पुरी रथयात्रा से पहले बड़ा साइबर ऑपरेशन, ओडिशा क्राइम ब्रांच ने 46 फर्जी होटल बुकिंग वेबसाइट्स को किया ब्लॉक; देशभर के पर्यटक थे निशाने पर

पुरी रथयात्रा से पहले बड़ा साइबर ऑपरेशन, ओडिशा क्राइम ब्रांच ने 46 फर्जी होटल बुकिंग वेबसाइट्स को किया ब्लॉक; देशभर के पर्यटक थे निशाने पर

ओडिशा में विश्वप्रसिद्ध पुरी रथयात्रा से पहले राज्य की क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कम से कम 46 फर्जी वेबसाइटों को बंद कर दिया है। ये वेबसाइटें धार्मिक पर्यटन के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को होटल बुकिंग, VIP दर्शन और अन्य सुविधाओं के नाम पर ठगने का काम कर रही थीं।

यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब हर साल रथयात्रा के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और होटल बुकिंग की मांग अत्यधिक बढ़ जाती है।

कैसे चलता था पूरा ठगी नेटवर्क?

क्राइम ब्रांच की साइबर सेल के अनुसार, यह एक संगठित ऑनलाइन फ्रॉड नेटवर्क था जो कई स्तरों पर काम करता था।

1. फर्जी वेबसाइटों का निर्माण
असली होटलों और ट्रैवल पोर्टल्स की हूबहू कॉपी बनाई जाती थी
डोमेन नाम ऐसे रखे जाते थे जो देखने में आधिकारिक लगते थे
वेबसाइट डिज़ाइन, लोगो और बुकिंग इंटरफेस लगभग असली जैसा होता था
2. सर्च इंजन पर ट्रैफिक
इन साइट्स को SEO और पेड विज्ञापनों के जरिए ऊपर दिखाया जाता था
"पुरी होटल बुकिंग", "Jagannath Temple stay" जैसे सर्च रिजल्ट्स में ये साइट्स दिखती थीं
3. आकर्षक ऑफर का जाल
कम कीमत में प्रीमियम होटल रूम
VIP दर्शन और स्पेशल एंट्री पास
तुरंत कन्फर्मेशन का झांसा
“लिमिटेड सीट्स” जैसी फर्जी अर्जेंसी
4. एडवांस पेमेंट फ्रॉड
UPI, बैंक ट्रांसफर और कार्ड पेमेंट के जरिए एडवांस राशि ली जाती थी
भुगतान के बाद न कोई बुकिंग मिलती थी और न ही संपर्क संभव होता था
पुलिस की साइबर कार्रवाई का पूरा विवरण

क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह अभियान पिछले कई दिनों से चल रहा था:

कुल 46 फर्जी वेबसाइटों की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया गया
27 जून को एक ही दिन में 11 वेबसाइटें हटाई गईं
20–22 जून के बीच 15 पोर्टल्स बंद किए गए
बाकी वेबसाइटें निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए हटाई गईं
24x7 साइबर पेट्रोलिंग यूनिट सक्रिय की गई

अधिकारियों ने बताया कि यह सिर्फ वेबसाइट ब्लॉकिंग नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क को ट्रेस करने का अभियान भी चल रहा है, जिसमें IP एड्रेस, सर्वर लोकेशन और पेमेंट गेटवे की जांच शामिल है।

श्रद्धालुओं को कैसे बनाया जाता था शिकार?

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खास तौर पर उन लोगों को निशाना बनाता था जो पहली बार पुरी आ रहे होते थे।

सोशल मीडिया और गूगल सर्च पर विज्ञापन दिखाकर ट्रैफिक लाया जाता था
WhatsApp और कॉल सपोर्ट नंबर भी दिए जाते थे
फर्जी “कस्टमर केयर एजेंट” भरोसा जीतने के लिए लगातार बातचीत करते थे
भुगतान के बाद नंबर बंद कर दिए जाते थे
नुकसान का आंकड़ा और पहले की घटनाएं

क्राइम ब्रांच के सूत्रों के अनुसार:

पिछले एक वर्ष में करीब 30 से अधिक पर्यटक ठगी का शिकार हुए
कुल मिलाकर लगभग 5 लाख रुपये की आर्थिक क्षति दर्ज की गई
कई मामलों में विदेशी और दूसरे राज्यों के पर्यटक भी शामिल थे

पिछले साल श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने भी शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ फर्जी वेबसाइटें मंदिर के आधिकारिक गेस्ट हाउस और बुकिंग सिस्टम की नकल कर रही थीं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम फैल रहा था।

प्रशासन की चेतावनी और आगे की योजना

पुलिस और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि:

केवल आधिकारिक वेबसाइटों से ही बुकिंग करें
किसी भी अनजान लिंक पर भुगतान न करें
होटल की पुष्टि सीधे कॉल या आधिकारिक पोर्टल से करें

क्राइम ब्रांच ने संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में इस साइबर नेटवर्क के मास्टरमाइंड और सहयोगियों तक पहुंचने के लिए अंतरराज्यीय जांच तेज की जाएगी।

निष्कर्ष

पुरी रथयात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा डिजिटल माध्यम से ठगी का यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने बड़े पैमाने पर संभावित धोखाधड़ी को रोका है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।