भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा उछाल: एक हफ्ते में 10.5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी, 692.86 अरब डॉलर पर पहुंचा खजाना

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा उछाल: एक हफ्ते में 10.5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी, 692.86 अरब डॉलर पर पहुंचा खजाना

RBI के ताजा आंकड़ों में खुलासा, गोल्ड रिजर्व और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी हुई मजबूत बढ़ोतरी; रुपए को मिल सकता है सहारा

 भारत की आर्थिक ताकत को मजबूती देने वाले विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह जनवरी 2026 के बाद एक सप्ताह में हुई सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताई जा रही है।

विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार पांचवें सप्ताह वृद्धि देखने को मिली है। इससे भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की आर्थिक स्थिरता को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार में किन क्षेत्रों से आया उछाल?

RBI के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) का रहा। रिपोर्टिंग सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 8.750 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 564.680 अरब डॉलर हो गई।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं। इनके मूल्य में होने वाले बदलाव का असर कुल रिजर्व पर दिखाई देता है।

इसके अलावा भारत के स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) के मूल्य में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। RBI के मुताबिक, इस अवधि में गोल्ड रिजर्व 1.685 अरब डॉलर बढ़कर 104.743 अरब डॉलर हो गया।

फरवरी के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा भारत

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी 2026 में अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। उस समय यह करीब 728.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण इसमें कुछ गिरावट देखने को मिली थी।

अब दोबारा लगातार वृद्धि के चलते भारत अपने पुराने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विदेशी निवेश और डॉलर प्रवाह की स्थिति मजबूत बनी रहती है तो देश जल्द ही नया रिकॉर्ड भी बना सकता है।

SDR में भी हुई बढ़ोतरी

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights-SDR) में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है।

31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में SDR में 48 मिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 18.666 अरब डॉलर हो गया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा जारी SDR किसी देश की अंतरराष्ट्रीय भुगतान क्षमता को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधन माना जाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से रुपए को मिलेगा सहारा

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का सीधा असर भारतीय रुपए की स्थिरता पर पड़ सकता है। मजबूत रिजर्व होने से RBI को जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता मिलती है।

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है या रुपए पर दबाव आता है तो RBI अपने रिजर्व का इस्तेमाल कर मुद्रा बाजार में संतुलन बनाए रख सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मई 2026 में रिकॉर्ड गिरावट के बाद भारतीय रुपया अब तक करीब 1.8 प्रतिशत मजबूत हुआ है। विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि इस सुधार को और मजबूती दे सकती है।

विदेशी निवेश और NRI जमा से बढ़ा डॉलर प्रवाह

RBI और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें विदेशी निवेश, अनिवासी भारतीयों (NRI) की जमा योजनाएं और विदेशी उधारी प्रमुख हैं।

इस अवधि में भारत में करीब 40.8 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया है। इससे देश के विदेशी भुगतान संतुलन को मजबूती मिली है।

विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ने से भी भारत के रिजर्व में सुधार देखने को मिल रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है विदेशी मुद्रा भंडार?

किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह कई महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने के फायदे:
आयात भुगतान में आसानी होती है।
कच्चे तेल और जरूरी वस्तुओं की खरीद में मदद मिलती है।
वैश्विक आर्थिक संकट के समय सुरक्षा मिलती है।
विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
रुपए की कीमत को स्थिर रखने में मदद मिलती है।

भारत जैसे बड़े आयात करने वाले देश के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की स्थिति मजबूत

दुनियाभर में आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

बढ़ते रिजर्व से यह संकेत मिलता है कि भारत बाहरी आर्थिक दबावों से निपटने के लिए पहले से बेहतर स्थिति में है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक बाजार में स्थिरता बनी रहती है और विदेशी पूंजी का प्रवाह जारी रहता है तो आने वाले महीनों में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ सकता है।