दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को झूठे बयान मामले में 18 महीने की सजा, 3 साल तक निलंबित रहेगी जेल
मार्शल लॉ विवाद के बाद बढ़ी पूर्व राष्ट्रपति की मुश्किलें, चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप; पार्टी पर भी पड़ सकता है करोड़ों डॉलर का आर्थिक बोझ
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल (Yoon Suk Yeol) की राजनीतिक और कानूनी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। देश के पूर्व राष्ट्रपति को 2022 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान झूठे बयान देने के मामले में दोषी ठहराते हुए अदालत ने 18 महीने की जेल की सजा सुनाई है। हालांकि, अदालत ने इस सजा को तीन साल के लिए निलंबित कर दिया है।
इस फैसले के बाद यून सुक योल को तत्काल जेल नहीं जाना होगा, लेकिन यदि अगले तीन वर्षों के दौरान वह किसी अन्य अपराध में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें यह सजा भुगतनी पड़ सकती है।
सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए गलत बयानों ने मतदाताओं के अधिकार और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। अदालत ने माना कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उम्मीदवारों द्वारा जनता के सामने रखी गई जानकारी की सत्यता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
चुनाव अभियान के दौरान दिए गए बयान बने विवाद की वजह
यह मामला दक्षिण कोरिया के 2022 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ा हुआ है। उस समय यून सुक योल कंजरवेटिव पीपुल पावर पार्टी (PPP) के उम्मीदवार थे। चुनाव में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार ली जे-म्यूंग (Lee Jae-myung) को बेहद मामूली अंतर से हराकर राष्ट्रपति पद हासिल किया था।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान यून ने एक जमीन विकास परियोजना से जुड़े मामले में ऐसे बयान दिए थे जो वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते थे।
अभियोजन के अनुसार, इन बयानों का इस्तेमाल मतदाताओं की धारणा को प्रभावित करने के लिए किया गया। सरकारी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि राष्ट्रपति पद जैसे संवैधानिक पद के उम्मीदवार द्वारा गलत जानकारी देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है।
हालांकि, यून सुक योल ने शुरुआत से ही इन आरोपों को खारिज किया है। उनके वकीलों ने अदालत के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि वह इस निर्णय को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।
मार्शल लॉ लगाने के फैसले के बाद पहले ही विवादों में घिरे थे यून
यून सुक योल का नाम पहले से ही दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े राजनीतिक विवादों में शामिल है। दिसंबर 2024 में उनके द्वारा देश में अचानक मार्शल लॉ लागू करने की घोषणा ने पूरे देश को राजनीतिक संकट में डाल दिया था।
राष्ट्रपति के इस कदम का विपक्षी दलों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने विरोध किया। आलोचकों ने आरोप लगाया कि मार्शल लॉ लागू करने का फैसला लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला था।
हालांकि मार्शल लॉ की घोषणा कुछ ही समय में वापस ले ली गई, लेकिन इसके बाद संसद में उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई। लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद यून को राष्ट्रपति पद से हटना पड़ा।
यह घटना दक्षिण कोरिया के लोकतांत्रिक इतिहास में एक असाधारण घटना मानी गई, क्योंकि देश ने सैन्य शासन के लंबे इतिहास के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया था।
राष्ट्रपति पद से हटने के बाद बढ़ीं कानूनी चुनौतियां
राष्ट्रपति पद गंवाने के बाद यून सुक योल कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। चुनावी बयान मामले के अलावा मार्शल लॉ विवाद से जुड़े मामलों में भी जांच चल रही है।
उन पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रपति पद की शक्तियों का इस्तेमाल कर संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की।
यून समर्थकों का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और पूर्व राष्ट्रपति को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
फैसले का असर पीपुल पावर पार्टी पर भी पड़ेगा
अदालत का फैसला केवल यून सुक योल के लिए ही नहीं बल्कि उनकी पार्टी के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है।
दक्षिण कोरिया के चुनाव कानून के अनुसार, जिन राष्ट्रपति उम्मीदवारों को चुनाव में 15 प्रतिशत से अधिक वोट मिलते हैं, उनके चुनाव प्रचार खर्च की भरपाई सरकार द्वारा की जाती है।
यून सुक योल ने 2022 के चुनाव में पर्याप्त वोट हासिल किए थे, इसलिए उनकी पार्टी को चुनाव खर्च की वापसी मिली थी।
लेकिन अगर अदालत का फैसला ऊपरी अदालत में भी कायम रहता है, तो पीपुल पावर पार्टी को लगभग 2.7 करोड़ डॉलर (लगभग 230 करोड़ रुपये से अधिक) की राशि वापस करनी पड़ सकती है।
यह आर्थिक नुकसान पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वह पहले ही राजनीतिक संकट और जनता के विरोध का सामना कर रही है।
दक्षिण कोरिया की राजनीति पर पड़ेगा असर
यून सुक योल के खिलाफ आया यह फैसला दक्षिण कोरिया की राजनीति में दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद बेहद शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन वहां के कानून पूर्व राष्ट्रपतियों को भी जवाबदेही के दायरे में रखते हैं।
देश में इससे पहले भी कई पूर्व राष्ट्रपतियों को भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। यून सुक योल का मामला भी इसी राजनीतिक परंपरा का हिस्सा बन गया है, जहां सत्ता में रहने वाले नेताओं को पद छोड़ने के बाद अदालतों का सामना करना पड़ा है।
यून सुक योल के सामने अब आगे की राह
फिलहाल यून सुक योल के पास इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। उनके वकीलों ने संकेत दिया है कि वे ऊपरी अदालत में जाएंगे।
अगर ऊपरी अदालत भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखती है तो यह यून के राजनीतिक भविष्य को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।
वहीं, अगर अपील में उन्हें राहत मिलती है तो उनके समर्थकों के लिए यह बड़ी राजनीतिक वापसी के रूप में देखा जा सकता है।
फिलहाल दक्षिण कोरिया की जनता और राजनीतिक दल इस मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। यून सुक योल का मामला आने वाले समय में देश की राजनीति, चुनावी कानून और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर बड़ी बहस का केंद्र बना रहेगा।
news desk MPcg