पेपर लीक रोकने वाला सख्त कानून लोकसभा में पास: 10 साल तक जेल और 10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान, राज्यसभा में वंदे मातरम् संशोधन बिल भी मंजूर

पेपर लीक रोकने वाला सख्त कानून लोकसभा में पास: 10 साल तक जेल और 10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान, राज्यसभा में वंदे मातरम् संशोधन बिल भी मंजूर

संसद के मानसून सत्र में बुधवार का दिन कई बड़े फैसलों और राजनीतिक टकराव का गवाह बना। लोकसभा में पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने वाला ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ ध्वनि मत से पारित हो गया। वहीं राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ भी पास हो गया, जिसके तहत अब वंदे मातरम् के अपमान या उसके गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध के दायरे में आएगा।

लोकसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने करीब 50 मिनट तक भाषण दिया और परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं तथा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उनके भाषण के दौरान ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ।

लोकसभा में पास हुआ पेपर लीक रोकने वाला संशोधन बिल

लोकसभा में बुधवार को विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पेपर लीक रोकने से जुड़ा संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया।

इस नए कानून में पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और संगठित गिरोहों पर कार्रवाई को और सख्त बनाया गया है।

कानून के तहत:

पेपर लीक से जुड़े गंभीर मामलों में अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
दोषियों पर 10 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
परीक्षा प्रक्रिया में धोखाधड़ी, फर्जी वेबसाइट, नकल करवाने और प्रश्नपत्र हासिल करने जैसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई होगी।

सरकार का कहना है कि यह कानून छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम है।

बिल पर मंगलवार को हुई थी 9 घंटे चर्चा

पेपर लीक संशोधन विधेयक पर लोकसभा में मंगलवार को करीब 9 घंटे तक चर्चा हुई थी।

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने पक्ष रखा। वहीं विपक्ष की तरफ से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने अपनी बात रखी।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि सिर्फ कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि परीक्षा एजेंसियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।

राहुल गांधी के भाषण पर सदन में हंगामा

बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक बिल पर करीब 50 मिनट तक भाषण दिया।

राहुल गांधी ने कहा कि देश के छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके सपनों को प्रभावित कर रही हैं।

उन्होंने सरकार पर परीक्षा व्यवस्था में विफल रहने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी के भाषण के दौरान उस समय हंगामा शुरू हुआ जब उन्होंने ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

सत्ता पक्ष ने इन शब्दों पर आपत्ति जताई और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।

गृह मंत्री पर आरोप को लेकर सत्ता पक्ष का विरोध

राहुल गांधी ने अपने भाषण में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर गोली और पैलेट गन चलाने की अनुमति दी गई।

इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि बिना तथ्यों के गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री किसी भी पुलिस कार्रवाई के लिए सीधे आदेश नहीं देते और विपक्ष को तथ्यों के आधार पर बात करनी चाहिए।

राज्यसभा में वंदे मातरम् संशोधन बिल पास

लोकसभा के अलावा राज्यसभा में भी बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुआ।

राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी।

इस संशोधन के बाद वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण मिलेगा।

कानून के तहत:

वंदे मातरम् का अपमान करना अपराध माना जाएगा।
जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालना दंडनीय होगा।
राष्ट्रीय गीत के सम्मान को बनाए रखने के लिए कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

वंदे मातरम् को वर्ष 1950 में राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया था।

संसद की कार्यवाही कल तक स्थगित

दिनभर चले हंगामे और बहस के बाद लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही गुरुवार 30 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

लोकसभा में पेपर लीक कानून पारित होने के बाद भी विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे।

क्यों जरूरी हुआ पेपर लीक कानून?

पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं।

इन घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं।

सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली को मजबूत करेगा और पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

वहीं विपक्ष की मांग है कि कानून के साथ-साथ परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ाई जाए।

निष्कर्ष

संसद के मानसून सत्र में बुधवार को दो बड़े विधेयक पारित हुए। लोकसभा में पेपर लीक रोकने वाले कानून को मंजूरी मिली, जिसमें दोषियों के लिए कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं राज्यसभा में वंदे मातरम् के सम्मान से जुड़ा संशोधन बिल पास हुआ। हालांकि, इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान संसद में राजनीतिक गर्मी और आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले।