केन-बेतवा लिंक परियोजना: 17वें दिन खत्म हुआ 'चिता आंदोलन', प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाया; अस्पताल से भी अनशन पर अड़े अमित भटनागर
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों का 17 दिनों से जारी 'चिता आंदोलन' रविवार तड़के प्रशासनिक कार्रवाई के बाद समाप्त हो गया। हालांकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका आमरण अनशन अभी खत्म नहीं हुआ है और वे अस्पताल से भी इसे जारी रखेंगे। प्रशासन ने लगातार हो रही बारिश, नदी के बढ़ते जलस्तर और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए तड़के भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई की, जबकि आंदोलनकारियों ने इसे आंदोलन दबाने की कोशिश और कथित भ्रष्टाचार के खुलासे को रोकने की कार्रवाई बताया है।
यह घटनाक्रम केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ले आया है। एक ओर प्रशासन सुरक्षा और जनहित का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारी पुनर्वास, मुआवजे और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
सुबह पांच बजे पुलिस पहुंची, नदी में उतर गए प्रदर्शनकारी
रविवार सुबह करीब पांच बजे प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम कुपी गांव स्थित बराना नदी के घाट पर पहुंची, जहां पिछले 17 दिनों से प्रभावित परिवार 'चिता आंदोलन' चला रहे थे। पुलिस की मौजूदगी देखते ही बड़ी संख्या में महिला और पुरुष प्रदर्शनकारी नदी के बहते पानी में उतर गए और वहीं विरोध प्रदर्शन करने लगे।
पुलिस अधिकारियों ने पहले आंदोलनकारियों को समझाने और सुरक्षित स्थान पर आने की अपील की। काफी देर तक समझाइश का दौर चलता रहा, लेकिन जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो पुलिस और प्रशासन की टीमें स्वयं नदी में उतरीं और एक-एक कर सभी को बाहर निकालकर हिरासत में ले लिया।
घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। कार्रवाई के दौरान किसी बड़ी हिंसक झड़प की सूचना नहीं मिली, हालांकि आंदोलनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया।
प्रशासन ने क्यों उठाया यह कदम?
बिजावर के एसडीएम विजय द्विवेदी ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के कारण बराना नदी का जलस्तर बढ़ रहा था, जिससे आंदोलनकारियों की जान को खतरा पैदा हो गया था। इसके अलावा कई प्रदर्शनकारियों की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी।
प्रशासन के अनुसार, लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें वहां से हटाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि प्रदर्शन में शामिल पड़ोसी पन्ना जिले के लोगों को बसों के माध्यम से उनके गृह जिले भेज दिया गया है ताकि किसी अप्रिय घटना की संभावना न रहे।
अस्पताल में भर्ती अमित भटनागर, लेकिन अनशन जारी
कार्रवाई के बाद जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर को चिकित्सकीय निगरानी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वे पिछले 14 दिनों से आमरण अनशन पर थे और लगातार भोजन ग्रहण नहीं कर रहे थे।
अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने घोषणा की कि वे न तो ड्रिप लेंगे और न ही अन्न ग्रहण करेंगे। उनका कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे अस्पताल या जेल, किसी भी स्थान से अपना आमरण अनशन जारी रखेंगे।
भटनागर का कहना है कि यह आंदोलन केवल कुछ लोगों का नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की आवाज है जो परियोजना से प्रभावित होने वाले हैं।
'400 करोड़ के भ्रष्टाचार' के आरोपों ने बढ़ाई सियासी गर्मी
आंदोलन से जुड़ी कार्यकर्ता दिव्या अहिरवार ने प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रविवार को अमित भटनागर केन-बेतवा लिंक परियोजना और उससे जुड़ी अन्य योजनाओं में करीब 400 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने वाले थे।
दिव्या का दावा है कि इसी संभावित खुलासे से पहले तड़के पुलिस कार्रवाई कर आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया। उनके अनुसार यह कदम आंदोलन को कमजोर करने और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े तथ्यों को सामने आने से रोकने के उद्देश्य से उठाया गया।
हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्या है 'चिता आंदोलन'?
केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों ने अपने विरोध को प्रतीकात्मक रूप देने के लिए 'चिता आंदोलन' शुरू किया था। आंदोलनकारियों का कहना था कि यदि उनकी जमीन, घर और आजीविका छिनती है तो उनके लिए यह जीवन समाप्त होने जैसा होगा। इसी संदेश को देने के लिए उन्होंने नदी किनारे चिताएं सजाकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
यह आंदोलन पिछले कई दिनों से लगातार जारी था और धीरे-धीरे इसमें आसपास के जिलों के लोग भी शामिल होने लगे थे।
केन-बेतवा लिंक परियोजना क्यों है महत्वपूर्ण?
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और कृषि विकास को बढ़ावा देना है।
सरकार का दावा है कि इस परियोजना से लाखों लोगों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा मिलेगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
दूसरी ओर परियोजना से प्रभावित परिवारों का कहना है कि पर्याप्त पुनर्वास, उचित मुआवजा और वैकल्पिक आजीविका की व्यवस्था किए बिना उन्हें विस्थापित किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि परियोजना से प्रभावित प्रत्येक परिवार का पारदर्शी सर्वे कराया जाए, उचित मुआवजा दिया जाए और पुनर्वास की स्पष्ट योजना लागू की जाए। उनका कहना है कि विस्थापन से पहले सरकार को सभी प्रभावित लोगों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
इसके साथ ही आंदोलनकारी परियोजना से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की भी मांग कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल नदी किनारे चल रहा 'चिता आंदोलन' प्रशासनिक कार्रवाई के बाद समाप्त हो गया है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमित भटनागर के अस्पताल से भी अनशन जारी रखने के ऐलान ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।
अब निगाहें प्रशासन और आंदोलनकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता नहीं निकलता है, तो केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विरोध प्रदर्शन एक बार फिर तेज हो सकते हैं। वहीं, कथित भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों पर भी आगे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
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