भोपाल में ई-बसों का ट्रायल रन शुरू: बैरागढ़ डिपो से तीन रूट पर दौड़ीं इलेक्ट्रिक बसें, अगस्त से यात्रियों के लिए शुरू हो सकती है सेवा; चार्जिंग सिस्टम और रूट की हो रही जांच
राजधानी भोपाल में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में इलेक्ट्रिक बस सेवा की शुरुआत की तैयारी तेज हो गई है। सोमवार सुबह से शहर में इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल रन शुरू किया गया। बैरागढ़ स्थित ई-बस डिपो से बसों को रवाना किया गया और इन्हें शहर के तीन प्रमुख रूटों पर चलाकर संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जा रहा है।
यह ट्रायल रन अगले पांच दिनों तक जारी रहेगा। इस दौरान परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों की टीमें बसों की तकनीकी क्षमता, रूट की व्यवहारिकता, चार्जिंग व्यवस्था, ट्रैफिक दबाव और संचालन में आने वाली संभावित समस्याओं का आकलन करेंगी। अधिकारियों के मुताबिक, ट्रायल सफल रहने के बाद अगस्त महीने से आम यात्रियों के लिए ई-बस सेवा शुरू करने की तैयारी है।
बैरागढ़ डिपो से शुरू हुआ ई-बसों का परीक्षण
भोपाल में पहुंची इलेक्ट्रिक बसों को सोमवार सुबह बैरागढ़ डिपो से ट्रायल के लिए निकाला गया। ट्रायल के दौरान बसों को उन मार्गों पर चलाया जा रहा है, जहां भविष्य में नियमित सेवा संचालित की जानी है।
इन बसों का संचालन बैरागढ़ से पुराने भोपाल क्षेत्र, बोर्ड ऑफिस, भोपाल रेलवे स्टेशन और कोलार क्षेत्र को जोड़ने वाले रूटों पर किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि शहर के व्यस्त मार्गों पर ई-बसें कितनी आसानी से संचालित हो सकती हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि निर्धारित समय में बसें अपने गंतव्य तक पहुंच पा रही हैं या नहीं।
पांच दिन तक चलेगा ड्राय रन, यात्रियों को अभी अनुमति नहीं
वर्तमान में चल रहा संचालन केवल ट्रायल रन है। इसे ड्राय रन के रूप में किया जा रहा है, इसलिए आम यात्रियों को अभी इन बसों में यात्रा करने की अनुमति नहीं दी गई है।
ट्रायल के दौरान बसों में तकनीकी टीम और संबंधित अधिकारी मौजूद रहेंगे, जो बसों के संचालन से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे।
हालांकि, नगर निगम के पार्षदों और जनप्रतिनिधियों को ट्रायल में शामिल किया जाएगा, ताकि वे बसों की सुविधाओं और व्यवस्था का निरीक्षण कर सकें।
संचालन, बैटरी और चार्जिंग व्यवस्था की हो रही जांच
ई-बस सेवा शुरू करने से पहले कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की जा रही है। इनमें बसों की बैटरी क्षमता, चार्जिंग में लगने वाला समय, रूट पर ऊर्जा खपत, बसों की गति और तकनीकी प्रदर्शन शामिल हैं।
इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में ट्रैफिक की स्थिति के बीच इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कितना प्रभावी रहेगा।
अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर करने के बाद ही नियमित सेवा शुरू की जाएगी।
दो शिफ्ट में चल रही हैं बसें
ट्रायल रन के दौरान ई-बसों को दो शिफ्ट में संचालित किया जा रहा है।
पहली शिफ्ट: सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक
दूसरी शिफ्ट: दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक
इन दोनों शिफ्ट में बसों को अलग-अलग रूट पर चलाकर वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी किया था सफर
ई-बस सेवा शुरू होने से पहले रविवार को जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन इलेक्ट्रिक बसों में सफर किया था।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बसों की सुविधाओं, डिजाइन और संचालन व्यवस्था का जायजा लिया था। इसके बाद सोमवार से आम संचालन से पहले तकनीकी परीक्षण शुरू किया गया।
भोपाल पहुंचीं 21 इलेक्ट्रिक बसें, जल्द आएंगी 20 और
अधिकारियों के मुताबिक, भोपाल शहर के लिए अब तक 21 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं। आने वाले 10 से 12 दिनों में करीब 20 और नई ई-बसों के आने की संभावना है।
नई बसों के शामिल होने के बाद भोपाल में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा और बड़ा हो जाएगा। इससे शहर के अधिक क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
बैरागढ़ डिपो में तैयार किए गए 11 चार्जिंग पॉइंट
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। डिपो में फिलहाल 11 चार्जिंग पॉइंट लगाए जा चुके हैं।
चार्जिंग व्यवस्था की क्षमता का भी ट्रायल रन के दौरान परीक्षण किया जा रहा है, ताकि नियमित संचालन शुरू होने के बाद बसों को चार्ज करने में किसी तरह की परेशानी न आए।
अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि लगातार संचालन के लिए पर्याप्त चार्जिंग सुविधा जरूरी होगी।
पुराने भोपाल, रेलवे स्टेशन और कोलार को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
ई-बस सेवा शुरू होने के बाद शहर के कई प्रमुख इलाकों के बीच यातायात सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित रूट में पुराने भोपाल क्षेत्र, बोर्ड ऑफिस, भोपाल रेलवे स्टेशन और कोलार जैसे महत्वपूर्ण इलाके शामिल हैं। इससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को सार्वजनिक परिवहन का एक नया विकल्प मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर में निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रदूषण कम करने की दिशा में कदम
भोपाल में इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें कम प्रदूषण करती हैं और इनके संचालन से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
शहरों में बढ़ते प्रदूषण और यातायात दबाव को देखते हुए देशभर में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। भोपाल भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अगस्त से यात्रियों के लिए शुरू हो सकती है सेवा
नगर प्रशासन और संबंधित विभागों की योजना है कि ट्रायल रन पूरा होने के बाद अगस्त महीने से ई-बसों को आम यात्रियों के लिए शुरू किया जाए।
सेवा शुरू होने से पहले बसों के रूट, समय सारणी और किराए से जुड़ी जानकारी जारी की जाएगी।
फिलहाल पांच दिवसीय ट्रायल रन के दौरान मिली रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि सभी तकनीकी और संचालन संबंधी मानक पूरे होते हैं तो भोपालवासियों को जल्द ही शहर में आधुनिक इलेक्ट्रिक बस सेवा का लाभ मिल सकता है।
news desk MPcg