BCCI का नया फिटनेस नियम: खिलाड़ियों को 5.20 मिनट में पास करना होगा ब्रोंको टेस्ट, इंजरी रोकने के लिए बदले मानक
यो-यो टेस्ट की जगह ब्रोंको टेस्ट पर जोर, 1200 मीटर दौड़ के लिए तय हुआ नया समय; लगातार चोटों के बाद BCCI ने सख्ती बढ़ाई
भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट अब पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होने वाला है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों के फिटनेस स्तर को सुधारने और लगातार बढ़ रही इंजरी की समस्या को देखते हुए नए फिटनेस पैरामीटर लागू किए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, BCCI ने ब्रोंको टेस्ट के मानकों में बदलाव किया है। अब खिलाड़ियों को 1200 मीटर की दौड़ 5 मिनट 15 सेकंड से 5 मिनट 20 सेकंड के अंदर पूरी करनी होगी। इससे पहले ब्रोंको टेस्ट के लिए बेस टाइम करीब 6 मिनट रखा गया था।
इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए 2 किलोमीटर दौड़ (2K टेस्ट) का समय भी तय किया गया है। नए नियमों के अनुसार खिलाड़ियों को यह दौड़ करीब 9 से 10 मिनट के भीतर पूरी करनी होगी।
यो-यो टेस्ट की जगह ब्रोंको टेस्ट पर फोकस
भारतीय क्रिकेटरों की फिटनेस जांच के लिए लंबे समय से यो-यो टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि अब BCCI ने ब्रोंको टेस्ट को प्राथमिक फिटनेस टेस्ट के रूप में शामिल किया है।
ब्रोंको टेस्ट में खिलाड़ियों की स्पीड, सहनशक्ति और रिकवरी क्षमता की जांच की जाती है। क्रिकेट के बदलते प्रारूप और लगातार बढ़ते मैचों के दबाव को देखते हुए इस टेस्ट को ज्यादा उपयोगी माना जा रहा है।
BCCI के बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने खिलाड़ियों की फिटनेस और इंजरी मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए नए न्यूनतम फिटनेस मानक तैयार किए हैं।
इंजरी और फिटनेस में गिरावट के कारण लिया फैसला
BCCI से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय में खिलाड़ियों की फिटनेस और इंजरी मैनेजमेंट को लेकर चिंता बढ़ी है।
टीम मैनेजमेंट और मेडिकल टीम के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए नए बेस पैरामीटर तय किए गए हैं। बोर्ड चाहता है कि सभी खिलाड़ियों की फिटनेस का मूल्यांकन एक समान मानकों के आधार पर किया जाए।
इसके तहत खिलाड़ियों की रनिंग क्षमता, शरीर का वजन, मैदान पर मूवमेंट और लंबे समय तक खेलने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कुछ खिलाड़ियों को फिटनेस क्लियरेंस मिलने पर उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ समय में फिटनेस टेस्ट के नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया गया था। कुछ खिलाड़ियों को टीम की जरूरतों को देखते हुए अपेक्षाकृत आसान मानकों पर फिटनेस क्लियरेंस मिलने की बात सामने आई थी।
रिपोर्ट में हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी का भी जिक्र किया गया है। बताया गया कि कुछ परिस्थितियों में उन्हें पूरी तरह फिट न होने के बावजूद खेलने की अनुमति दी गई थी।
इंग्लैंड दौरे के दौरान हर्षित राणा को लेकर फिटनेस और वजन से जुड़ी चर्चा हुई थी। टीम मैनेजमेंट के अनुसार, उनका वजन तय सीमा से अधिक था। अब उनके लिए वजन और फिटनेस को लेकर नए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
लगातार चोटों पर फिजियो से मांगी गई रिपोर्ट
भारतीय खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने के मामलों को लेकर BCCI और टीम मैनेजमेंट ने गंभीरता दिखाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, टीम के फिजियो कमलेश जैन से खिलाड़ियों की इंजरी को लेकर जवाब मांगा गया है। मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी खिलाड़ी के नाम या अनुभव को देखते हुए फिटनेस मानकों में समझौता नहीं किया जाएगा।
टीम प्रबंधन का मानना है कि कुछ खिलाड़ियों की मैदान पर मोबिलिटी प्रभावित हुई है और लंबे समय तक बल्लेबाजी या गेंदबाजी के दौरान शारीरिक परेशानी सामने आ रही है।
बुमराह की फिटनेस को लेकर भी उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टीम मैनेजमेंट के बीच तालमेल की कमी का एक उदाहरण जसप्रीत बुमराह की फिटनेस से जुड़ा मामला भी रहा।
बताया गया कि बुमराह को श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए फिट करने की योजना थी, लेकिन तय समय तक वह पूरी तरह फिट नहीं हो सके।
इसके बाद फिटनेस प्रक्रिया और खिलाड़ियों की मेडिकल निगरानी को लेकर समीक्षा की गई।
खिलाड़ियों को नए मानकों की जानकारी देर से मिली
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय अनुबंध वाले कुछ खिलाड़ियों को नए फिटनेस मानकों की जानकारी देर से मिली।
श्रीलंका दौरे से पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे मोहम्मद सिराज को अचानक ब्रोंको और 2K टेस्ट से गुजरना पड़ा। इसके बाद सभी खिलाड़ियों को नए फिटनेस सिस्टम के अनुसार तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
ओवर-ट्रेनिंग से बढ़ सकता है खतरा
फिटनेस सुधारने के प्रयासों के बीच विशेषज्ञों ने खिलाड़ियों के वर्कलोड को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा फिटनेस टेस्ट और ट्रेनिंग से खिलाड़ियों पर शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। इससे बर्नआउट और चोट का खतरा भी बढ़ सकता है।
2023 वनडे वर्ल्ड कप, 2024 टी20 वर्ल्ड कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारतीय टीम का इंजरी मैनेजमेंट बेहतर रहा था। उस दौरान खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना फिटनेस बनाए रखने पर जोर दिया गया था।
BCCI का लक्ष्य: फिट और लंबे समय तक खेलने वाली टीम
भारतीय क्रिकेट टीम का शेड्यूल लगातार व्यस्त हो रहा है। टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों फॉर्मेट में खिलाड़ियों को लगातार प्रदर्शन करना पड़ता है।
ऐसे में BCCI नए फिटनेस मानकों के जरिए खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता बढ़ाने और इंजरी की संख्या कम करने की कोशिश कर रहा है।
अब नए ब्रोंको और 2K टेस्ट के जरिए खिलाड़ियों की फिटनेस का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। हालांकि, इन नए नियमों का असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन और इंजरी मैनेजमेंट पर कितना पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
news desk MPcg