जापान भूकंप में 18 की मौत, मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

जापान भूकंप में 18 की मौत, मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

जापान में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। दक्षिणी क्यूशू द्वीप के कुमामोटो क्षेत्र में आए 7.1 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। सेना, पुलिस और आपातकालीन बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।

भूकंप से कई इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। ढहे हुए मकानों, क्षतिग्रस्त व्यावसायिक परिसरों और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचावकर्मी दिन-रात अभियान में जुटे हुए हैं।

शॉपिंग मॉल में धमाके से बढ़ी तबाही

भूकंप का सबसे ज्यादा असर काशिमा शहर के एयान शॉपिंग मॉल में देखने को मिला, जहां उस समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

जानकारी के अनुसार, भूकंप के बाद मॉल के एक हिस्से में गैस रिसाव के कारण विस्फोट हो गया। हालांकि विस्फोट से पहले ही करीब 3,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

लेकिन मॉल के दूसरे हिस्से में कुछ कर्मचारी और लोग मौजूद थे। धमाके के बाद इमारत की दूसरी मंजिल का एक हिस्सा ढह गया, जिससे कई लोग अंदर फंस गए।

अधिकारियों के मुताबिक, मॉल परिसर में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ लोगों के अभी भी फंसे होने की आशंका है।

62 लोग घायल, कई की हालत गंभीर

भूकंप के कारण अब तक 62 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से कई लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

प्रशासन के अनुसार, घायलों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई प्रभावित इलाकों तक राहत दल पहुंचने में समय लग रहा है।

निप्पान पेपर इंडस्ट्रीज में भी बड़ा हादसा

भूकंप के दौरान यात्सुशिनो इलाके में स्थित निप्पान पेपर इंडस्ट्रीज कारखाने में भी नुकसान हुआ।

यहां चिमनी गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई। बचावकर्मियों ने मलबे से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

अधिकारियों को आशंका है कि कुछ लोग अब भी मलबे में दबे हो सकते हैं। उनकी तलाश के लिए विशेष टीमों को लगाया गया है।

हजारों घरों में बिजली और पानी की समस्या

भूकंप के बाद कुमामोटो क्षेत्र में बुनियादी सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

प्रशासन के अनुसार:

करीब 34,900 घरों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई।
लगभग 15,000 घरों में पीने के पानी की समस्या बनी हुई है।
8,800 से अधिक लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
400 से ज्यादा राहत शिविरों में लोगों को ठहराया गया है।

स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में जुटा हुआ है।

बचाव अभियान में जुटी सेना और आपातकालीन टीमें

जापान की सेल्फ डिफेंस फोर्स (SDF), पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।

बचावकर्मी विशेष उपकरणों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई इलाकों में इमारतों के कमजोर होने के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की अपील की है।

क्यूशू क्षेत्र में भूकंप से भारी नुकसान

क्यूशू जापान का दक्षिणी मुख्य द्वीप है और यहां भूकंप की गतिविधियां पहले भी दर्ज की जाती रही हैं।

प्रभावित कुमामोटो क्षेत्र में इससे पहले भी बड़े भूकंप आ चुके हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस बार के झटकों ने कई पुराने और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचाया है।

मौसम और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटकों) की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

सरकार ने राहत और पुनर्वास कार्य तेज किए

जापानी प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को प्राथमिकता दी है। अधिकारियों ने कहा है कि सबसे पहले मलबे में फंसे लोगों को निकालना, घायलों को इलाज उपलब्ध कराना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचाना लक्ष्य है।

स्थानीय प्रशासन ने अस्थायी आवास और राहत केंद्रों की व्यवस्था भी शुरू कर दी है।

जापान में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है

जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। यह क्षेत्र "रिंग ऑफ फायर" के अंतर्गत आता है, जहां धरती की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण लगातार भूकंपीय हलचल होती रहती है।

इसी वजह से जापान ने भूकंप से निपटने के लिए मजबूत भवन निर्माण नियम, आपदा प्रशिक्षण और आधुनिक चेतावनी प्रणाली विकसित की है।

हालांकि, इस बार आए शक्तिशाली भूकंप ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के सामने मानवीय चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

फिलहाल बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों और प्रभावित लोगों की संख्या में आगे बदलाव हो सकता है।