AI डेटा सेंटर बनाम किसानों की पानी की लड़ाई: कैलिफोर्निया में 330 मेगावाट प्रोजेक्ट को लेकर विवाद, कोलोराडो नदी के पानी पर बढ़ा संघर्ष

AI डेटा सेंटर बनाम किसानों की पानी की लड़ाई: कैलिफोर्निया में 330 मेगावाट प्रोजेक्ट को लेकर विवाद, कोलोराडो नदी के पानी पर बढ़ा संघर्ष

टेक्नोलॉजी की बढ़ती जरूरत और सूखे से जूझ रहे इलाके में टकराव, किसानों ने जताई चिंता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज बढ़ती मांग के बीच दुनिया भर में बड़े-बड़े डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। हालांकि, इन हाई-टेक परियोजनाओं के साथ अब बिजली और पानी की खपत को लेकर नई चुनौतियां सामने आने लगी हैं।

अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया में एक विशाल 330 मेगावाट AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर टेक कंपनी और स्थानीय किसानों के बीच विवाद बढ़ गया है। विवाद का मुख्य कारण है कोलोराडो नदी के पानी का इस्तेमाल, जिसे लेकर किसानों और स्थानीय समुदायों को चिंता है कि इससे पहले से सूखे की मार झेल रहे क्षेत्र में पानी का संकट और गहरा सकता है।

इंपीरियल वैली में बन रहा बड़ा AI डेटा सेंटर

दक्षिणी कैलिफोर्निया की इंपीरियल वैली में प्रस्तावित यह डेटा सेंटर राज्य के सबसे बड़े AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में से एक बताया जा रहा है।

डेटा सेंटर में हजारों सर्वर लगाए जाते हैं, जिन्हें लगातार ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा और पानी की आवश्यकता होती है। AI मॉडल की बढ़ती कंप्यूटिंग जरूरतों के कारण दुनिया भर में ऐसे डेटा सेंटर तेजी से विकसित किए जा रहे हैं।

लेकिन इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या तकनीकी विकास के लिए कृषि क्षेत्र के पानी का इस्तेमाल उचित होगा।

कंपनी ने 287 मिलियन गैलन पानी की मांग को लेकर लिया कोर्ट का सहारा

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने पहले दावा किया था कि वह कोलोराडो नदी के पानी पर निर्भर नहीं होगी। लेकिन बाद में कंपनी ने करीब 287 मिलियन गैलन पानी के अधिकार को लेकर कानूनी रास्ता अपनाया।

कंपनी का कहना है कि वह अतिरिक्त पानी की मांग नहीं कर रही है, बल्कि पानी के मौजूदा अधिकारों को खरीदने की योजना बना रही है।

कंपनी के मालिक सेबेस्टियन रूची का कहना है कि डेटा सेंटर के लिए नदी से अतिरिक्त पानी नहीं लिया जाएगा। इसके लिए आसपास के खेतों से जमीन और पानी के अधिकार खरीदे जाएंगे और उस पानी का उपयोग डेटा सेंटर में किया जाएगा।

किसानों को डर: खेती प्रभावित होगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

इंपीरियल वैली लंबे समय से कृषि क्षेत्र के रूप में जानी जाती है। यहां खेती के लिए कोलोराडो नदी का पानी बेहद महत्वपूर्ण है।

स्थानीय किसानों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बड़ी मात्रा में पानी कृषि से हटाकर डेटा सेंटर को दिया गया तो इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा।

कृषि क्षेत्र से जुड़े कई अन्य व्यवसाय भी प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

ट्रैक्टर और कृषि उपकरण व्यवसाय
खाद और बीज विक्रेता
परिवहन सेवाएं
छोटे दुकानदार
स्थानीय रोजगार

किसानों का कहना है कि पानी की उपलब्धता पहले ही सीमित है और ऐसे में बड़े औद्योगिक प्रोजेक्टों को प्राथमिकता देना चिंता का विषय है।

कोलोराडो नदी 4 करोड़ लोगों के लिए जीवनरेखा

कोलोराडो नदी अमेरिका के पश्चिमी हिस्से की सबसे महत्वपूर्ण जल स्रोतों में से एक है।

यह नदी करीब 4 करोड़ लोगों को पानी उपलब्ध कराती है और कई राज्यों की जल जरूरतों को पूरा करती है।

इंपीरियल वैली में यह नदी मीठे पानी का प्रमुख स्रोत है। क्षेत्र पहले से ही सूखे और जल संकट की समस्या से जूझ रहा है।

कैलिफोर्निया में कृषि क्षेत्र पानी का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है। राज्य के कुल पानी उपयोग में खेती का हिस्सा काफी अधिक है, जिससे पानी के वितरण को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है।

स्थानीय निकायों ने रीसाइकिल पानी देने से किया इनकार

डेटा सेंटर के लिए वैकल्पिक जल स्रोत तलाशने की कोशिशों के बीच स्थानीय शहरों ने रीसाइकिल पानी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है।

एल सेंट्रो और इंपीरियल शहरों ने कंपनी को पुनर्चक्रित पानी देने से मना कर दिया। वहीं, पानी आपूर्ति करने वाली संस्था IID (Imperial Irrigation District) ने भी इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

स्थानीय नेताओं का आरोप है कि कंपनी जल प्रबंधन व्यवस्था को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है।

एक बैठक के दौरान इस मुद्दे पर लोगों में इतना विरोध बढ़ गया कि बैठक को रोकना पड़ा।

कंपनी का दावा: हजारों रोजगार और अरबों डॉलर का आर्थिक फायदा

डेटा सेंटर परियोजना का समर्थन करने वालों का कहना है कि इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

कंपनी के अनुसार:

करीब 1,688 अस्थायी रोजगार पैदा होंगे
100 से ज्यादा स्थायी नौकरियां मिलेंगी
अगले 30 वर्षों में करीब 2.95 बिलियन डॉलर का आर्थिक लाभ हो सकता है

इंपीरियल काउंटी में बेरोजगारी दर काफी अधिक है, इसलिए कंपनी का तर्क है कि यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर ला सकती है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: सवाल सिर्फ पानी का नहीं, प्राथमिकता का है

जल विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करने का सवाल है कि सीमित संसाधनों का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाए।

जल विशेषज्ञ रेट लार्सन के अनुसार, क्षेत्र में अच्छे प्रोजेक्टों के लिए पानी उपलब्ध है, लेकिन हर परियोजना को पानी देना संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय समुदायों के हितों को भी ध्यान में रखना होगा।

AI इंडस्ट्री के सामने बढ़ती पानी की चुनौती

दुनिया भर में AI कंपनियां बड़े डेटा सेंटर स्थापित कर रही हैं। ये केंद्र क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और AI मॉडल ट्रेनिंग के लिए जरूरी हैं।

लेकिन डेटा सेंटरों की बढ़ती संख्या के साथ दो बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं:

1. बिजली की भारी खपत

AI सर्वरों को चलाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है।

2. पानी की जरूरत

कई डेटा सेंटर कूलिंग सिस्टम के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं।

यही वजह है कि अब कई देशों और क्षेत्रों में डेटा सेंटरों की अनुमति देते समय पानी और पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा बढ़ रही है।

आगे की राह: विकास और संसाधनों के बीच संतुलन की चुनौती

कैलिफोर्निया का यह विवाद आने वाले समय की बड़ी बहस का संकेत माना जा रहा है। एक तरफ AI जैसी नई तकनीकों के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की सीमाएं भी हैं।

अब नजर इस बात पर है कि अदालत और स्थानीय प्रशासन इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और क्या ऐसा समाधान निकलता है जिसमें तकनीकी विकास, रोजगार और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।