संन्यास के बाद भी नहीं थमा बेन स्टोक्स का जलवा, क्रैंप्स से जूझते हुए ठोका नाबाद शतक; डरहम को दिलाई शानदार जीत

संन्यास के बाद भी नहीं थमा बेन स्टोक्स का जलवा, क्रैंप्स से जूझते हुए ठोका नाबाद शतक; डरहम को दिलाई शानदार जीत

इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट कप्तान और विश्व क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में शामिल बेन स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद घरेलू क्रिकेट में धमाकेदार वापसी कर यह साबित कर दिया कि उनकी बल्लेबाजी की धार अभी भी बरकरार है। इंग्लैंड के मेट्रो बैंक वन-डे कप (List A Tournament) के मुकाबले में डरहम की ओर से खेलते हुए स्टोक्स ने डर्बीशायर के खिलाफ नाबाद 108 रन की शानदार पारी खेली और अपनी टीम को यादगार जीत दिलाई।

यह पारी सिर्फ शतक की वजह से खास नहीं रही, बल्कि इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि बल्लेबाजी के दौरान स्टोक्स कई बार गंभीर क्रैंप्स (ऐंठन) से परेशान हुए। दर्द के कारण वह मैदान पर गिर भी पड़े, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने रिटायर्ड हर्ट होने से इनकार किया और अंत तक बल्लेबाजी करते हुए टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया।

करीब 12 साल बाद डरहम के लिए खेला लिस्ट-ए मुकाबला

यह मुकाबला बेन स्टोक्स के करियर में कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद यह उनका पहला प्रतिस्पर्धी मैच था। साथ ही उन्होंने लगभग 12 वर्षों बाद डरहम के लिए लिस्ट-ए क्रिकेट खेला।

स्टोक्स लंबे समय से इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट, फ्रेंचाइज़ी लीग और सीमित ओवरों के मुकाबलों में व्यस्त रहे थे। अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग होने के बाद उन्होंने अपने घरेलू क्लब के लिए मैदान पर उतरकर शानदार शुरुआत की।

डर्बीशायर ने दिया था 257 रन का लक्ष्य

मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए डर्बीशायर ने निर्धारित ओवरों में 256 रन बनाए। टीम की ओर से मार्टिन एंडरसन ने शानदार शतक लगाया और मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने भी उपयोगी योगदान दिया, जिसकी बदौलत टीम चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंची।

256 रन का लक्ष्य आसान नहीं माना जा रहा था, खासकर तब जब डरहम की शुरुआत अच्छी नहीं रही।

मुश्किल वक्त में स्टोक्स ने संभाली जिम्मेदारी

लक्ष्य का पीछा करने उतरी डरहम की टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए। ऐसे समय में अनुभवी बेन स्टोक्स क्रीज पर आए और उन्होंने शुरुआत में धैर्य के साथ बल्लेबाजी की।

स्टोक्स ने पहले विल रोड्स (45 रन) के साथ अहम साझेदारी कर पारी को संभाला। इसके बाद कॉलिन एकरमैन और ओली रॉबिन्सन ने भी उनका अच्छा साथ दिया।

हालांकि पूरी पारी का केंद्र बिंदु स्टोक्स ही रहे। उन्होंने परिस्थिति के अनुसार अपने खेल में बदलाव किया और जैसे-जैसे लक्ष्य करीब आता गया, उन्होंने रन गति भी बढ़ा दी।

दर्द में भी नहीं छोड़ा मैदान

स्टोक्स की इस पारी की सबसे बड़ी खासियत उनकी जुझारू मानसिकता रही।

अर्धशतक पूरा करने के कुछ ही देर बाद उन्हें पैरों में तेज क्रैंप्स की शिकायत हुई। दर्द इतना अधिक था कि वह मैदान पर गिर पड़े और मेडिकल स्टाफ को मैदान पर आना पड़ा।

कुछ समय तक उपचार चलने के बाद उन्होंने मैदान छोड़ने के बजाय बल्लेबाजी जारी रखने का फैसला किया।

दर्द और थकान के बावजूद उन्होंने अपना शतक पूरा किया और अंत तक नाबाद रहते हुए टीम को जीत दिलाई।

यही कारण है कि उनकी यह पारी केवल रन बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति का भी उदाहरण बन गई।

गेंदबाजी में नहीं मिला विकेट

स्टोक्स ने गेंदबाजी में भी योगदान दिया, लेकिन इस बार वह अपनी गेंदों से प्रभाव नहीं छोड़ सके।

उन्होंने 9 ओवर में 56 रन खर्च किए और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। हालांकि बल्लेबाजी में उनके योगदान ने गेंदबाजी की कमी को पूरी तरह ढक दिया।

हाल ही में लिया था अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास

बेन स्टोक्स ने हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी।

पिछले कुछ वर्षों में वह लगातार चोटों और फिटनेस समस्याओं से जूझ रहे थे। घुटने, हैमस्ट्रिंग और अन्य शारीरिक परेशानियों के कारण उनके लिए तीनों प्रारूपों में लगातार खेलना मुश्किल हो रहा था।

इसी वजह से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने करियर को विराम देने का फैसला किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि वह घरेलू क्रिकेट और अन्य प्रतियोगिताओं में खेलना जारी रखेंगे।

द हंड्रेड से दूरी, डरहम को दी प्राथमिकता

स्टोक्स ने इस बार The Hundred की नीलामी में हिस्सा नहीं लिया।

उन्होंने पहले ही संकेत दे दिए थे कि उनका पूरा ध्यान डरहम के लिए वन-डे कप खेलने पर रहेगा।

घरेलू क्रिकेट में वापसी के पहले ही मैच में शतक लगाकर उन्होंने अपने इस फैसले को सही साबित कर दिया।

क्यों खास रही यह पारी?

इस शतकीय पारी के कई बड़े मायने हैं—

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद पहला मैच।
करीब 12 साल बाद डरहम के लिए लिस्ट-ए क्रिकेट खेला।
कठिन लक्ष्य का पीछा करते हुए मैच जिताऊ नाबाद शतक।
गंभीर क्रैंप्स के बावजूद मैदान नहीं छोड़ा।
टीम को दबाव की स्थिति से निकालकर जीत दिलाई।
एक बार फिर साबित किया कि बड़े मैचों में जिम्मेदारी निभाना उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
बेन स्टोक्स का शानदार करियर

बेन स्टोक्स आधुनिक क्रिकेट के सबसे सफल ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं।

उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं और इंग्लैंड को अनेक महत्वपूर्ण मुकाबले जिताए। 2019 विश्व कप फाइनल में उनकी मैच जिताऊ पारी और एशेज 2019 के हेडिंग्ले टेस्ट की 135 रन की ऐतिहासिक पारी आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे महान पारियों में शामिल मानी जाती है।

इसी वजह से घरेलू क्रिकेट में उनकी वापसी पर दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों की नजर थी।

आगे क्या?

इस शतक के बाद अब माना जा रहा है कि बेन स्टोक्स आने वाले घरेलू मुकाबलों में डरहम के लिए नियमित रूप से खेल सकते हैं। यदि उनकी फिटनेस बेहतर रहती है तो भविष्य में विभिन्न फ्रेंचाइज़ी लीगों में भी उनकी वापसी देखने को मिल सकती है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी स्टोक्स के अनुभव, तकनीक और नेतृत्व क्षमता का लाभ घरेलू क्रिकेट में उनकी टीम को लगातार मिलता रहेगा। उनकी यह पारी इस बात का संकेत है कि भले ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन मैदान पर उनका प्रभाव और मैच जिताने की क्षमता आज भी पहले जैसी ही मजबूत है।