इंदौर के गौरव का दिल अहमदाबाद में धड़केगा, अंगदान से 5 मरीजों को मिली नई जिंदगी
25 वर्षीय गौरव दवे को ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार ने किया अंगदान, इंदौर में बना 68वां ग्रीन कॉरिडोर
इंदौर के एक परिवार ने अपने सबसे बड़े दुख को मानवता की मिसाल में बदल दिया है। खजूरी बाजार निवासी 25 वर्षीय गौरव दवे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंग कई लोगों की जिंदगी बचाने का काम करेंगे। ब्रेन हेमरेज के बाद ब्रेन डेड घोषित किए गए गौरव के परिवार ने साहसिक फैसला लेते हुए उनके महत्वपूर्ण अंगों का दान कर दिया।
गौरव दवे का हार्ट अहमदाबाद के एक 28 वर्षीय युवक में प्रत्यारोपित किया जाएगा, जबकि उनका लिवर और दोनों किडनियां इंदौर के मरीजों को नई जिंदगी देंगी। इसके अलावा उनकी आंखें भी दान की गई हैं।
इस अंगदान प्रक्रिया के लिए सोमवार को इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिसके जरिए हार्ट को तय समय में अहमदाबाद पहुंचाया गया।
13 जुलाई को हुआ था ब्रेन हेमरेज
गौरव दवे, इंदौर के खजूरी बाजार निवासी सतीश दवे और कविता दवे के 25 वर्षीय बेटे थे। 13 जुलाई को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ।
परिजन उन्हें तत्काल राजश्री अपोलो हॉस्पिटल, इंदौर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने उनका इलाज शुरू किया।
डॉक्टरों ने गौरव की हालत सुधारने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। इसके बाद निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दो बार परीक्षण किया।
जांच के बाद रविवार रात गौरव को ब्रेन डेड घोषित किया गया।
ब्रेन डेथ के बाद परिवार ने लिया बड़ा फैसला
ब्रेन डेथ का मतलब होता है कि व्यक्ति के मस्तिष्क की सभी गतिविधियां स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं, हालांकि मशीनों की सहायता से शरीर के कुछ अंग काम कर सकते हैं।
डॉक्टरों ने गौरव के परिवार को ब्रेन डेथ और अंगदान की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
इस कठिन समय में गौरव की बहन वैदेही राठी, बहनोई पल्केश राठी और भाई रितिक चावरे ने परिवार को संभाला और अंगदान के लिए बातचीत की।
इसके बाद गौरव के माता-पिता सतीश दवे और कविता दवे ने बेटे के अंगों को जरूरतमंद मरीजों को दान करने की सहमति दी।
परिवार के इस फैसले से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिली।
गौरव का हार्ट अहमदाबाद भेजा गया
अंगदान की प्रक्रिया के तहत गौरव का हार्ट अहमदाबाद के यूएन मेहता हॉस्पिटल भेजा गया।
हार्ट को सुरक्षित और कम समय में पहुंचाने के लिए इंदौर से अहमदाबाद तक विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
यह हार्ट अहमदाबाद में भर्ती 28 वर्षीय युवक को प्रत्यारोपित किया जाएगा।
ग्रीन कॉरिडोर के दौरान पुलिस और प्रशासन ने विशेष यातायात व्यवस्था की, ताकि एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के अस्पताल तक पहुंच सके।
लिवर और किडनी इंदौर के मरीजों को मिली
गौरव का लिवर इंदौर के राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती एक 42 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया।
वहीं, उनकी दोनों किडनियां चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती दो महिला मरीजों को दी गईं। इनमें एक मरीज की उम्र 22 वर्ष और दूसरी मरीज की उम्र 52 वर्ष बताई गई है।
इसके अलावा गौरव की आंखें शंकरा आई बैंक के माध्यम से दान की गईं, जिससे जरूरतमंद लोगों को दृष्टि मिल सकेगी।
इंदौर में बना 68वां ग्रीन कॉरिडोर
अंगदान की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य अंगों को कम से कम समय में अस्पताल से दूसरे स्थान तक पहुंचाना होता है, क्योंकि हार्ट और अन्य अंगों को प्रत्यारोपण के लिए निर्धारित समय सीमा के अंदर पहुंचाना बेहद जरूरी होता है।
इंदौर में पहले भी कई बार अंगदान के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा चुके हैं। शहर ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट और अंगदान के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है।
फिल्म इंडस्ट्री में बनाना चाहते थे पहचान
गौरव दवे फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे। वह कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे थे और उनका सपना एक बड़े अभिनेता बनने का था।
उनके साथ काम करने वाली ड्रीम वर्ल्ड मूवीज एंड प्रोडक्शन की एचओडी महक राज ने बताया कि गौरव मेहनती, ईमानदार और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे।
उन्होंने कहा कि गौरव का सपना फिल्मों में बड़ा नाम बनाना था, लेकिन अपने जाने के बाद वह कई लोगों को जीवन देकर असली मायनों में हीरो बन गए।
परिवार के फैसले की हो रही सराहना
अंगदान में सहयोग करने वाली मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के सदस्यों जीतू बगानी, संदीपन आर्य और लकी खत्री ने दवे परिवार की मदद की।
ट्रस्ट के संदीपन आर्य ने कहा कि परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर समाज के लिए प्रेरणादायक निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने परिवार को अंगदान की पूरी प्रक्रिया समझाई, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई।
गौरव को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
अंगदान के बाद गौरव दवे को सम्मान दिया गया। ऑर्गन डोनर के रूप में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
परिजनों को अंगदान के लिए प्रमाण पत्र भी सौंपा गया।
गौरव के पिता सतीश दवे के लिए यह भावुक पल था। एक तरफ बेटे को खोने का दर्द था, वहीं दूसरी तरफ यह संतोष भी था कि उनका बेटा जाते-जाते कई लोगों की जिंदगी बचाने का कारण बना।
अंगदान ने पेश की मानवता की मिसाल
गौरव दवे की कहानी समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उनके परिवार ने दिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी मानवता और दूसरों की जिंदगी बचाने का फैसला लिया जा सकता है।
एक युवा कलाकार जिसने फिल्मों में बड़ा नाम बनाने का सपना देखा था, वह अब अपने अंगों के जरिए कई परिवारों में उम्मीद और खुशियां लौटाएगा।
गौरव दवे भले ही दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनका दिल, उनकी आंखें और उनके अंग कई लोगों के जीवन में हमेशा जीवित रहेंगे।
news desk MPcg