लव और लैंड जिहाद पर सीएम योगी का बयान, समाज से एकजुट होकर खड़े होने की अपील

लव और लैंड जिहाद पर सीएम योगी का बयान, समाज से एकजुट होकर खड़े होने की अपील

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर Yogi Adityanath ने रामकथा महोत्सव के समापन अवसर पर “लव जिहाद” और “लैंड जिहाद” जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए समाज से एकजुट होकर इन कथित चुनौतियों का सामना करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि समाज को विभाजित करने वाली ताकतों के खिलाफ सामूहिक चेतना और एकता आवश्यक है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएं देश की एकता और अखंडता की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मन में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है, और जो भारतीय संस्कारों और परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकते, उनके लिए यह देश केवल एक भूमि मात्र नहीं हो सकता।

उन्होंने आगे कहा कि समाज में ऐसी प्रवृत्तियां भी देखने को मिलती हैं जो जाति, भाषा, क्षेत्र और अन्य आधारों पर लोगों को विभाजित करने का प्रयास करती हैं। ऐसे प्रयासों से सावधान रहने की आवश्यकता है और समाज को इनका मुकाबला एकजुट होकर करना होगा।

रामकथा महोत्सव में दिया संदेश

रामकथा महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह जीवन मूल्यों, मर्यादा और कर्तव्य का मार्गदर्शन भी करती है। उन्होंने कहा कि कथा सुनना तभी सार्थक है जब उसे जीवन में उतारा जाए।

उन्होंने संत परंपरा की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की संत शक्ति हमेशा समाज को जोड़ने और सही दिशा देने का कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि व्यासपीठ से दिए गए संदेश को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे आत्मसात करना चाहिए।

सामाजिक एकता पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में एकता है। उन्होंने कहा कि समाज को तोड़ने वाली ताकतें हमेशा सक्रिय रहती हैं, लेकिन भारत की परंपरा और संस्कृति उन्हें कमजोर करने के बजाय और मजबूत होकर सामने आती है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश की प्रगति और विकास के लिए सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण आवश्यक है। यदि समाज विभाजित होता है तो विकास की गति प्रभावित होती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ

सीएम योगी ने अपने संबोधन में धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आदर्शों और मर्यादाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के जीवन से यह सीख मिलती है कि सत्य, धर्म और कर्तव्य का पालन करना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों और महापुरुषों की भूमिका हमेशा मार्गदर्शक की रही है और आगे भी यह परंपरा समाज को दिशा देती रहेगी।