राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच बड़ा दावा, 1250 श्रीराम शिलाएं गायब, हीरे जड़ी शिला का भी नहीं मिला पता

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच बड़ा दावा, 1250 श्रीराम शिलाएं गायब, हीरे जड़ी शिला का भी नहीं मिला पता

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब एक और बड़ा दावा सामने आया है। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने आरोप लगाया है कि वर्ष 1989 में देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या पहुंचीं करीब 1250 सोने, चांदी, अष्टधातु, हीरे और माणिक्य जड़ी 'श्रीराम शिलाएं' अब गायब हैं।

दुबे का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान गांव-गांव, शहर-शहर और विदेशों से श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए विशेष शिलाएं भेजी थीं। इन शिलाओं को धार्मिक अनुष्ठानों के बाद अयोध्या लाया गया था और इन्हें आस्था का प्रतीक माना जाता था।

मॉरीशस से आई थी सबसे कीमती शिला

दावे के अनुसार, इन शिलाओं में सबसे बहुमूल्य शिला मॉरीशस से आई थी, जिसे सोने और चांदी से तैयार किया गया था। इसके अलावा मुंबई के एक उद्योगपति और श्रद्धालु द्वारा हीरे जड़ी विशेष शिला भी दान की गई थी। कई अन्य शिलाएं अष्टधातु, चांदी और बहुमूल्य धातुओं से निर्मित थीं, जिन्हें रामभक्तों ने श्रद्धा के साथ अर्पित किया था।

1989 के शिलापूजन अभियान से जुड़ा है मामला

बताया जाता है कि 1989 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान देशभर में व्यापक स्तर पर शिलापूजन अभियान चलाया गया था। लाखों श्रद्धालुओं ने पूजन के बाद शिलाएं अयोध्या भेजी थीं। इनमें से कुछ विशेष धातुओं और रत्नों से बनी शिलाओं को अलग सुरक्षित रखने की बात कही जाती रही है।

अब धर्मसेना का दावा है कि ऐसी लगभग 1250 बहुमूल्य शिलाओं का कोई रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और उनका वर्तमान स्थान स्पष्ट नहीं है।

चढ़ावा विवाद के बीच उठे नए सवाल

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच पहले से ही विशेष जांच दल (SIT) के स्तर पर चल रही है। इसी बीच बहुमूल्य शिलाओं के गायब होने का दावा सामने आने से विवाद और गहरा गया है। इस दावे के बाद मंदिर प्रबंधन और संबंधित संस्थाओं की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।

हालांकि, इन 1250 शिलाओं के गायब होने के दावे की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी, मंदिर ट्रस्ट या जांच टीम द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल यह मामला आस्था, विरासत और मंदिर प्रबंधन से जुड़े सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल हो गया है और सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।