सियाचिन से LAC तक रक्षा सचिव का ग्राउंड जीरो दौरा, दुर्गम परिस्थितियों में जवानों के हौसले और तैयारियों की की सराहना
लेह। देश की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा के तहत रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने लद्दाख क्षेत्र का तीन दिवसीय व्यापक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक अग्रिम सैन्य चौकियों का निरीक्षण किया और जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास और सैन्य तैयारियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। रक्षा सचिव ने अपने दौरे के दौरान कठिन मौसम, अत्यधिक ऊंचाई और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात जवानों से सीधे संवाद किया और उनके साहस, अनुशासन और पेशेवर दक्षता की खुलकर सराहना की।
14 कोर मुख्यालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
लेह पहुंचने के बाद रक्षा सचिव ने 14 कोर मुख्यालय में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस बैठक में क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सैनिकों की तैनाती, ऑपरेशनल तैयारियों और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम पर गहन चर्चा की गई।
अधिकारियों ने रक्षा सचिव को सीमावर्ती क्षेत्रों में जारी सैन्य गतिविधियों, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती से जुड़ी चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही रणनीतिक महत्व के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों की सराहना
दौरे के दौरान रक्षा सचिव ने सियाचिन जैसे दुनिया के सबसे कठिन और ऊंचे युद्धक्षेत्र में तैनात सैनिकों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि शून्य से नीचे तापमान, ऑक्सीजन की कमी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद जवान पूरी निष्ठा के साथ देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने जवानों के मनोबल को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि भारतीय सेना के सैनिक हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का निर्वहन अत्यंत साहस और समर्पण के साथ करते हैं। रक्षा सचिव ने यह भी कहा कि सरकार का पूरा ध्यान सैनिकों की सुविधा, रसद और आधुनिक संसाधनों को बेहतर बनाने पर है।
रणनीतिक परियोजनाओं पर विशेष फोकस
अपने दौरे के दौरान रक्षा सचिव ने सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रही रणनीतिक परियोजनाओं की प्रगति का भी बारीकी से निरीक्षण किया। इन परियोजनाओं में सड़क नेटवर्क, संचार प्रणाली, रसद केंद्र और अन्य सैन्य ढांचे शामिल हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए, ताकि सेना की परिचालन क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके।
दुनिया का सबसे कठिन युद्धक्षेत्र
सियाचिन ग्लेशियर को दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन सैन्य तैनाती क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां मौसम की परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहती हैं। यहां तैनात सैनिकों को न केवल दुश्मन की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, बल्कि प्राकृतिक कठिनाइयों से भी लगातार जूझना पड़ता है।
रक्षा सचिव ने इस क्षेत्र का दौरा कर वास्तविक जमीनी स्थिति को समझने और सैनिकों की जरूरतों का आकलन करने पर विशेष जोर दिया।
सीमावर्ती सुरक्षा में भारत की मजबूत स्थिति
लद्दाख क्षेत्र भारत की रणनीतिक सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सियाचिन से लेकर LAC तक फैले इस पूरे इलाके में भारतीय सेना की मजबूत उपस्थिति देश की सुरक्षा ढांचे को मजबूती प्रदान करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे उच्च स्तरीय दौरों से न केवल सैन्य तैयारियों का मूल्यांकन होता है, बल्कि जवानों का मनोबल भी और अधिक मजबूत होता है।
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