ITR फाइल करने से पहले जान लें नए नियम, इनकम टैक्स फॉर्म में हुए 10 बड़े बदलाव
F&O ट्रेडिंग, विदेशी आय और ब्याज की जानकारी देना जरूरी; छोटी गलती पर नोटिस या रिफंड में हो सकती है देरी
नई दिल्ली। अगर आप असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। आयकर विभाग ने इस बार ITR फॉर्म में कई अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब टैक्सपेयर्स को अपनी आय, निवेश और लेन-देन से जुड़ी ज्यादा जानकारी देनी होगी।
जानकारी छिपाने या गलत जानकारी देने पर टैक्स नोटिस, जुर्माना या रिफंड अटकने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
F&O ट्रेडिंग की देनी होगी पूरी जानकारी
शेयर बाजार के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में कारोबार करने वालों के लिए नियम सख्त किए गए हैं। अब ट्रेडर्स को अपने हर ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी ITR में देनी होगी।
MSME भुगतान की रिपोर्टिंग जरूरी
यदि किसी कारोबारी ने MSME यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से लेन-देन किया है, तो भुगतान और उस पर देय ब्याज की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
पार्टनरशिप फर्म से जुड़े नियम बदले
पार्टनरशिप फर्म के पार्टनर्स को अब अपनी व्यक्तिगत आय के साथ-साथ फर्म में हिस्सेदारी और उससे जुड़ी जानकारी भी विस्तार से देनी होगी।
रिवाइज्ड ITR में फीस की जानकारी देनी होगी
अगर रिटर्न में गलती होने के बाद संशोधित यानी रिवाइज्ड ITR दाखिल किया जाता है, तो उस पर लगने वाली फीस की जानकारी के लिए नया कॉलम जोड़ा गया है।
डोनेशन पर भी बढ़ी जानकारी की जरूरत
टैक्स छूट के लिए किसी संस्था को दान देने वालों को अब संस्था के बैंक खाते और IFSC कोड जैसी जानकारी देनी होगी।
विदेशी आय और NRI टैक्सपेयर्स के लिए बदलाव
विदेशी कंपनियों से मिलने वाली आय को लेकर नया सेल्फ डिक्लेरेशन कॉलम जोड़ा गया है। वहीं, NRI टैक्सपेयर्स के लिए रिपोर्टिंग और दस्तावेजों से जुड़े नियमों को और सख्त किया गया है।
NBFC और निजी कंपनियों से मिलने वाले ब्याज की अलग जानकारी
अब गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) या निजी कंपनियों से मिलने वाली ब्याज आय को अलग से दिखाना जरूरी होगा।
प्रिजम्प्टिव टैक्स स्कीम में भी बदलाव
इस योजना का फायदा लेने वाले कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को अब अपने वित्तीय निवेश से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी।
कैपिटल गेन रिपोर्टिंग का बदला प्रारूप
प्रॉपर्टी, शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से होने वाले लाभ यानी कैपिटल गेन की जानकारी देने के तरीके में भी बदलाव किया गया है।
टैक्सपेयर्स को सावधानी से भरना होगा ITR
इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और गलत जानकारी देने वालों पर नजर रखना है। ऐसे में टैक्सपेयर्स को ITR भरते समय सभी दस्तावेजों और जानकारी की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी परेशानी से बचा जा सके।
news desk MPcg