मुजफ्फरनगर नगर पालिका बोर्ड बैठक: 15 मिनट में 155 प्रस्ताव पास, 150 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्यों को मंजूरी; 600 नामांतरण फाइलों की जांच के बाद होगा फैसला

मुजफ्फरनगर नगर पालिका बोर्ड बैठक: 15 मिनट में 155 प्रस्ताव पास, 150 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्यों को मंजूरी; 600 नामांतरण फाइलों की जांच के बाद होगा फैसला

मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक शनिवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों और विवादों के बीच संपन्न हुई। बैठक में शहर के विकास, सफाई व्यवस्था, पेयजल, कूड़ा निस्तारण और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। खास बात यह रही कि बैठक में करीब 15 मिनट के अंदर 155 प्रस्तावों को पारित कर दिया गया, जिनकी अनुमानित लागत 150 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

हालांकि बैठक जितनी तेजी से प्रस्ताव पारित करने को लेकर चर्चा में रही, उतनी ही चर्चा नगर पालिका की 600 से अधिक नामांतरण फाइलों को लेकर हुए विवाद की भी रही। सभासदों ने इन फाइलों में संभावित अनियमितताओं की आशंका जताते हुए जांच की मांग की। इसके बाद निर्णय लिया गया कि नगर पालिका अध्यक्ष की निगरानी में एक जांच समिति बनाई जाएगी और सत्यापन के बाद ही इन मामलों पर आगे कार्रवाई होगी।

अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप की अध्यक्षता में हुई बैठक

नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अधिशासी अधिकारी (ईओ) एवं बोर्ड सचिव पवन कुमार भी मौजूद रहे।

ईओ पवन कुमार ने बैठक की शुरुआत करते हुए एजेंडा प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रस्ताव संख्या 955 से लेकर 1110 तक कुल 155 प्रस्तावों पर चर्चा की गई।

इन प्रस्तावों में शहर के विकास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे।

नगर पालिका प्रशासन के अनुसार, इन प्रस्तावों के जरिए शहर में:

सफाई व्यवस्था को मजबूत करने,
कूड़ा निस्तारण व्यवस्था सुधारने,
पेयजल आपूर्ति बेहतर करने,
कर्मचारियों से जुड़े मामलों का समाधान करने,
नगर क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने

जैसे कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

15 मिनट में 155 प्रस्ताव पास होने पर चर्चा

बोर्ड बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि बड़ी संख्या में प्रस्ताव बहुत कम समय में पारित कर दिए गए।

बैठक में मौजूद सभासदों ने कई प्रस्तावों पर अपनी सहमति जताई, जबकि कुछ मामलों में उन्होंने आपत्तियां भी दर्ज कराईं।

सभासदों का कहना था कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन हर प्रस्ताव की पूरी जांच और चर्चा भी होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी सामने न आए।

600 से अधिक नामांतरण फाइलों पर रोक, बनेगी जांच समिति

बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा नगर पालिका में लंबित नामांतरण (Mutation) की 600 से अधिक फाइलें रहीं।

नामांतरण प्रक्रिया के तहत संपत्ति के मालिकाना हक में बदलाव किया जाता है। सभासदों ने आरोप लगाया कि इन फाइलों के निपटारे से पहले दस्तावेजों का पूरी तरह सत्यापन जरूरी है।

सभासदों ने कहा कि पहले भी कई मामलों में दस्तावेजों को लेकर सवाल उठते रहे हैं, इसलिए बिना जांच के किसी भी फाइल को मंजूरी देना उचित नहीं होगा।

इस पर निर्णय लिया गया कि:

नगर पालिका अध्यक्ष की निगरानी में सात सदस्यीय जांच समिति बनाई जाएगी।
समिति सभी लंबित फाइलों की जांच करेगी।
दस्तावेजों की सत्यता और नियमों की जांच के बाद ही नामांतरण प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

इस प्रस्ताव को फिलहाल अगली बोर्ड बैठक तक के लिए रोक दिया गया है।

पार्किंग ठेके का मुद्दा उठा, सत्यापन की मांग

नामांतरण फाइलों पर चर्चा के दौरान सभासदों ने नगर पालिका के वाहन पार्किंग ठेके का उदाहरण भी दिया।

सभासदों ने कहा कि पार्किंग ठेके के दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कई सवाल सामने आए थे। इसी कारण नामांतरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में भी पहले दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही हुई तो इसका असर आम जनता पर पड़ सकता है।

छोटे टेंडरों में बड़ी शर्तों पर सभासद नाराज

बोर्ड बैठक में वार्ड नंबर 7 मल्हूपुरा के सभासद मोहम्मद खालिद ने नगर पालिका द्वारा जारी किए जा रहे टेंडरों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि नगर क्षेत्र में बिजली, पानी और छोटे विकास कार्यों के लिए जो टेंडर निकाले जा रहे हैं, उनमें अनावश्यक शर्तें लगाई जा रही हैं।

उनका कहना था कि:

कई कार्यों की लागत 3 लाख से 10 लाख रुपये तक होती है।
लेकिन ठेकेदारों से 1 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक वार्षिक टर्नओवर की मांग की जा रही है।

सभासद ने कहा कि ऐसी शर्तों से छोटे ठेकेदार प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।

उन्होंने नगर पालिका अधिनियम और नियमों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की।

बैठक में बैठने की व्यवस्था को लेकर हंगामा

नगर पालिका बोर्ड बैठक में व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली।

सभासद राजा धीमान और पारुल मित्तल को बैठक में बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिल सकी।

इसको लेकर कई सभासद नाराज हो गए और उन्होंने नगर पालिका अधिकारियों पर व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाया।

सभासदों ने कहा कि बोर्ड बैठक में सभी सदस्यों के बैठने की उचित व्यवस्था पहले से होनी चाहिए थी।

मामले पर अधिशासी अधिकारी पवन कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए भविष्य की बैठकों में बेहतर व्यवस्था करने का आश्वासन दिया।

अकुशल श्रमिकों के वेतन वृद्धि प्रस्ताव को मिली मंजूरी

बैठक में नगर पालिका के अकुशल श्रमिकों के वेतन वृद्धि से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।

सभासदों ने कहा कि सफाई और अन्य जमीनी कार्यों में लगे कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, इसलिए उनके हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।

इसके अलावा शहर की सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण को बेहतर बनाने पर भी सहमति बनी।

सुजड़ू चौक पर वीर अब्दुल हमीद स्मारक प्रस्ताव पर फैसला नहीं

बैठक में सुजड़ू चौक पर वीर अब्दुल हमीद स्मारक बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया।

हालांकि इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका और इसे फिलहाल विचाराधीन रखा गया।

प्रशासनिक स्तर पर जांच और अन्य प्रक्रियाओं के बाद इस पर आगे फैसला लिया जाएगा।

काली नदी पुल के पास महाराजा अजमीढ़ स्मारक की मांग

वार्ड नंबर 49 के सभासद मनोज कुमार वर्मा ने काली नदी पुल के पास महाराजा अजमीढ़ स्मारक बनाए जाने की मांग उठाई।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए स्मारक निर्माण महत्वपूर्ण होगा।

उन्होंने इसके लिए करीब 25 लाख रुपये स्वीकृत करने और क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कराने की मांग रखी।

नगर पालिका अध्यक्ष ने इस मांग पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

राना चौक का नाम बदलने की मांग

बैठक में शहर के राना चौक का नाम बदलकर महाराणा प्रताप चौक किए जाने का प्रस्ताव भी सामने आया।

नगर पालिका अध्यक्ष और ईओ ने कहा कि प्रस्ताव का परीक्षण किया जाएगा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसे शासन स्तर पर भेजा जाएगा।

विकास और पारदर्शिता दोनों पर जोर

मुजफ्फरनगर नगर पालिका की यह बोर्ड बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण रही।

जहां एक ओर 155 विकास प्रस्तावों को मंजूरी देकर शहर में विकास कार्यों को गति देने की बात कही गई, वहीं दूसरी ओर नामांतरण फाइलों और टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस शुरू कर दी है।

सभासदों का कहना है कि जनता के पैसों से होने वाले हर कार्य में पारदर्शिता जरूरी है।

नगर पालिका प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी कार्य नियमों के अनुसार कराए जाएंगे और जांच से जुड़े मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई होगी।

अब सभी की नजर सात सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट और अगली बोर्ड बैठक पर रहेगी, जहां लंबित नामांतरण फाइलों को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।