MP में छह माह में 8.24 लाख कम हुए बेरोजगार? विधानसभा में सरकार के आंकड़ों से छिड़ी नई बहस, रोजगार पोर्टल पर अब 17.71 लाख पंजीकृत युवा
मध्य प्रदेश में बेरोजगारी को लेकर विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों ने राज्य की रोजगार नीति और युवाओं के भविष्य पर नई चर्चा शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि पिछले छह महीनों में प्रदेश के रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत बेरोजगार युवाओं (आकांक्षी युवाओं) की संख्या में 8 लाख 24 हजार 548 की कमी दर्ज की गई है। सरकार के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक रोजगार पोर्टल पर 25 लाख 95 हजार 680 बेरोजगार युवा पंजीकृत थे, जबकि 30 जून 2026 तक यह संख्या घटकर 17 लाख 71 हजार 132 रह गई।
हालांकि, इस बड़े अंतर के सामने आने के बाद कई सवाल भी उठने लगे हैं। विशेषज्ञों और विपक्ष का कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह कमी वास्तव में रोजगार मिलने के कारण हुई है या फिर रोजगार पोर्टल पर डेटा अपडेट, पंजीकरण समाप्त होने अथवा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते आंकड़ों में बदलाव आया है। विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर में सरकार ने केवल पंजीकृत युवाओं की संख्या बताई है, लेकिन इस कमी के कारणों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
विधानसभा में कांग्रेस विधायक ने उठाया रोजगार का मुद्दा
यह मामला विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सामने आया। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने सरकार से प्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति, रोजगार उपलब्ध कराने की योजनाओं और रोजगार मेलों के परिणामों को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा कि राज्य सरकार हर हाथ को काम देने के लिए कौन-कौन सी योजनाएं चला रही है, निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए क्या रणनीति बनाई गई है और पिछले पांच वर्षों में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा विभागीय सचिव स्तर पर रोजगार सृजन के लिए क्या निर्णय लिए गए।
इसके अलावा विधायक ने यह भी जानना चाहा कि रोजगार पोर्टल पर वर्तमान में कितने बेरोजगार युवा पंजीकृत हैं, रोजगार मेलों पर कितना खर्च किया गया और इन मेलों के माध्यम से कितने युवाओं को स्थायी रोजगार प्राप्त हुआ।
राज्य सरकार ने विधानसभा में क्या जवाब दिया?
कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की ओर से राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने लिखित उत्तर में बताया कि प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जॉब फेयर योजना सहित विभिन्न रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम चला रही है। उन्होंने कहा कि विभाग समय-समय पर आयोजित बैठकों में लिए गए निर्णयों के आधार पर रोजगार से संबंधित योजनाओं पर कार्रवाई करता है।
सरकार के अनुसार 30 जून 2026 तक मध्य प्रदेश रोजगार पोर्टल पर कुल 17 लाख 71 हजार 132 आकांक्षी युवा पंजीकृत हैं। यही वे युवा हैं जिन्होंने रोजगार प्राप्त करने के उद्देश्य से पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है।
छह महीनों में आंकड़ों में बड़ा बदलाव
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में रोजगार पोर्टल पर 25,95,680 बेरोजगार युवा पंजीकृत थे। छह महीने बाद यह संख्या घटकर 17,71,132 रह गई। इसका अर्थ है कि पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं की संख्या में 8,24,548 की कमी आई है।
यदि प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो यह लगभग 31.8 प्रतिशत की गिरावट है। इतने कम समय में इतनी बड़ी कमी ने रोजगार के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज कर दी है।
फरवरी में भी सरकार ने यही आंकड़ा दिया था
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में बजट सत्र के दौरान भी राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने विधानसभा में विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के उत्तर में बताया था कि 31 दिसंबर 2025 तक रोजगार पोर्टल पर 25 लाख 95 हजार 680 युवा पंजीकृत हैं।
अब उसी विभाग द्वारा जून 2026 तक संख्या 17.71 लाख बताने के बाद दोनों आंकड़ों के बीच 8.24 लाख का अंतर सामने आया है। यही अंतर अब सवालों का केंद्र बन गया है।
क्या वास्तव में इतने युवाओं को रोजगार मिला?
सरकार के उत्तर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं की संख्या में कमी का मुख्य कारण क्या है। विधानसभा में केवल पंजीकृत युवाओं की संख्या बताई गई है। यह नहीं बताया गया कि इनमें से कितने युवाओं को वास्तव में नौकरी मिली, कितनों ने स्वरोजगार अपनाया और कितनों के नाम तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से पोर्टल से हटाए गए।
रोजगार विशेषज्ञों का कहना है कि रोजगार पोर्टल पर दर्ज संख्या कम होने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं।
युवाओं को सरकारी या निजी क्षेत्र में रोजगार मिलना।
स्वरोजगार या उद्यमिता की ओर बढ़ना।
रोजगार पोर्टल पर पंजीकरण की अवधि समाप्त होना।
प्रोफाइल का समय पर नवीनीकरण नहीं होना।
डुप्लीकेट या निष्क्रिय खातों को हटाया जाना।
डेटा शुद्धिकरण या तकनीकी सत्यापन।
उच्च शिक्षा या अन्य कारणों से रोजगार पोर्टल का उपयोग बंद करना।
इसीलिए केवल पंजीकृत संख्या में कमी को वास्तविक बेरोजगारी में कमी का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता।
रीवा में सबसे अधिक, पांढुर्णा में सबसे कम बेरोजगार
सरकार के लिखित उत्तर के अनुसार प्रदेश के रीवा जिले में रोजगार पोर्टल पर सबसे अधिक बेरोजगार युवा पंजीकृत हैं। दूसरी ओर पांढुर्णा जिले में सबसे कम पंजीकरण दर्ज किए गए हैं।
हालांकि, सरकार ने विधानसभा में जिला-वार विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। यदि यह जानकारी जारी होती है तो विभिन्न जिलों की रोजगार स्थिति का बेहतर विश्लेषण किया जा सकेगा।
रोजगार मेलों और कौशल विकास पर सरकार का जोर
सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि प्रदेश में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नियमित रूप से जॉब फेयर (रोजगार मेले) आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य सरकार का दावा है कि निजी क्षेत्र की कंपनियों को रोजगार मेलों से जोड़कर युवाओं को नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हालांकि, विधानसभा में दिए गए उत्तर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन रोजगार मेलों के माध्यम से कुल कितने युवाओं को स्थायी रोजगार प्राप्त हुआ।
रोजगार पोर्टल क्या है?
मध्य प्रदेश रोजगार पोर्टल राज्य सरकार का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां नौकरी की तलाश कर रहे युवा अपना पंजीकरण कराते हैं। इस पोर्टल के माध्यम से सरकारी और निजी क्षेत्र की रिक्तियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है तथा रोजगार मेलों और भर्ती अभियानों की सूचना भी साझा की जाती है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इस पोर्टल पर दर्ज संख्या केवल पंजीकृत रोजगार-इच्छुक युवाओं की होती है। यह पूरे राज्य की वास्तविक बेरोजगारी का आधिकारिक सर्वेक्षण नहीं माना जाता।
विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता के सवाल
विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के बाद विपक्ष ने सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि वास्तव में छह महीनों में 8 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है, तो सरकार को इसका विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए।
विपक्ष यह जानना चाहता है कि—
कितने युवाओं को सरकारी नौकरी मिली।
कितनों को निजी क्षेत्र में रोजगार मिला।
कितनों ने स्वरोजगार अपनाया।
कितने पंजीकरण तकनीकी कारणों से हटाए गए।
रोजगार पोर्टल पर डेटा अपडेट की प्रक्रिया क्या रही।
विपक्ष का तर्क है कि केवल पंजीकृत संख्या में कमी को रोजगार बढ़ने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञों की राय
श्रम एवं रोजगार क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी राज्य में बेरोजगारी की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल रोजगार पोर्टल के आंकड़ों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए श्रम बल भागीदारी दर, रोजगार दर, बेरोजगारी दर, उद्योगों में नई भर्तियां, निजी निवेश और स्वरोजगार के आंकड़ों को भी साथ में देखना आवश्यक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि सरकार रोजगार पोर्टल पर दर्ज युवाओं की संख्या में कमी को रोजगार सृजन की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इस कमी का कितना हिस्सा वास्तविक रोजगार मिलने का परिणाम है और कितना हिस्सा प्रशासनिक प्रक्रियाओं का।
आगे क्या?
मध्य प्रदेश विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद रोजगार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। संभावना है कि विपक्ष सरकार से विस्तृत जिला-वार डेटा, रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं की संख्या, रोजगार मेलों के परिणाम और रोजगार पोर्टल के डेटा प्रबंधन की पूरी जानकारी मांगेगा।
यदि सरकार यह स्पष्ट करती है कि छह महीनों में बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिला है, तो यह राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। वहीं यदि आंकड़ों में कमी मुख्य रूप से डेटा अपडेट या पंजीकरण संबंधी कारणों से हुई है, तो वास्तविक रोजगार स्थिति को समझने के लिए अतिरिक्त आधिकारिक जानकारी आवश्यक होगी।
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