उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका अब साल में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर, लाखों परिवारों पर बढ़ेगा बोझ
रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। अब योजना के तहत लाभार्थियों को सालभर में केवल चार सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर ही मिल सकेंगे। पहले एक वर्ष में 12 सिलेंडरों पर सब्सिडी का लाभ मिलता था, लेकिन नई व्यवस्था के बाद यह संख्या घटाकर चार कर दी गई है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लाखों परिवारों की घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
अंबेडकरनगर जिले में इस फैसले का सीधा असर 1.82 लाख से अधिक उज्ज्वला लाभार्थियों पर पड़ेगा। जिले की अकबरपुर, भीटी, जलालपुर, टांडा और आलापुर तहसीलों में बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं। अब उन्हें पूरे साल में केवल चार सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी, जबकि बाकी सिलेंडर बाजार मूल्य पर खरीदने होंगे।
जिले में कुल 4.75 लाख एलपीजी कनेक्शनधारक हैं, जिनमें बड़ी संख्या उज्ज्वला योजना से जुड़ी महिलाओं की है। ऐसे परिवार, जो पहले से महंगाई की मार झेल रहे हैं, उनके लिए यह बदलाव घरेलू खर्च बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कई परिवारों का कहना है कि सीमित आय के कारण बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर खरीदना उनके लिए आसान नहीं होगा।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को जमा-मुक्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना ने करोड़ों परिवारों को धुएं से मुक्ति दिलाने और स्वच्छ ईंधन अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम होने से लाभार्थियों के सामने अतिरिक्त आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रसोई गैस की कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में सब्सिडी का दायरा घटने से गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि उन्हें अधिक कीमत पर सिलेंडर खरीदना पड़ा तो वे फिर से पारंपरिक ईंधनों की ओर लौटने को मजबूर हो सकते हैं।
फिलहाल इस बदलाव को लेकर लाभार्थियों के बीच चर्चा तेज है और लोग सरकार से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। आने वाले समय में इसका असर घरेलू बजट और एलपीजी उपभोग के पैटर्न पर भी देखने को मिल सकता है।
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