भोपाल की सड़कों पर उतरीं AC ई-बसें: पहली बार यात्रियों के साथ 3 रूट पर संचालन, ₹7 से ₹40 तक किराया; व्हीलचेयर के लिए हाइड्रोलिक डोर

भोपाल की सड़कों पर उतरीं AC ई-बसें: पहली बार यात्रियों के साथ 3 रूट पर संचालन, ₹7 से ₹40 तक किराया; व्हीलचेयर के लिए हाइड्रोलिक डोर

 राजधानी भोपाल के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में गुरुवार से एक नई सुविधा जुड़ गई। लंबे ट्रायल और टिकटिंग सिस्टम की टेस्टिंग के बाद AC इलेक्ट्रिक बसें आम यात्रियों को लेकर सड़कों पर उतर गईं। शुरुआती चरण में 10 ई-बसों का संचालन किया जा रहा है। ये बसें तीन प्रमुख रूट पर चल रही हैं और यात्रियों को मौजूदा सिटी बसों के अनुरूप किराए में ही AC सफर उपलब्ध कराया जा रहा है।

यह पहल भोपाल के सार्वजनिक परिवहन को दोबारा मजबूत करने के साथ-साथ शहर में प्रदूषण कम करने और मेट्रो के लिए बेहतर फीडर कनेक्टिविटी विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ई-बस सेवा को PM E-Bus Seva के तहत शहर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।

3 रूट पर शुरू हुआ संचालन

पहले चरण में 10 AC ई-बसें तीन रूट पर यात्रियों को लेकर चल रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

चिरायु हॉस्पिटल से DB मॉल मेट्रो स्टेशन वाया बैरागढ़-चिचली
चिरायु हॉस्पिटल से DB मॉल मेट्रो स्टेशन
DB मॉल मेट्रो स्टेशन से कोच फैक्ट्री क्षेत्र

शामिल हैं।

इन रूटों का उद्देश्य शहर के प्रमुख आवासीय इलाकों को व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों और मेट्रो कनेक्टिविटी से जोड़ना है। इससे उन यात्रियों को भी फायदा होगा, जिन्हें मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए स्थानीय सार्वजनिक परिवहन की जरूरत है।

₹7 से ₹40 तक किराया, AC सफर के लिए अलग चार्ज नहीं

नई बसों की सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को AC सुविधा के लिए अलग से प्रीमियम किराया नहीं देना होगा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक किराया करीब ₹7 से ₹40 तक रखा गया है और यह मौजूदा सिटी बस किराए के अनुरूप है।

यानी सामान्य सिटी बस के किराए में ही यात्रियों को एयर कंडीशनिंग और आधुनिक सुविधाओं वाली इलेक्ट्रिक बस में सफर करने का मौका मिलेगा।

पहले ट्रायल, अब यात्रियों के साथ सड़क पर

भोपाल में ई-बसों का ट्रायल रन जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में बसों को अलग-अलग मार्गों पर चलाकर उनकी स्पीड, पिकअप, सड़क की स्थिति और संचालन से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं को परखा गया। इसके बाद यात्रियों के साथ संचालन की दिशा में कदम बढ़ाया गया।

इससे पहले ट्रायल के दौरान यात्रियों के लिए मुफ्त यात्रा की योजना भी सामने आई थी, जबकि नियमित सेवा के लिए किराया लागू किया जाना था।

दो शिफ्ट में चलेंगी बसें

शुरुआती संचालन दो शिफ्ट में किया जा रहा है। पहली शिफ्ट सुबह से दोपहर तक और दूसरी दोपहर बाद से शाम तक रखी गई है। हालांकि, शुरुआती चरण में रूट और संचालन के समय को लेकर व्यवस्था को धीरे-धीरे स्थिर किया जा रहा है।

यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल बसों की नियमित टाइमिंग और फ्रीक्वेंसी को लेकर हो सकती है। नई सेवा के विस्तार के साथ इसे व्यवस्थित किए जाने की उम्मीद है।

भोपाल में सिटी बसों की संख्या घटी, ई-बसों से उम्मीद

भोपाल में कुछ साल पहले तक सिटी बसों का बड़ा नेटवर्क था, लेकिन समय के साथ बसों की संख्या काफी कम हुई। ऐसे में नई ई-बस सेवा को शहर के कमजोर पड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को फिर से मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

नई बसों का संचालन पुराने बस स्टॉप से ही किए जाने की व्यवस्था है। इसका फायदा यह होगा कि यात्रियों को नए स्टॉप तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

व्हीलचेयर और ट्राइसिकल के लिए खास सुविधा

इन ई-बसों में दिव्यांग यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। बस में हाइड्रोलिक डोर/रैंप सिस्टम दिया गया है, जिसकी मदद से व्हीलचेयर या ट्राइसिकल से चलने वाले यात्री अपेक्षाकृत आसानी से बस में चढ़ और उतर सकेंगे।

हाइड्रोलिक प्रवेश व्यवस्था के सामने पर्याप्त जगह भी रखी गई है, ताकि व्हीलचेयर या ट्राइसिकल को बस के अंदर सुरक्षित तरीके से रखा जा सके।

यह सुविधा भोपाल के सार्वजनिक परिवहन में दिव्यांग यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

हर बस में 6 CCTV कैमरे

यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक बस में 6 CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की निगरानी डिपो में बनाए गए कंट्रोल रूम से की जाएगी।

बस के दरवाजों को खोलने और बंद करने की व्यवस्था ड्राइवर के नियंत्रण में रहेगी। इससे बस के रुकने और यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहतर रखने में मदद मिलेगी।

छोटी बॉडी, भोपाल की सड़कों के लिए उपयोगी

नई ई-बसों की लंबाई करीब 9 मीटर बताई गई है। मौजूदा कई सिटी बसों की लंबाई इससे अधिक है। भोपाल के कुछ संकरे और अधिक ट्रैफिक वाले मार्गों पर छोटी लंबाई वाली बसों का संचालन अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

हालांकि, जिन इलाकों में पहले से भारी ट्रैफिक और जाम की समस्या है, वहां ई-बसों को भी सामान्य यातायात की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

30 ई-बसें पहुंचीं, आगे बेड़ा बढ़ाने की तैयारी

भोपाल में शुरुआती चरण के लिए 30 ई-बसें पहुंच चुकी हैं। इनमें से फिलहाल 10 बसों को संचालन में लगाया गया है। आगे चरणबद्ध तरीके से और बसों को सड़कों पर उतारने की तैयारी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, शहर में आने वाले समय में ई-बसों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। राज्य स्तर पर 15 अगस्त को औपचारिक लोकार्पण की तैयारी भी बताई गई है।

बैरागढ़ डिपो में चार्जिंग की व्यवस्था

ई-बसों के नियमित संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। यहां 11 चार्जिंग पॉइंट लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।

ई-बस सेवा की सफलता के लिए चार्जिंग व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है, क्योंकि बड़ी संख्या में बसों के संचालन के साथ समय पर चार्जिंग और रोटेशन बनाए रखना जरूरी होगा।

मेट्रो के साथ बनेगा कनेक्शन

भोपाल में ई-बस सेवा का एक अहम उद्देश्य लास्ट-माइल और फीडर कनेक्टिविटी को बेहतर करना भी है। शहर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के साथ बसों और मेट्रो के बीच बेहतर कनेक्शन यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक उपयोगी बना सकता है। ई-बसों के ट्रायल को इसी दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

अब असली परीक्षा नियमित संचालन की

AC ई-बसों के सड़क पर उतरने से भोपाल के यात्रियों को निश्चित तौर पर सार्वजनिक परिवहन का एक नया विकल्प मिला है। कम किराए में AC सफर, इलेक्ट्रिक संचालन, CCTV और दिव्यांगों के लिए हाइड्रोलिक प्रवेश व्यवस्था इसे मौजूदा बस सेवा से अलग बनाती है।

लेकिन असली चुनौती अब इन बसों की नियमितता, पर्याप्त संख्या, सही टाइमिंग, चार्जिंग व्यवस्था और ज्यादा से ज्यादा इलाकों तक पहुंच सुनिश्चित करने की होगी। अगर ये व्यवस्थाएं लगातार बनी रहती हैं, तो ई-बसें भोपाल के पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।