UP में प्राथमिक स्कूल बंद नहीं होंगे, कम नामांकन वाले विद्यालयों का होगा विलय: सरकार

UP में प्राथमिक स्कूल बंद नहीं होंगे, कम नामांकन वाले विद्यालयों का होगा विलय: सरकार

उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को बंद किए जाने के मुद्दे पर राज्य सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा लोकसभा के मानसून सत्र में प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद होने का आरोप लगाए जाने के बाद योगी सरकार ने इन दावों को खारिज किया है।

प्रदेश सरकार ने कहा है कि प्राथमिक विद्यालयों को बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का नजदीकी विद्यालयों में विलय किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा- स्कूल बंद नहीं, शिक्षा व्यवस्था का पुनर्गठन

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी सरकारी प्राथमिक विद्यालय को खत्म करना नहीं है।

उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों में छात्र संख्या बहुत कम है, वहां उपलब्ध संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर उपयोग करने के लिए उन्हें आसपास के विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन भवनों में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं होंगी, वहां पहली बार प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।

सरकार का कहना है कि इससे छोटे बच्चों को शुरुआती स्तर पर बेहतर शिक्षा का माहौल मिलेगा और खाली पड़े स्कूल भवनों का उपयोग भी हो सकेगा।

अखिलेश यादव ने उठाया था स्कूल बंद होने का मुद्दा

लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे।

उन्होंने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं और बड़ी संख्या में स्कूल प्रभावित हुए हैं।

सपा प्रमुख के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि स्कूल बंद करने की कोई नीति नहीं है। सरकार ने कहा कि विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया को बंदी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने की पहल है।

सरकार ने गिनाईं शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियां

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने दावा किया कि राज्य में शिक्षा बजट में पिछले वर्षों में काफी वृद्धि हुई है।

सरकार के अनुसार:

पूर्ववर्ती सरकार के समय शिक्षा बजट लगभग 28 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
सरकारी विद्यालयों में छात्र नामांकन लगभग 1.34 करोड़ से बढ़कर 1.90 करोड़ तक पहुंचा है।
ड्रॉपआउट दर में कमी आई है और यह लगभग 19 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह गई है।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं में सुधार किया गया है।
ऑपरेशन कायाकल्प से बदली स्कूलों की स्थिति: सरकार

राज्य सरकार ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम किया गया है।

सरकार के मुताबिक, विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं को मापने वाले 19 मानकों पर स्कूलों की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है।

इन मानकों में शामिल हैं:

स्वच्छ पेयजल व्यवस्था
शौचालय सुविधा
बिजली व्यवस्था
फर्नीचर
स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं
विद्यालय परिसर का विकास

सरकार का दावा है कि इन मानकों पर विद्यालयों की स्थिति लगभग 36 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर भी सरकार ने दिया जवाब

संदीप सिंह ने शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली को लेकर भी पिछली सरकारों पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के समय नकल रोकने संबंधी कई सख्त प्रावधानों को कमजोर किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।

उन्होंने भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि सरकार निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था के लिए लगातार काम कर रही है।

कम नामांकन वाले स्कूलों के विलय पर उठ सकते हैं सवाल

हालांकि सरकार ने इसे शिक्षा सुधार की प्रक्रिया बताया है, लेकिन कम नामांकन वाले स्कूलों के विलय को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठ सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्राथमिक विद्यालय बच्चों की पहुंच के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में विद्यालयों के विलय के दौरान छात्रों की दूरी, परिवहन सुविधा और शिक्षकों की उपलब्धता जैसे मुद्दे अहम होंगे।

सरकार का कहना है कि किसी भी निर्णय में छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना इसका मुख्य उद्देश्य रहेगा।

सरकार और विपक्ष के बीच जारी है राजनीतिक बहस

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

जहां विपक्ष इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बता रहा है, वहीं सरकार इसे संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में सुधार बता रही है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कम नामांकन वाले विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया किस तरह लागू की जाती है और इसका जमीनी स्तर पर छात्रों एवं शिक्षकों पर क्या प्रभाव पड़ता है।