'सिर्फ सजा बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी', परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर लोकसभा में बोले गौरव गोगोई; सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
लोकसभा में मंगलवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधारों को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि इसके लिए पूरी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।
गोगोई ने इस विधेयक को "दिखावा" बताते हुए कहा कि सरकार को पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
असम बाढ़ का मुद्दा उठाकर शुरू किया भाषण
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए गौरव गोगोई ने सबसे पहले असम में आई बाढ़ का मुद्दा उठाया।
उन्होंने सदन से अपील की कि असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए केंद्र सरकार विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता की जरूरत है।
'यह कानून नहीं, सरकार की नाकामी छिपाने की कोशिश'
परीक्षा संशोधन विधेयक पर बोलते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल सजा और कानूनी प्रावधानों तक सीमित है, जबकि परीक्षा व्यवस्था की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
गौरव गोगोई ने कहा कि:
पेपर लीक रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है।
परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि "सजा बढ़ाने से शिक्षा में सुधार नहीं होगा।"
नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले का उठाया मुद्दा
गौरव गोगोई ने अपने भाषण में नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि नीट विवाद के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों ने प्रदर्शन किए। उनके अनुसार, छात्रों ने अपने भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर आंदोलन किया और अभिभावकों ने भी उनका समर्थन किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा में हुई अनियमितताओं को गंभीरता से नहीं लिया।
'2024 में कानून आया, फिर भी 2026 में पेपर लीक कैसे हुआ?'
कांग्रेस सांसद ने सरकार से सवाल किया कि अगर 2024 में सार्वजनिक परीक्षा कानून लाया गया था, तो उसके बाद भी परीक्षा संबंधी गड़बड़ियां क्यों सामने आईं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 2024 में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया था, लेकिन इसके बावजूद आगे भी पेपर लीक जैसी घटनाओं के आरोप सामने आए।
गोगोई ने सवाल उठाया कि यदि कानून इतना प्रभावी था तो दो साल बाद भी ऐसी घटनाएं कैसे हुईं।
नीट मामले में जांच और कार्रवाई पर उठाए सवाल
गौरव गोगोई ने नीट-यूजी 2024 मामले की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि मामले में चार्जशीट दाखिल किए गए कई आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच यह संदेश गया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही।
हालांकि, पेपर लीक मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चलती है और अंतिम स्थिति अदालतों के फैसलों पर निर्भर करती है।
सरकार पर शिक्षा सुधारों को लेकर निशाना
गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत बदलाव करने के बजाय केवल नए कानून बनाकर समस्या का समाधान दिखाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए जरूरी है कि:
परीक्षा संचालन व्यवस्था मजबूत हो।
डिजिटल सुरक्षा बढ़ाई जाए।
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए बेहतर व्यवस्था बनाई जाए।
सरकार ने विधेयक को बताया जरूरी कदम
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल रोकने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था जरूरी है।
सरकार पक्ष के नेताओं ने कहा कि परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना और लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।
परीक्षा सुधारों पर संसद में बढ़ी बहस
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
जहां सरकार इसे परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विपक्ष लगातार परीक्षा संचालन, पेपर लीक और छात्रों की चिंताओं को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।
नीट विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ी निगरानी
नीट-यूजी 2024 विवाद के बाद देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता बड़ा मुद्दा बन गई है।
लाखों छात्र हर साल मेडिकल, इंजीनियरिंग और सरकारी नौकरियों से जुड़ी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में भरोसे पर सीधा असर डालती हैं।
अब संसद में परीक्षा संशोधन विधेयक पर बहस के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नए कानूनी प्रावधान वास्तव में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बना पाएंगे या इसके लिए प्रशासनिक सुधारों की भी जरूरत होगी।
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