देहरा पंचायत समिति पर भाजपा का कब्जा, CM सुक्खू की पत्नी के क्षेत्र में कांग्रेस को झटका

देहरा पंचायत समिति पर भाजपा का कब्जा, CM सुक्खू की पत्नी के क्षेत्र में कांग्रेस को झटका

हिमाचल प्रदेश की सियासत में बुधवार को एक अहम स्थानीय चुनावी नतीजा सामने आया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी और देहरा विधानसभा क्षेत्र की विधायक कमलेश ठाकुर के गृह क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ने पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है।

देहरा पंचायत समिति के चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए दोनों प्रमुख पदों पर कब्जा कर लिया। 23 सदस्यीय पंचायत समिति में भाजपा उम्मीदवारों को 15-15 वोट मिले, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार बहुमत से काफी पीछे रह गए।

भाजपा के विनोद बाबू अध्यक्ष और रूबीना चौधरी उपाध्यक्ष चुनी गईं

पंचायत समिति अध्यक्ष पद के लिए हार वार्ड से निर्वाचित विनोद बाबू को चुना गया। वहीं मयोल वार्ड की सदस्य रूबीना चौधरी ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।

चुनाव में दोनों भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को 15-15 मत मिले। इससे साफ हो गया कि समिति के भीतर भाजपा समर्थित सदस्यों की संख्या बहुमत में थी।

कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

कमलेश ठाकुर के क्षेत्र में हार कांग्रेस के लिए बड़ा झटका

देहरा विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2024 में हुए उपचुनाव के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर यहां से विधायक बनी थीं।

ऐसे में पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था।

मुख्यमंत्री की पत्नी के विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की इस जीत को स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं भाजपा इसे संगठन की मजबूती और स्थानीय जनसमर्थन के संकेत के तौर पर पेश कर रही है।

पहले टल चुका था चुनाव

देहरा पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया पहले भी प्रभावित हुई थी।

31 मई को पंचायत समिति चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद 9 जुलाई को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी। लेकिन उस समय पर्याप्त संख्या में सदस्य उपस्थित नहीं हो सके थे।

23 सदस्यीय पंचायत समिति में कोरम पूरा करने के लिए कम से कम 16 सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी, जबकि बैठक में केवल 15 सदस्य ही पहुंचे थे। इसके कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।

इसके बाद बुधवार को दोबारा बैठक आयोजित की गई, जिसमें भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

भाजपा की चुनावी रणनीति रही मजबूत

चुनाव से पहले भाजपा ने पंचायत समिति सदस्यों को एकजुट करने के लिए रणनीति तैयार की थी।

बताया गया कि भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों ने सुबह से ही चुनावी तैयारियां शुरू कर दी थीं। जसवां-परागपुर विधायक और पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर तथा गगरेट के पूर्व विधायक राजेश ठाकुर ने निर्वाचित सदस्यों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति बनाई।

इसके बाद भाजपा समर्थित सदस्य एकजुट होकर बीडीओ कार्यालय स्थित सभागार पहुंचे, जहां चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई।

वहीं कांग्रेस खेमे में चुनाव को लेकर वैसी सक्रियता नजर नहीं आई। कांग्रेस समर्थित सदस्य बैठक में देरी से पहुंचे और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौके पर मौजूद नहीं दिखे।

बिक्रम ठाकुर बोले- कांग्रेस की उल्टी गिनती शुरू

भाजपा नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर ने इस जीत को कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश बताया।

उन्होंने कहा कि देहरा पंचायत समिति चुनाव के नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस का जनाधार कमजोर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पूर्व विधायक होशियार सिंह को लगातार निशाना बना रही है और जनता ने इसका जवाब चुनाव के जरिए दिया है।

हालांकि कांग्रेस की ओर से इस हार को लेकर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

स्थानीय राजनीति पर पड़ेगा असर

राजनीतिक जानकारों के अनुसार पंचायत स्तर के चुनाव भले ही स्थानीय निकायों से जुड़े होते हैं, लेकिन इनका असर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर भी दिखाई देता है।

देहरा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पंचायत समिति पर भाजपा का नियंत्रण आने वाले समय में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

भाजपा के लिए यह जीत संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं के मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है, जबकि कांग्रेस के लिए यह अपने स्थानीय संगठन और जनसंपर्क रणनीति की समीक्षा का संकेत हो सकती है।

क्या है देहरा का राजनीतिक महत्व?

देहरा विधानसभा क्षेत्र कांगड़ा जिले का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर के विधायक बनने के बाद यह सीट राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र रही है।

ऐसे में पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा की जीत को केवल स्थानीय निकाय चुनाव नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक संघर्ष की पृष्ठभूमि के तौर पर भी देखा जा रहा है।

फिलहाल इस चुनाव परिणाम ने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक मुकाबले को और तेज कर दिया है।