सिक्किम में हनीमून मनाने गया यूपी का एक कपल, दोनों पति-पत्नी पिछले 12 दिनों से लापता
सिक्किम हनीमून पर गया प्रतापगढ़ का नवविवाहित जोड़ा 12 दिनों से लापता, तीस्ता नदी में हादसे की आशंका
प्रतापगढ़/सिक्किम।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। हाल ही में शादी के बंधन में बंधा नवविवाहित जोड़ा कौशलेंद्र प्रताप सिंह (29) और अंकिता (26) अपने हनीमून पर सिक्किम गया था, लेकिन दोनों पिछले 12 दिनों से लापता हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि जिस टूरिस्ट वाहन में यह जोड़ा सवार था, वह दुर्घटनाग्रस्त होकर करीब 1000 फीट गहरी खाई में तीस्ता नदी में गिर गया।
जानकारी के अनुसार, कौशलेंद्र प्रताप सिंह प्रतापगढ़ के राहा टीकर गांव (सांगीपुर) के निवासी हैं। उनके पिता का नाम शेर बहादुर सिंह है। वहीं, अंकिता पट्टी कोतवाली क्षेत्र के धनगढ़ सराय छिवलहा गांव की रहने वाली हैं। दोनों की शादी इसी साल 5 मई को हुई थी, और 9 मई को विदाई के बाद 24 मई को दोनों हनीमून के लिए सिक्किम रवाना हुए थे।
दुर्घटना का दर्दनाक विवरण:
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह कपल एक टूरिस्ट वाहन में सवार था, जो तीव्र मोड़ पर अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत, दो घायल, और आठ लोग लापता बताए जा रहे हैं। इन्हीं लापता लोगों में कौशलेंद्र और अंकिता भी शामिल हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी:
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है। हादसे की भयावहता को देखते हुए परिवार में गहरा मातम छाया हुआ है और दोनों परिवारों की उम्मीदें रेस्क्यू टीम के प्रयासों पर टिकी हुई हैं।
दोनों पति-पत्नी हुए हादसे का शिकार!
बताया जा रहा है कि कौशलेंद्र और अंकिता दोनों हनीमून मनाने के लिए सिक्किम गए थे। जिस वाहन में ये दोनों सवार हुए थे। वो वाहन हादसे का शिकार हो गया। वाहन करीब 1000 फीट की गहराई में तीस्ता नदी में जा गिरा। हादसे में एक की मौत हो गई, दो घायल हो गए। जबकि आठ लोग लापता हो गए। इन आठ लोगों में ही दो कौशलेंद्र और अंकिता है। जानकारी मिलते ही पुलिस पहुंची और एनडीआरएफ की टीम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है। लेकिन, अभी तक लापता की तलाश नहीं हो पाई।
परिवार की अपील:
परिजनों ने सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि खोजबीन के काम में तेजी लाई जाए और किसी भी सुराग को नजरअंदाज न किया जाए। कौशलेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, जिससे माता-पिता की उम्मीदें जुड़ी थीं।
news desk MPcg