नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग फिर तेज, सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी हलचल; भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी

नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग फिर तेज, सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी हलचल; भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी

रुपनदेही, नवलपरासी और कपिलवस्तु में प्रदर्शन तेज, सिद्धार्थनगर की सीमा चौकियों पर निगरानी बढ़ी; 2008 में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित हुआ था नेपाल

नेपाल में एक बार फिर हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ गई है। देश के कई हिस्सों में हिंदू संगठनों और राजशाही समर्थक समूहों की सक्रियता बढ़ने के बाद नेपाल के तराई क्षेत्रों में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इस स्थिति को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा से लगे भारतीय जिलों में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। सीमा चौकियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ ही आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने सुरक्षा बलों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।


तराई क्षेत्रों में पहुंचा हिंदू राष्ट्र आंदोलन

नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब राजधानी और पहाड़ी क्षेत्रों से निकलकर तराई इलाकों तक पहुंच गया है।

नेपाल के सीमावर्ती जिलों रुपनदेही, नवलपरासी और कपिलवस्तु में प्रदर्शन गतिविधियां बढ़ी हैं। इन क्षेत्रों में भारत से जुड़े व्यापारिक और सामाजिक संपर्क भी अधिक हैं, जिसके कारण सीमा सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर विशेष नजर बनाए हुए हैं।

प्रदर्शनकारी संगठन नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने सहित कई मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।


कई संगठनों ने संभाला आंदोलन का मोर्चा

नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर विभिन्न संगठन सक्रिय हैं। इनमें संयुक्त हिंदू मोर्चा, हिंदू सम्राट सेना और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) जैसे संगठन शामिल हैं।

इन संगठनों की ओर से नेपाल की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को आधार बनाते हुए हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेपाल ऐतिहासिक रूप से हिंदू बहुल देश रहा है और देश की पुरानी धार्मिक पहचान को वापस स्थापित किया जाना चाहिए।


गृह मंत्री से हुई बातचीत, नहीं निकला समाधान

आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों और नेपाल सरकार के बीच बातचीत भी हुई। प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर नेपाल के गृह मंत्री से चर्चा की गई, लेकिन अभी तक कोई ऐसा समाधान सामने नहीं आया है जिससे आंदोलन खत्म हो सके।

बातचीत के बाद भी संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है।


भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

नेपाल में राजनीतिक गतिविधियों के बढ़ने के बाद भारत की सीमा सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।

सिद्धार्थनगर जिले में नेपाल सीमा से जुड़ी प्रमुख चौकियों:

  • बढ़नी सीमा चौकी
  • ककरहवा सीमा चौकी
  • खुनुवा सीमा चौकी

पर अतिरिक्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

सीमा से गुजरने वाले वाहनों और यात्रियों की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या असामाजिक तत्वों की आवाजाही को रोका जा सके।


भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा व्यवस्था

भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से खुली सीमा व्यवस्था है। दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा कई क्षेत्रों में आवाजाही करते हैं।

सीमा खुली होने के कारण नेपाल की राजनीतिक गतिविधियों का असर सीमावर्ती भारतीय इलाकों में भी दिखाई देता है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त सतर्कता बरतती हैं।

हालांकि, अधिकारियों के अनुसार सीमा पर सामान्य आवाजाही जारी है और केवल सुरक्षा जांच को मजबूत किया गया है।


नेपाल का धार्मिक इतिहास और 2008 का बदलाव

नेपाल लंबे समय तक दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र रहा था।

लेकिन वर्ष 2008 में राजनीतिक बदलावों के बाद नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया। इसके साथ ही देश में राजशाही व्यवस्था समाप्त हुई और लोकतांत्रिक गणराज्य व्यवस्था लागू हुई।

इसके बाद से ही नेपाल में समय-समय पर हिंदू राष्ट्र की मांग उठती रही है।


राजशाही समर्थक समूह भी उठा रहे पुरानी व्यवस्था की मांग

नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग के साथ-साथ कुछ समूह राजशाही की वापसी की मांग भी करते रहे हैं।

राजशाही समर्थक संगठनों का कहना है कि नेपाल की पहचान उसकी पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से जुड़ी रही है। वहीं दूसरी ओर देश के कई राजनीतिक दल वर्तमान लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में हैं।


नेपाल की राजनीति में फिर केंद्र में आया मुद्दा

हिंदू राष्ट्र का मुद्दा नेपाल की राजनीति में एक संवेदनशील विषय रहा है।

एक तरफ हिंदू राष्ट्र समर्थक संगठन इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं, जबकि दूसरी ओर कई राजनीतिक दल संविधान में स्थापित धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा मानते हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस मुद्दे के दोबारा सक्रिय होने से नेपाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।


सीमावर्ती जिलों में प्रशासन की नजर

भारत के सीमावर्ती जिलों में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

सुरक्षा एजेंसियां नेपाल में होने वाली गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं और जरूरत के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे हैं।

फिलहाल सीमा क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन नेपाल में चल रहे आंदोलनों को देखते हुए सतर्कता जारी रखी गई है।