महोबा में कुएं से 50 से अधिक बिजली मीटर मिलने का दावा, बिजली विभाग पर गंभीर सवाल; रिकॉर्ड में हेराफेरी और भ्रष्टाचार के आरोपों की मांग उठी
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में एक पुराने कुएं की सफाई के दौरान 50 से अधिक बिजली मीटर मिलने का दावा सामने आने के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर वायरल हो रहे वीडियो और दावों के अनुसार, कुएं से बड़ी संख्या में ऐसे बिजली मीटर निकाले गए हैं जिन्हें कथित तौर पर बिजली चोरी के मामलों में जब्त किया गया था। हालांकि, इस दावे की अभी तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी, साक्ष्यों को नष्ट करने और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों का रूप ले सकता है।
कुएं की सफाई के दौरान सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, महोबा में एक पुराने कुएं की नियमित सफाई और गाद निकालने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान मजदूरों और स्थानीय लोगों ने कुएं के भीतर बड़ी संख्या में बिजली मीटर देखे। बाद में इन्हें बाहर निकाला गया, जिसके बाद पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि कुएं से 50 से अधिक बिजली मीटर निकले हैं। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
बिजली चोरी के मामलों से जुड़ा होने का आरोप
स्थानीय लोगों और कुछ सूत्रों का आरोप है कि ये मीटर बिजली चोरी के मामलों में जब्त किए गए थे। नियमों के अनुसार, ऐसे मीटरों को जब्त करने के बाद उनका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, उन्हें सुरक्षित रखा जाता है और कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित कार्रवाई की जाती है।
आरोप है कि इन मीटरों को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखने के बजाय वर्षों तक कुएं में फेंका जाता रहा और कई मामलों को कथित रूप से विभागीय स्तर पर "सेटल" कर दिया गया। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह विभागीय प्रक्रियाओं और सरकारी अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ का मामला हो सकता है।
कई गंभीर सवाल खड़े
घटना के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं—
आखिर बड़ी संख्या में बिजली मीटर कुएं तक कैसे पहुंचे?
क्या यह किसी एक कर्मचारी की लापरवाही थी या इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहा था?
जिन मीटरों को कथित तौर पर जब्त किया गया था, उनका विभागीय रिकॉर्ड क्या कहता है?
क्या इन मीटरों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई पूरी की गई थी या उन्हें बिना प्रक्रिया के बंद कर दिया गया?
यदि विभाग के रिकॉर्ड में ये मीटर सुरक्षित दिखाए गए हैं, तो वास्तव में वे कुएं में कैसे मिले?
जांच की मांग तेज
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि केवल मीटर मिलने की घटना की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि यह सिलसिला कब से चल रहा था और इसमें किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी जब्त सामग्री को रिकॉर्ड से हटाकर इस प्रकार ठिकाने लगाया गया है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला बन सकता है।
बिजली विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक बिजली विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। साथ ही, प्रशासन की ओर से भी इस दावे की औपचारिक पुष्टि या विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी
फिलहाल यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि कुएं से 50 से अधिक बिजली मीटर मिलने और उन्हें बिजली चोरी के मामलों से जोड़ने के दावे विभिन्न स्थानीय स्रोतों और वायरल वीडियो के आधार पर सामने आए हैं। इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति, रिकॉर्ड प्रबंधन, भ्रष्टाचार और कानून के पालन से जुड़ा एक गंभीर प्रशासनिक मामला बन सकता है। वहीं, यदि जांच में तथ्य अलग सामने आते हैं, तो उसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
news desk MPcg