भोपाल के सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर: 70 बच्चों के लिए सिर्फ एक शिक्षिका, बिजली-पानी तक नहीं; कॉरिडोर में चल रही कक्षाएं
कोलार क्षेत्र के स्कूल में कक्षा 1 से 5 तक की जिम्मेदारी अकेली शिक्षिका पर, नवंबर में रिटायरमेंट के बाद बच्चों की पढ़ाई पर संकट
भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां कक्षा 1 से 5 तक करीब 70 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन इन सभी विद्यार्थियों की जिम्मेदारी फिलहाल सिर्फ एक शिक्षिका के भरोसे है। स्कूल में पर्याप्त कक्षाओं के साथ बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई नियमित स्कूल भवन में होने के बजाय एक कॉरिडोर में कराई जा रही है।
स्कूल में पदस्थ शिक्षिका ज्योति बरमारिया ही कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को पढ़ा रही हैं। एक ही शिक्षक के लिए अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ संभालना और उन्हें पढ़ाना चुनौतीपूर्ण है। शिक्षिका ने भी इस व्यवस्था को मुश्किल बताया है। अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई, उनकी जरूरतों और पाठ्यक्रम को एक साथ संभालना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।
स्कूल की समस्या सिर्फ शिक्षकों की कमी तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक परिसर में बिजली और पीने के पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। बच्चों के लिए पानी की जरूरत स्थानीय लोगों की मदद से पूरी की जा रही है। स्कूल जैसी बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कक्षाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई कॉरिडोर में कराई जा रही है। एक ही स्थान पर अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने की व्यवस्था से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित होता है। कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की जरूरतें और पाठ्यक्रम अलग-अलग होने के बावजूद स्कूल में उपलब्ध संसाधन सीमित हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि स्कूल में मौजूद अकेली शिक्षिका ज्योति बरमारिया नवंबर में सेवानिवृत्त होने वाली हैं। ऐसे में अगर उनके रिटायरमेंट से पहले किसी अन्य शिक्षक की नियुक्ति या पदस्थापना नहीं की गई, तो स्कूल में पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं बचेगा। इससे स्कूल में पढ़ने वाले करीब 70 बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि स्कूल की बुनियादी समस्याओं को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाई गई हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से स्कूल में जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिभावकों ने अब इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग का ध्यान फिर से आकर्षित किया है।
शुक्रवार को अभिभावकों की ओर से मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में औपचारिक याचिका भी दी गई। इसमें स्कूल की स्थिति सुधारने की मांग की गई है। अभिभावकों ने कहा है कि यदि स्कूल में बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं, तो स्कूल को बंद करने पर भी विचार किया जाए।
स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई को लेकर है। एक ओर स्कूल में पहले से ही पर्याप्त शिक्षक और जरूरी सुविधाएं नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर मौजूदा शिक्षिका के नवंबर में रिटायर होने के बाद स्थिति और कठिन हो सकती है। ऐसे में अभिभावक चाहते हैं कि विभाग समय रहते स्कूल में शिक्षक और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करे।
कोलार क्षेत्र के इस सरकारी प्राथमिक स्कूल की स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। लेकिन यहां करीब 70 बच्चों की पढ़ाई एक शिक्षिका और सीमित संसाधनों के सहारे चल रही है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल की इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
news desk MPcg