खरीफ फसलों पर नई सलाह: किसानों को कम पानी वाली किस्में अपनाने की सलाह
फसल बीमा की तारीख बढ़ी, मानसून की स्थिति देखते हुए कृषि मंत्रालय और वैज्ञानिकों ने जारी किए जरूरी सुझाव
नई दिल्ली। खरीफ सीजन 2026 को लेकर किसानों के लिए कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राज्य कृषि विभाग लगातार नई सलाह जारी कर रहे हैं। इस बार मानसून की स्थिति, कम बारिश और मौसम में बदलाव को देखते हुए किसानों को फसल चयन, बीज-खाद प्रबंधन और फसल बीमा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2026 में कई क्षेत्रों में बारिश की असमान स्थिति को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों और किस्मों का चयन करना चाहिए, जिनमें कम पानी की जरूरत होती है और जो बदलते मौसम में बेहतर उत्पादन दे सकें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की तारीख बढ़ी
किसानों के लिए राहत की खबर है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत खरीफ फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि कई राज्यों में आगे बढ़ाई गई है। राज्य के अनुसार किसान अब अगस्त के मध्य तक यानी करीब 14 से 16 अगस्त 2026 तक अपनी फसलों का बीमा करा सकेंगे।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते फसल बीमा कराएं, ताकि प्राकृतिक आपदा, सूखा, अतिवृष्टि या अन्य नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता मिल सके।
खरीफ बुवाई और खाद-बीज को लेकर समीक्षा
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में खरीफ फसलों की बुवाई, उर्वरक उपलब्धता और बीज व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
बैठक में राज्यों से खरीफ फसलों की स्थिति, खाद की उपलब्धता और किसानों तक कृषि सामग्री पहुंचाने को लेकर जानकारी ली गई। सरकार का जोर समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने और किसानों को तकनीकी सहायता देने पर है।
कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए विशेष सलाह
मौसम वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने अगस्त और सितंबर में संभावित कम बारिश या असमान मानसून को देखते हुए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे:
कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों का चयन करें
कम पानी की खपत वाली किस्मों को प्राथमिकता दें
खेत में नमी बनाए रखने के उपाय अपनाएं
जरूरत के अनुसार सिंचाई और खाद का इस्तेमाल करें
मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करें
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के दौर में पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है। समय पर बुवाई, सही बीज चयन और संतुलित उर्वरक उपयोग से किसान उत्पादन और लागत दोनों को बेहतर कर सकते हैं।
कृषि विभाग और वैज्ञानिक संस्थान किसानों को स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति के अनुसार खेती करने की सलाह दे रहे हैं।
news desk MPcg