मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा से पारित, चार शहरों में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा से पारित, चार शहरों में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

CM मोहन यादव बोले- समान न्याय और समान अधिकार की दिशा में अहम कदम, परीक्षा अनियमितता के मामलों में होगी तेज सुनवा

भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, ‘समान नागरिक संहिता विधेयक’ मध्यप्रदेश विधानसभा में पारित हो गया है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश में समान न्याय और समान अधिकार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। परीक्षाओं में अनियमितता से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इन अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करना है।

चार शहरों में फास्ट ट्रैक कोर्ट

परीक्षा में गड़बड़ी और अनियमितता से जुड़े मामलों को लंबे समय तक लंबित रहने से रोकने के लिए प्रदेश के चार प्रमुख शहरों में विशेष व्यवस्था की जाएगी। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में बनने वाले फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए ऐसे मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता देने की कोशिश होगी।

इस फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य परीक्षाओं में अनियमितता के मामलों में कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। इससे अभ्यर्थियों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

UCC को लेकर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता विधेयक को समानता और समान अधिकार से जोड़ते हुए इसे महत्वपूर्ण कदम बताया है। UCC का व्यापक उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में समान कानूनी प्रावधान लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना है।

हालांकि, विधेयक पारित होने के बाद इसके प्रावधान कब और किस तरह लागू होंगे, यह संबंधित सरकारी अधिसूचना और नियमों पर निर्भर करेगा।

परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर फोकस

परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, फर्जीवाड़े या अन्य अनियमितताओं के मामले छात्रों के भविष्य पर सीधा असर डालते हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई में देरी होने पर उम्मीदवारों को लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे मामलों में तेज न्याय, प्रभावी कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में भरोसा मजबूत करना है।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश में समान नागरिक संहिता और परीक्षा अनियमितताओं पर सरकार के फैसले चर्चा में हैं।