राम मंदिर को दान की गई 200 किलो चांदी पर उठे सवाल, सिंधी समाज ने मांगा हिसाब; बोले- न रसीद मिली, न उपयोग की जानकारी
अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। विश्व सिंधी सेवा संगम (VSSS) ने दावा किया है कि वर्ष 2021 में संगठन की ओर से राम मंदिर निर्माण के लिए लगभग 200 किलो चांदी की 200 ईंटें दान की गई थीं, लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें न तो दान की कोई आधिकारिक रसीद मिली और न ही यह जानकारी दी गई कि उस चांदी का उपयोग आखिर कहां किया गया।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि देश और विदेश में बसे सिंधी समाज के लोगों से चंदा जुटाकर यह चांदी एकत्र की गई थी। उस समय इसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये थी, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार इसकी कीमत कई करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। ऐसे में समाज के लोगों के बीच दान की गई संपत्ति के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
देश-विदेश के सिंधी समाज ने मिलकर जुटाई थी चांदी
विश्व सिंधी सेवा संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजू मनवानी के अनुसार राम मंदिर निर्माण में योगदान देने के उद्देश्य से संगठन ने भारत सहित विभिन्न देशों में रहने वाले सिंधी समुदाय के लोगों से सहयोग मांगा था। श्रद्धालुओं की ओर से बड़ी संख्या में योगदान मिला, जिसके बाद लगभग 200 किलो चांदी एकत्र हुई।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक ईंट का वजन करीब एक किलो था और उन पर सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल की आकृतियां और धार्मिक प्रतीक उकेरे गए थे। यह दान केवल आर्थिक सहयोग नहीं बल्कि समाज की आस्था और राम मंदिर आंदोलन के प्रति समर्पण का प्रतीक था।
चंपत राय को सौंपी गई थीं चांदी की ईंटें
संगठन का दावा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से पहले दिल्ली में मुलाकात हुई थी। बाद में अयोध्या में एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर के भीतर चांदी की ईंटें सौंपी गईं।
संगठन के मुताबिक उस दौरान ट्रस्ट के कई अधिकारी और सिंधी समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे। पूरे कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड किए गए थे, जो दान प्रक्रिया का प्रमाण हैं।
रसीद देने का आश्वासन मिला, लेकिन आज तक नहीं मिली
संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विजय पाहुजा का कहना है कि दान के समय ट्रस्ट की ओर से बताया गया था कि चांदी की शुद्धता और गुणवत्ता की जांच के बाद आधिकारिक रसीद जारी की जाएगी। हालांकि वर्षों बीत जाने के बावजूद कोई रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि रसीद प्राप्त करने के लिए कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके कारण अब दानदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
मुख्य द्वार पर लगाने का दिया गया था आश्वासन
विश्व सिंधी सेवा संगम की युवा इकाई के अध्यक्ष आनंद सबधानी ने बताया कि उन्होंने विशेष रूप से यह सवाल पूछा था कि चांदी की ईंटों का उपयोग कहां किया जाएगा। उन्हें बताया गया था कि मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपर इन ईंटों का उपयोग किया जाएगा।
लेकिन मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद भी ऐसा कहीं दिखाई नहीं दिया। इसके बाद संगठन ने यह मान लिया था कि संभवतः चांदी को पिघलाकर निर्माण कार्य में उपयोग कर लिया गया होगा। अब वे इसी संबंध में आधिकारिक जानकारी चाहते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के बाद फिर उठे सवाल
हाल के दिनों में राम मंदिर निर्माण और दान से जुड़े कुछ मामलों को लेकर चर्चा होने के बाद सिंधी समाज के प्रतिनिधियों ने दोबारा इस मुद्दे को उठाया है। उनका कहना है कि वे किसी पर आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि केवल यह जानना चाहते हैं कि समाज द्वारा श्रद्धापूर्वक दान की गई चांदी का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।
राजू मनवानी ने कहा कि यदि चांदी मंदिर निर्माण में इस्तेमाल हुई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे दानदाताओं के मन में उठ रहे सभी सवाल स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
300 से अधिक लोगों ने दिया था योगदान
संगठन के अनुसार इस अभियान में भारत और विदेशों में रहने वाले लगभग 300 से अधिक सिंधी परिवारों और श्रद्धालुओं ने अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दिया था। इसलिए दान से जुड़े दस्तावेजी प्रमाण और उपयोग की जानकारी देना आवश्यक है।
पदाधिकारियों का कहना है कि दानदाताओं के बीच लगातार यह सवाल पूछा जा रहा है कि जिस चांदी को मंदिर निर्माण के लिए समर्पित किया गया था, उसका अंतिम उपयोग क्या हुआ।
जांच पर जताया भरोसा
विश्व सिंधी सेवा संगम ने कहा है कि उन्हें न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पूरा भरोसा है। संगठन का कहना है कि यदि किसी प्रकार की जांच होती है तो सच्चाई सामने आ जाएगी। साथ ही उन्होंने मंदिर ट्रस्ट से भी इस विषय पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की है।
फिलहाल यह मामला धार्मिक आस्था, दान की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा होने के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। सिंधी समाज अब यह जानना चाहता है कि राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पित उनकी 200 किलो चांदी आखिर कहां और किस रूप में इस्तेमाल की गई।
news desk MPcg