मध्य प्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति पर जोर, गुजरात को सरदार सरोवर परियोजना के लिए 217 करोड़ रुपये देगा प्रदेश; हर जिले में बनेंगे आईटी पार्क

मध्य प्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति पर जोर, गुजरात को सरदार सरोवर परियोजना के लिए 217 करोड़ रुपये देगा प्रदेश; हर जिले में बनेंगे आईटी पार्क

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में आयोजित मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में प्रदेश के विकास, प्रशासनिक सुधार, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय विकास और कृषि से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में लिए गए फैसलों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, निवेश को बढ़ावा देना, कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना बताया गया।

बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों को जानकारी दी कि नर्मदा नदी पर बनी सरदार सरोवर बांध परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित वित्तीय विवाद का समाधान हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए तथा कोई भी पात्र कर्मचारी पदोन्नति से वंचित न रहे।

कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को मिलेगी गति

करीब एक दशक बाद प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया फिर से शुरू होने पर कैबिनेट के दौरान मंत्रियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत और अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों के प्रमुख और जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करें कि पात्र कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिले।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, नियमसम्मत और निष्पक्ष होनी चाहिए। किसी भी कर्मचारी के साथ भेदभाव न हो और लंबित मामलों का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए।

सरदार सरोवर परियोजना के वित्तीय विवाद का समाधान

कैबिनेट बैठक में नर्मदा नदी पर स्थित सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वर्षों पुराने वित्तीय विवाद पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना की लागत को लेकर गुजरात सरकार और मध्य प्रदेश के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। गुजरात सरकार परियोजना की लागत में मध्य प्रदेश की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग कर रही थी। केंद्र सरकार के स्तर पर हुई चर्चाओं और आपसी सहमति के बाद नया समाधान निकाला गया।

समझौते के अनुसार परियोजना की कुल लागत का 75 प्रतिशत व्यय गुजरात सरकार वहन करेगी, जबकि मध्य प्रदेश सरकार 217 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। इस निर्णय के साथ तीन दशक से अधिक समय से लंबित वित्तीय विवाद समाप्त होने का रास्ता साफ हो गया है।

हर जिले में विकसित होंगे छोटे आईटी पार्क

राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी।

एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के डेटा सेंटर के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए 800 करोड़ रुपये की योजना को स्वीकृति दी गई है।

इसके अलावा नई औद्योगिक नीति के तहत प्रदेश के सभी जिलों में छोटे-छोटे आईटी पार्क विकसित किए जाएंगे। इन पार्कों में आईटी, सॉफ्टवेयर, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप कंपनियों को उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में आईटी निवेश बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

डोंगला वेधशाला परियोजना को भी मिली मंजूरी

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव पर उज्जैन के निकट स्थित डोंगला खगोलीय वेधशाला परियोजना के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए 39 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

यह परियोजना खगोल विज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार का उद्देश्य इसे आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करना है।

'नमो हरित नगर योजना' के तहत बनेंगे नगर वन

पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने 'नमो हरित नगर योजना' को मंजूरी दी है।

इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के विभिन्न शहरों में नगर वन विकसित किए जाएंगे। इन वन क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार उठाएगी। योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है।

समर्थन मूल्य पर खरीदे गए अनाज का होगा ई-ऑक्शन

कैबिनेट ने कृषि क्षेत्र से जुड़ा भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। सरकार ने तय किया है कि केंद्र सरकार द्वारा आवंटन के बाद समर्थन मूल्य पर खरीदे गए जो अनाज राज्य के पास शेष रह जाएंगे, उन्हें ई-ऑक्शन के माध्यम से बेचा जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय तक अनाज के भंडारण की समस्या कम होगी और सरकारी गोदामों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

स्वामित्व योजना से 48 लाख लोगों को राहत

कैबिनेट ने स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री पर पंचायत उपकर नहीं लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस उपकर का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

सरकार के अनुसार इस फैसले से प्रदेश के लगभग 48 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ एवं किफायती होगी।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती होगी तेज

प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए भी बड़ा निर्णय लिया गया है।

जहां मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से पद नहीं भर पाए हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग सीधे भर्ती प्रक्रिया पूरी करेगा। चयनित विशेषज्ञ डॉक्टरों को कम से कम तीन वर्ष तक एक ही स्थान पर सेवाएं देना अनिवार्य होगा।

सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा मरीजों को विशेषज्ञ उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगा।

मेधावी विद्यार्थियों के लिए स्कूटी योजना जारी रहेगी

शिक्षा क्षेत्र में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए हायर सेकेंडरी परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्कूटी वितरण योजना को पूर्ववत जारी रखने का निर्णय लिया है।

सरकार का कहना है कि यह योजना मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उच्च शिक्षा के लिए बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद करेगी।

विकास, प्रशासन और जनकल्याण पर सरकार का फोकस

कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य सरकार प्रशासनिक सुधार, डिजिटल अवसंरचना, औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है। वहीं कर्मचारियों की पदोन्नति, आईटी पार्क, नगर वन, डॉक्टरों की भर्ती और स्वामित्व योजना जैसे निर्णयों का सीधा प्रभाव लाखों लोगों पर पड़ने की संभावना है।

सरकार का कहना है कि सभी विभागों को इन निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द आम नागरिकों तक पहुंच सके।