इंदौर गैस पाइपलाइन हादसा: हाईकोर्ट में गलत शपथपत्र देने पर SDM ने मांगी माफी, 17 अगस्त को तय होगा मुआवजा

इंदौर गैस पाइपलाइन हादसा: हाईकोर्ट में गलत शपथपत्र देने पर SDM ने मांगी माफी, 17 अगस्त को तय होगा मुआवजा

SDM घनश्याम धनगर बोले- मुआवजे और इलाज खर्च की जानकारी देने में हुई थी गलती, कोर्ट ने सरकार और नगर निगम को पीड़ितों की मदद सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

इंदौर। इंदौर के चर्चित अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसे को लेकर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बड़ा अपडेट सामने आया है। मामले में एसडीएम घनश्याम धनगर ने कोर्ट में पेश होकर पिछली सुनवाई के दौरान दिए गए शपथपत्र में हुई गलती को लेकर माफी मांगी है। एसडीएम की ओर से अदालत को बताया गया कि मुआवजे और इलाज के खर्च से जुड़ी जानकारी देने में त्रुटि हो गई थी।

एसडीएम घनश्याम धनगर शुक्रवार को खुद हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पिछली सुनवाई में पेश किए गए शपथ पत्र में कुछ जानकारियां सही तरीके से प्रस्तुत नहीं हो पाईं, जिसके कारण भ्रम की स्थिति बनी। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए अदालत से माफी मांगी।

हादसे में घायल लोगों के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार

सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई कि गैस पाइपलाइन हादसे में घायल हुए सभी लोगों के इलाज का पूरा खर्च शासन की ओर से वहन किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी बताया कि पीड़ितों को किसी तरह की आर्थिक परेशानी नहीं आने दी जाएगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन और नगर निगम को निर्देश दिए कि हादसे में प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज के साथ-साथ नियमानुसार उचित मुआवजा भी उपलब्ध कराया जाए।

मुआवजे की राशि पर अगली सुनवाई में फैसला

हाईकोर्ट ने अभी मुआवजे की अंतिम राशि तय नहीं की है। अदालत ने कहा कि पीड़ितों को कितनी आर्थिक सहायता दी जाएगी, इस पर अगली सुनवाई में फैसला किया जाएगा। इसके लिए कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख तय की है।

प्रशासन को हादसे से प्रभावित लोगों की स्थिति, नुकसान और इलाज से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मुआवजे को लेकर उचित निर्णय लिया जा सके।

क्या था अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसा

इंदौर में अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसे के बाद कई लोग इसकी चपेट में आए थे। हादसे में लोग झुलस गए थे, जिसके बाद इलाज और मुआवजे को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा था।

हादसे के बाद पीड़ितों और उनके परिवारों ने प्रशासन से मदद की मांग की थी। मामले में कोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है और सरकार से राहत एवं पुनर्वास को लेकर जानकारी मांगी जा रही है।

अब अगली सुनवाई में यह तय होगा कि हादसे में प्रभावित लोगों को कितनी राशि का मुआवजा दिया जाएगा। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।