वाराणसी में ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का भंडाफोड़, कानपुर के दो युवक गिरफ्तार; रोजाना 5 लाख रुपये का होता था लेनदेन
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए कानपुर के दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों के माध्यम से लाखों रुपये का अवैध कारोबार संचालित कर रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित प्रतिदिन करीब पांच लाख रुपये का लेनदेन करते थे और 50 से अधिक बैंक खातों का संचालन कर रहे थे।
पुलिस ने जगतगंज क्षेत्र स्थित दास नगर कॉलोनी के एक किराए के मकान में छापेमारी कर कानपुर नगर निवासी दीपक सिंह और नवनीत सिंह को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान उनके कब्जे से नौ एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद किया गया है। बरामद उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
तकनीकी जांच से मिला गिरोह का सुराग
साइबर क्राइम के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विदुष सक्सेना ने पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि पुलिस को ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े एक संदिग्ध मोबाइल नंबर की जानकारी मिली थी। इसके बाद तकनीकी विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए गिरोह तक पहुंच बनाई गई।
जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों वाले मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की निगरानी की। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद टीम ने छापेमारी कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
मोबाइल फोन से मिले अहम डिजिटल सबूत
पुलिस के अनुसार बरामद मोबाइल फोन की जांच में कई ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े पैनल, यूजर आईडी, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, क्यूआर कोड और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली है। इन साक्ष्यों से यह संकेत मिला है कि गिरोह लंबे समय से ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारोबार में सक्रिय था।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपित विभिन्न लोगों के नाम पर खोले गए बैंक खातों और मोबाइल सिम कार्डों का उपयोग कर ऑनलाइन लेनदेन को संचालित करते थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा इसका संचालन किस स्तर से किया जा रहा था।
50 से अधिक खातों का संचालन
प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि गिरोह 50 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहा था। इन खातों के माध्यम से बेटिंग से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे लेनदेन को ट्रैक करना मुश्किल हो सके। पुलिस को आशंका है कि नेटवर्क का दायरा वाराणसी और कानपुर से आगे अन्य जिलों तक भी फैला हो सकता है।
फर्जी सिम और बैंक खातों की जांच शुरू
साइबर क्राइम पुलिस अब बरामद सिम कार्डों, बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की विस्तृत जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इन खातों का उपयोग साइबर ठगी या अन्य वित्तीय अपराधों में भी किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और जुआ अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है।
ऑनलाइन बेटिंग पर पुलिस की सख्ती
हाल के वर्षों में ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। साइबर अपराध शाखा लगातार ऐसे नेटवर्क पर निगरानी रख रही है, जो मोबाइल एप, वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को अवैध सट्टेबाजी की ओर आकर्षित करते हैं।
पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन बेटिंग न केवल आर्थिक अपराधों को बढ़ावा देती है, बल्कि साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों से भी जुड़ी हो सकती है। इसी कारण ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
news desk MPcg