होली के रंगों में स्वाद: मेहमानों के लिए पहाड़ी अंदाज़ में आलू के गुटके और रायता

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4 मार्च को देशभर में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा, लेकिन उत्तराखंड में रंगों का यह उत्सव वसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है। यहां लोग पारंपरिक होली गीत गाते हुए घर-घर जाते हैं और कई दिनों तक चलने वाले इस पर्व को सांस्कृतिक अंदाज में मनाते हैं।

पहाड़ों की होली सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसकी थाली भी खास होती है। इस दौरान सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है ‘आलू के गुटके’ और खीरे का चटपटा रायता। यह पारंपरिक व्यंजन स्वाद में लाजवाब और बनाने में बेहद आसान होता है।

आलू के गुटके को सरसों के तेल में जखिया और जीरे के तड़के के साथ तैयार किया जाता है, जिससे इसमें अलग ही पहाड़ी खुशबू आती है। मसालों में हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालकर आलू को हल्का ब्राउन होने तक भुना जाता है।

इसके साथ परोसा जाने वाला खीरे का रायता भी खास अंदाज में बनता है। कद्दूकस किए हुए खीरे में मथा हुआ दही, हल्दी, नमक, भुना जीरा और पिसी राई मिलाई जाती है, जो इसे सामान्य रायते से अलग स्वाद देता है।

अगर इस होली आप मेहमानों को कुछ नया और पारंपरिक स्वाद चखाना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का यह सिग्नेचर कॉम्बो आपके त्योहार की रौनक बढ़ा सकता है।