आर प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास: सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज चैंपियन बने, करियर का पहला GCT खिताब जीता

आर प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास: सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज चैंपियन बने, करियर का पहला GCT खिताब जीता

भारतीय ग्रैंडमास्टर ने 35 में से 23.5 अंक जुटाए, सिंदारोव को 1.5 अंक से पीछे छोड़ा; जीते करीब 48 लाख रुपए की इनामी राशि

 भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने शतरंज की दुनिया में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। उन्होंने अमेरिका के सेंट लुइस में खेले गए ग्रैंड चेस टूर (GCT) सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट-2026 का खिताब अपने नाम कर लिया।

प्रज्ञानानंदा ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए रैपिड और ब्लिट्ज दोनों फॉर्मेट में बढ़त बनाए रखी। ब्लिट्ज के दूसरे अंतिम राउंड में उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ ड्रॉ खेलते ही उन्होंने एक राउंड बाकी रहते खिताब पक्का कर लिया।

यह प्रज्ञानानंदा के करियर का पहला GCT रैपिड एंड ब्लिट्ज खिताब है।

35 में से 23.5 अंक जुटाकर बने चैंपियन

टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा ने कुल 35 में से 23.5 अंक हासिल किए। उन्होंने दूसरे स्थान पर रहे जावोखिर सिंदारोव को 1.5 अंक से पीछे छोड़ा, जिन्होंने 22 अंक बनाए।

इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा को 50 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 48 लाख रुपए) की पुरस्कार राशि मिली। इसके अलावा उन्हें ग्रैंड चेस टूर के लिए 13 अंक भी मिले।

पूरे टूर्नामेंट में कायम रखी बढ़त

पांच दिन तक चले इस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा लगातार शीर्ष स्थान पर बने रहे। सिंदारोव ने उन्हें कड़ी चुनौती दी, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने दबाव के बीच अपनी बढ़त बरकरार रखी।

ब्लिट्ज के अंतिम नौ राउंड में प्रज्ञानानंदा ने तीन मुकाबले जीते, पांच ड्रॉ खेले और सिर्फ एक मैच गंवाया।

रैपिड और ब्लिट्ज दोनों में सबसे ज्यादा अंक

प्रज्ञानानंदा ने सिर्फ संयुक्त खिताब ही नहीं जीता, बल्कि टूर्नामेंट के दोनों हिस्सों में शानदार प्रदर्शन किया।

उन्होंने रैपिड और ब्लिट्ज दोनों वर्गों में सबसे ज्यादा अंक हासिल किए। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि स्कोर देखकर मुकाबला आसान लग सकता है, लेकिन असल में सिंदारोव ने आखिरी तक कड़ी चुनौती दी।

सिंदारोव के खिलाफ ड्रॉ से पक्का हुआ खिताब

ब्लिट्ज के दूसरे अंतिम राउंड में प्रज्ञानानंदा का सामना सीधे सिंदारोव से हुआ। इस मुकाबले में ड्रॉ उनके लिए खिताब जीतने के लिए पर्याप्त था।

मुकाबले के एंडगेम में प्रज्ञानानंदा को मोहरे का नुकसान हुआ, लेकिन उन्होंने शानदार बचाव करते हुए गेम को ड्रॉ करा लिया। इसी के साथ आखिरी राउंड से पहले ही उनकी जीत तय हो गई।

अब सिंकफील्ड कप पर नजर

ग्रैंड चेस टूर का अगला बड़ा टूर्नामेंट सिंकफील्ड कप है, जो 10 अगस्त से शुरू होगा।

यह टूर्नामेंट GCT फाइनल्स से पहले का आखिरी मुकाबला होगा। इसके बाद टॉप-4 खिलाड़ी फाइनल्स में जगह बनाएंगे, जहां विजेता को 2 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि मिलेगी।

नॉर्वे चेस जीतकर भी दिखा चुके हैं दम

प्रज्ञानानंदा साल 2026 में शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। इससे पहले जून 2026 में उन्होंने प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का खिताब भी जीता था।

ओस्लो में खेले गए इस टूर्नामेंट के अंतिम दौर में उन्होंने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी। उन्होंने आखिरी चरण में लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतकर यह उपलब्धि हासिल की थी।

तमिलनाडु सरकार ने किया था सम्मान

नॉर्वे चेस में जीत के बाद तमिलनाडु सरकार ने भी प्रज्ञानानंदा को सम्मानित किया था। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सम्मान दिया गया और स्पोर्ट्स डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ तमिलनाडु (SDAT) की ओर से 50 लाख रुपए का पुरस्कार भी दिया गया था।

12 साल की उम्र में बने थे ग्रैंडमास्टर

चेन्नई के रहने वाले आर प्रज्ञानानंदा का जन्म 10 अगस्त 2005 को हुआ था। उन्होंने बेहद कम उम्र में शतरंज में बड़ी पहचान बनाई।

साल 2018 में सिर्फ 12 साल, 10 महीने और 13 दिन की उम्र में वह ग्रैंडमास्टर बने थे। उस समय वह भारत के सबसे कम उम्र के और दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर थे।

उनकी बहन आर वैशाली भी ग्रैंडमास्टर हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

भारतीय शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि

सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज खिताब के साथ प्रज्ञानानंदा ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे प्रज्ञानानंदा से भारतीय शतरंज को आने वाले समय में कई और बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद है।