BHOPAL:राजधानी में इमरजेंसी मेडिसिन सम्मेलन का उद्घाटन

BHOPAL:एम्स और लोक स्वास्थ्य विभाग मिलकर प्रदेश में इमरजेंसी सेवाएं मजबूत करेंगे

BHOPAL:राजधानी में इमरजेंसी मेडिसिन सम्मेलन का उद्घाटन

भोपाल| राजधानी में शुक्रवार को एम्स भोपाल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इमरजेंसी मेडिसिन के 20वें अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इमरजेंसी मेडिसिन के क्षेत्र में एक नया युग शुरू हो रहा है, जिसमें वन स्टेट वन हेल्थ पॉलिसी की एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार कर ली गई है। इसके तहत एम्स भोपाल के सहयोग से पूरे प्रदेश में एक समान और उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी।

प्रदेशभर में एक समान स्वास्थ्य सेवाएं

मुख्यमंत्री ने बताया कि एम्स और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग मिलकर प्रदेशभर में इमरजेंसी मेडिसिन की गुणवत्ता को बेहतर बनाएंगे। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए विशेष पॉलिसी बनाई जाएगी। इस सम्मेलन के दौरान एम्स में प्रदेशभर के डॉक्टरों को इमरजेंसी मेडिसिन के क्षेत्र में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे उन्हें आपातकालीन स्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता मिलेगी।

इमरजेंसी मरीजों को लौटाने की नीति

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ. अजय सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एम्स की नीति है कि इमरजेंसी में आए किसी भी मरीज को लौटाया नहीं जाएगा। सीमित संसाधनों के बावजूद, एम्स का प्रयास होता है कि सर्वोत्तम उपचार प्रदान किया जाए। विशेष रूप से इमरजेंसी स्थितियों में समय पर किया गया इलाज मरीज के जीवन को बचा सकता है और एक पूरे परिवार को बिखरने से रोक सकता है। इसके लिए एम्स एक विशेष ट्रॉमा सेंटर भी स्थापित कर रहा है।

प्रदेशभर के डॉक्टरों को प्रशिक्षण

एम्स भोपाल द्वारा मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के 500 से अधिक डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को आपातकालीन चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण से सभी अस्पतालों में इमरजेंसी चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री को एम्स भोपाल द्वारा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उठाए गए सुधारात्मक कदमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

इस सम्मेलन और प्रशिक्षण के माध्यम से एम्स भोपाल और प्रदेश सरकार मिलकर प्रदेशभर में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे कि प्रदेश में इमरजेंसी स्थिति का बेहतर तरीके से मुकाबला किया जा सके।