर: सरयू नदी में समाया सरकारी स्कूल, नहर टूटने से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न; 75 जिलों में बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सोमवार सुबह बलिया जिले में सरयू नदी के तेज कटाव के चलते एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय देखते ही देखते नदी में समा गया। वहीं दोहरीघाट नहर का तटबंध टूटने से सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई। दूसरी ओर राजधानी लखनऊ समेत वाराणसी, कानपुर, गाजियाबाद, सहारनपुर और कई अन्य जिलों में बारिश दर्ज की गई।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लखीमपुर खीरी और बहराइच के लिए बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी है।
सरयू नदी में समाया सरकारी स्कूल
बलिया जिले के बैरिया तहसील के गोपाल नगर टांड़ी गांव में सोमवार सुबह लगभग 7 बजे सरयू नदी के तेज कटाव ने एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। रविवार को स्कूल भवन का आधा हिस्सा नदी में समा गया था, जबकि सोमवार सुबह शेष हिस्सा भी कुछ ही सेकंड में ढहकर नदी में बह गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र का निरीक्षण शुरू कर दिया है। राहत की बात यह रही कि घटना के समय विद्यालय में कोई छात्र या कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
नहर टूटी, किसानों की मेहनत पर पानी
बलिया के बेल्थरारोड क्षेत्र स्थित सुपापाली गांव के पास दोहरीघाट नहर परियोजना का तटबंध टूट गया। तटबंध टूटने से बड़ी मात्रा में पानी आसपास के खेतों में फैल गया और सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई।
किसानों के अनुसार लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण नहर में पानी का दबाव अचानक बढ़ा, जिससे तटबंध टूट गया। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर नुकसान का आकलन कर रहा है।
लखनऊ समेत कई शहरों में झमाझम बारिश
सोमवार दोपहर तक लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, गाजियाबाद, सहारनपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी और अन्य जिलों में बारिश हुई। कई शहरों में तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी और कहीं-कहीं मूसलाधार बारिश दर्ज की गई।
कानपुर में भारी बारिश के कारण कई इलाकों में सीवर ओवरफ्लो हो गया, जिससे सड़कें जलमग्न हो गईं और यातायात प्रभावित हुआ। वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जबकि शहर के कई हिस्सों में धूप और बादलों का मिश्रित मौसम बना रहा।
गंगा-यमुना और सरयू का जलस्तर बढ़ा
लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के कारण प्रदेश की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गईं और छोटे मंदिरों तक पानी पहुंच गया।
अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान से केवल लगभग 54 सेंटीमीटर नीचे बह रही है, जिससे निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर घटने के बाद कटाव तेज हो गया है, जिससे गन्ने और धान की फसलें तथा कृषि भूमि नदी में समा रही हैं।
एक्सप्रेसवे धंसा, फ्लाइट हुई डायवर्ट
लगातार बारिश का असर बुनियादी ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। उन्नाव में लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया। निर्माण एजेंसी और एनएचएआई की टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू कर दी।
वहीं खराब मौसम के कारण चीन सदर्न एयरलाइंस की काठमांडू जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ान को रविवार देर रात लखनऊ एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करना पड़ा। विमान सुरक्षित उतारा गया और यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
मौसम विभाग ने क्यों बढ़ाया अलर्ट?
लखनऊ स्थित मौसम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसूनी ट्रफ एक बार फिर उत्तर प्रदेश की ओर सक्रिय हो रही है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र मजबूत हो रहा है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के प्रभाव से पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 30 जुलाई तक व्यापक बारिश की संभावना बनी हुई है।
मौसम विभाग ने कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी दी है।
प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
राज्य प्रशासन ने जिला अधिकारियों को सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है। किसानों और नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा मौसम विभाग के आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
प्रदेश में अगले तीन से चार दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों, निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
news desk MPcg