PoK में चुनावी हिंसा का दावा: प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग में 19 मौतों की खबर, सरकार विरोधी आंदोलन के बीच बढ़ा तनाव
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चुनाव के दौरान बवाल, JAAC ने सुरक्षा बलों पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के दौरान तनाव और हिंसा की खबरें सामने आई हैं। चुनावी प्रक्रिया के बीच अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 19 लोगों की मौत का दावा किया गया है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आरोप लगाया है कि रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने फायरिंग की, जिसमें कई लोगों की जान चली गई।
हालांकि, इस घटना और मृतकों की संख्या की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
चुनाव बहिष्कार और सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच बढ़ा तनाव
PoK में विधानसभा चुनाव पहले से ही विवादों और विरोध प्रदर्शनों के बीच हो रहे हैं। JAAC समर्थकों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक फैसलों के विरोध में चुनाव बहिष्कार का आह्वान किया था।
संगठन का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। इसके बाद रावलाकोट में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और पाकिस्तान सरकार तथा स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारियों की मांगों में गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई, दर्ज मामलों को वापस लेना और प्रशासनिक सुधार शामिल हैं।
रावलाकोट में मार्च के दौरान झड़प का दावा
JAAC के अनुसार, प्रशासन के साथ बातचीत विफल होने के बाद हजारों प्रदर्शनकारी रावलाकोट में एकत्र हुए और मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शुरू किया।
संगठन का दावा है कि इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। इसके बाद कथित फायरिंग में कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।
वहीं, राजनीतिक दलों ने भी एक-दूसरे पर हिंसा और चुनावी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।
PPP और PML-N ने लगाए एक-दूसरे पर आरोप
PoK चुनाव में पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) आमने-सामने हैं।
PPP ने आरोप लगाया कि PML-N समर्थकों की फायरिंग में उसके कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की मौत हुई, जबकि दो अन्य घायल हुए।
दूसरी ओर, PML-N और PPP दोनों ने एक-दूसरे पर चुनाव में धांधली और हिंसा फैलाने के आरोप लगाए हैं।
कई इलाकों में मतदान का बहिष्कार
तनाव के कारण PoK के कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कम उपस्थिति की खबरें सामने आईं।
कुछ इलाकों में लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में कुछ मतदान केंद्र खाली नजर आए, जहां न मतदाता दिखाई दिए और न ही बड़ी संख्या में सुरक्षा बल मौजूद थे।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कुछ क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया को स्थगित भी किया है।
चुनाव तीन चरणों में हो रहा है
PoK विधानसभा चुनाव को सुरक्षा कारणों और तनावपूर्ण माहौल के चलते तीन चरणों में कराने का फैसला लिया गया।
27 जुलाई: मीरपुर डिवीजन में मतदान
2 अगस्त: मुजफ्फराबाद डिवीजन और शरणार्थी सीटों पर मतदान
10 अगस्त: पुंछ डिवीजन में मतदान
पुंछ डिवीजन में सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं।
12 शरणार्थी सीटों को लेकर सबसे बड़ा विवाद
PoK विधानसभा में कुल 45 निर्वाचित सीटें हैं। इनमें 12 सीटें भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाकर बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।
यही सीटें मौजूदा विवाद का बड़ा कारण बनी हुई हैं।
JAAC का कहना है कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को PoK सरकार चुनने में भूमिका नहीं मिलनी चाहिए। संगठन का आरोप है कि इन सीटों के कारण स्थानीय मतदाताओं की राजनीतिक ताकत प्रभावित होती है।
वहीं सरकार का कहना है कि ये सीटें ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।
विवादित सीटों की शुरुआत कब हुई?
इन आरक्षित सीटों की व्यवस्था की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी।
1960 में चुनावी व्यवस्था में इसका प्रावधान आया।
1974 के अंतरिम संविधान में इसे संवैधानिक मान्यता मिली।
2018 में 13वें संविधान संशोधन के जरिए इसे फिर मजबूत किया गया।
नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टो ने किया चुनाव प्रचार
PoK चुनाव को लेकर पाकिस्तान की प्रमुख पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
PML-N प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर आए। उन्होंने PoK में विकास परियोजनाओं और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई वादे किए।
वहीं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी चुनाव प्रचार किया और अपनी पार्टी के लिए समर्थन मांगा।
दिलचस्प बात यह है कि इस्लामाबाद में दोनों दल केंद्र सरकार में सहयोगी हैं, लेकिन PoK चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं।
PoK की राजनीति में लगातार अस्थिरता
PoK विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। पिछला चुनाव 2021 में हुआ था, जिसमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने बहुमत हासिल किया था।
PTI ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद क्षेत्र की राजनीति में लगातार बदलाव देखने को मिले।
सरकारों में नेतृत्व परिवर्तन और राजनीतिक विवादों के कारण PoK की राजनीति अस्थिर बनी रही।
सुरक्षा और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासन के सामने सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है। कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबरें आई हैं।
फिलहाल प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
PoK चुनाव का परिणाम न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
news desk MPcg