भोपाल में घरों से चल रहे कारोबार पर सीलिंग कार्रवाई, क्या पूरे MP में लागू होंगे नियम?
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, सरकार ने बनाई समिति; जानिए रिहायशी इलाकों में चल रहे कारोबार पर क्या है पूरा विवाद
भोपाल। राजधानी भोपाल में रिहायशी इलाकों में चल रहे दुकानों, क्लीनिक, कैफे, ब्यूटी पार्लर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर शुरू हुई सीलिंग कार्रवाई अब बड़ा मुद्दा बन गई है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं।
मामले को लेकर एक ओर जहां नगर निगम आवासीय क्षेत्रों में नियमों के खिलाफ चल रहे कारोबार पर कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी संगठनों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।
कैसे शुरू हुआ सीलिंग अभियान का विवाद?
भोपाल में कई रिहायशी कॉलोनियों और आवासीय क्षेत्रों में लंबे समय से छोटे-बड़े कारोबार संचालित हो रहे हैं। इनमें दुकानें, क्लीनिक, कैफे, ब्यूटी पार्लर और अन्य व्यवसाय शामिल हैं।
नगर निगम का कहना है कि कई जगहों पर आवासीय जमीन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जो मास्टर प्लान और भूमि उपयोग नियमों के अनुसार नहीं है। इसी आधार पर पहले नोटिस जारी किए गए और बाद में सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई।
21 साल पुराने मास्टर प्लान पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कई वर्षों से रिहायशी क्षेत्रों में कारोबार चल रहे थे तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने मास्टर प्लान, भूमि उपयोग परिवर्तन की धीमी प्रक्रिया और प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय तक निगरानी की कमी के कारण ऐसी स्थिति बनी। समय के साथ कई घरों में व्यवसाय शुरू हो गए और अब नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
क्या भोपाल के बाद दूसरे शहरों में भी होगी कार्रवाई?
भोपाल की कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्रदेश के दूसरे शहरों में भी ऐसे कारोबारों पर सीलिंग अभियान चल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी शहर में आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां स्थानीय मास्टर प्लान और भवन नियमों के खिलाफ पाई जाती हैं, तो वहां भी कार्रवाई की संभावना हो सकती है।
हालांकि, हर शहर में कार्रवाई वहां के नगर निकाय नियमों, विकास योजना और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर होगी। इसे पूरे प्रदेश में तुरंत लागू होने वाला अभियान नहीं माना जा सकता।
कार्रवाई के आंकड़ों पर भी विवाद
सीलिंग कार्रवाई के दौरान नगर निगम ने बड़ी संख्या में नोटिस जारी करने और कई प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की बात कही है। वहीं व्यापारी संगठनों ने कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से चल रहे कारोबार पर अचानक कार्रवाई करने से रोजगार और व्यापार प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमों के अनुसार और चरणबद्ध तरीके से की जा रही है।
सरकार और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
फिलहाल इस मामले में आगे की दिशा राज्य सरकार की नई नीति और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से तय होगी।
राज्य सरकार ने समाधान के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय के आदेशों के पालन पर जोर दिया है। आने वाले समय में यह तय होगा कि रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे कारोबारों को लेकर क्या नई व्यवस्था बनाई जाती है।
news desk MPcg