मुंबई पेड़ हादसा: 11 साल के बच्चे की मौत पर मेयर ने फाड़ी जांच रिपोर्ट, दोबारा जांच के आदेश; ठेकेदारों पर उठे सवाल

मुंबई पेड़ हादसा: 11 साल के बच्चे की मौत पर मेयर ने फाड़ी जांच रिपोर्ट, दोबारा जांच के आदेश; ठेकेदारों पर उठे सवाल

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में पेड़ गिरने से 11 साल के बच्चे की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। चेंबूर में स्कूल बस पर गिरे विशाल पेड़ की घटना की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया। उन्होंने रिपोर्ट की कॉपी फाड़ते हुए दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मेयर ने कहा कि घटना में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है और केवल आर्थिक मुआवजा तय कर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता।

चेंबूर में स्कूल बस पर गिरा था पेड़, बच्चे की हुई थी मौत

यह मामला मुंबई के चेंबूर इलाके का है, जहां 30 जून को एक बड़ा पेड़ स्कूल बस पर गिर गया था। हादसे में 11 वर्षीय छात्र विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने पेड़ की स्थिति, प्रशासनिक लापरवाही और समय रहते कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे।

हादसे के बाद नगर निकाय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में घटना के लिए कुछ निजी पक्षों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी।

मेयर ने जांच रिपोर्ट को बताया असंतोषजनक

शुक्रवार को मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने जांच रिपोर्ट पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जिस तरह से जिम्मेदारी तय की गई है, वह संतोषजनक नहीं है।

मेयर ने कहा कि उन्होंने प्रशासन की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नई जांच समिति में दो पार्षदों को शामिल करने का निर्देश दिया गया है, ताकि जांच अधिक पारदर्शी तरीके से हो सके।

मेयर ने कहा कि वह खुद एक मां हैं और पीड़ित परिवार के दर्द को समझती हैं। उन्होंने कहा कि एक बच्चे की जान की कीमत केवल आर्थिक मुआवजे से तय नहीं की जा सकती।

"बच्चे की जान की कीमत 7 लाख रुपये नहीं हो सकती": मेयर

मेयर रितु तावड़े ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़ित परिवार ने अपना बच्चा खोया है और ऐसे मामले में केवल मुआवजे की राशि तय करना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में पीड़ित परिवार के लिए निर्धारित राशि को लेकर भी वह सहमत नहीं हैं। उनका कहना था कि मामले में वास्तविक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

BMC रिपोर्ट में ठेकेदारों को ठहराया गया जिम्मेदार

जांच समिति की रिपोर्ट में सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार और सुपरवाइजिंग कंसल्टेंट की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।

रिपोर्ट में—

सड़क कार्य करने वाले ठेकेदार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई।
सुपरवाइजिंग कंसल्टेंट पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही गई।

हालांकि रिपोर्ट में सड़क और उद्यान विभाग के अधिकारियों की ओर से किसी बड़ी लापरवाही की पुष्टि नहीं की गई थी। इसी बिंदु पर मेयर ने आपत्ति जताई और दोबारा जांच की मांग की।

मेयर ने पहले भी दी थी कमजोर पेड़ों को लेकर चेतावनी

मेयर रितु तावड़े ने दावा किया कि मानसून शुरू होने से पहले उन्होंने संबंधित इलाके का दौरा किया था और सड़क किनारे मौजूद कमजोर पेड़ों को लेकर अधिकारियों को सतर्क किया था।

उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कमजोर पेड़ों की पहचान और कार्रवाई की जाती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

बच्चे के पिता ने निष्पक्ष जांच की मांग की

मृतक छात्र विहान श्रीवास्तव के पिता गौरव श्रीवास्तव ने भी जांच रिपोर्ट पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि यह साबित होना चाहिए कि घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि मानवीय लापरवाही का परिणाम थी।

उन्होंने मांग की कि इस पूरे सिस्टम से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

विहान के पिता ने यह भी कहा कि केवल मुआवजा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत है कि नियमों और प्रक्रियाओं में सुधार किया जाए, जिससे अगले मानसून में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

मानसून में पेड़ों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

मुंबई में हर साल मानसून के दौरान पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। भारी बारिश, तेज हवाओं और कमजोर पेड़ों के कारण कई बार जान-माल का नुकसान होता है।

इस हादसे के बाद एक बार फिर शहर में पेड़ों की जांच, उनकी कटाई-छंटाई और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून से पहले पेड़ों की वैज्ञानिक जांच, कमजोर पेड़ों की पहचान और समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

दोबारा जांच से तय होगी जिम्मेदारी

फिलहाल मेयर के आदेश के बाद मामले की दोबारा जांच की जाएगी। अब नई जांच में यह देखा जाएगा कि पेड़ गिरने की घटना में किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि नई जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।