फिल्म रिव्यू: ‘अल्फा’ – यशराज स्पाई यूनिवर्स की महत्वाकांक्षी शुरुआत, लेकिन कमजोर कहानी से पीछे रह गई फिल्म

फिल्म रिव्यू: ‘अल्फा’ – यशराज स्पाई यूनिवर्स की महत्वाकांक्षी शुरुआत, लेकिन कमजोर कहानी से पीछे रह गई फिल्म

यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म ‘अल्फा’ बड़े पैमाने, हाई-ऑक्टेन एक्शन और एक नए साइंस-थ्रिलर कॉन्सेप्ट के साथ रिलीज हुई है। निर्देशक शिव रवैल ने इसे इंटरनेशनल स्पाई थ्रिलर जैसा लुक देने की कोशिश की है, जिसमें विजुअल्स और प्रोडक्शन डिजाइन प्रभावशाली हैं। हालांकि, फिल्म का सबसे बड़ा कमजोर पक्ष इसकी असंतुलित कहानी और ढीला स्क्रीनप्ले साबित होता है।

कहानी: मजबूत कॉन्सेप्ट, लेकिन कमजोर निष्पादन

फिल्म की शुरुआत 1999 के बैकड्रॉप से होती है, जहां भारतीय सेना के दो अधिकारी—विक्रांत कौल (Anil Kapoor) और फतेह सिंह लाखावत (Bobby Deol)—एक ऐसी सीक्रेट फोर्स तैयार करने का सपना देखते हैं जो मानव क्षमता से कहीं आगे हो।

इसी प्रयोग से जन्म लेता है “अल्फा सीरम”, जो इंसान की ताकत, रिफ्लेक्स और रिकवरी को असाधारण रूप से बढ़ा देता है। लेकिन यहीं से कहानी नैतिक और भावनात्मक दुविधाओं में उलझ जाती है।

विक्रांत अपनी पत्नी (दिया मिर्जा) को बचाने के लिए उसे यह सीरम दे देता है, जिससे उसका जीवन बदल जाता है। दूसरी तरफ फतेह का मानना है कि यह शक्ति केवल सेना के नियंत्रण में रहनी चाहिए। वह सत्ता और नियंत्रण के नाम पर विक्रांत की नवजात बेटी को उससे अलग कर देता है और उसे यह विश्वास दिलाता है कि बच्ची मर चुकी है।

यहीं से कहानी दो अलग-अलग रास्तों पर बंट जाती है।

मुख्य किरदार और संघर्ष

सालों बाद वही बच्ची “सीता” (Alia Bhatt) फतेह के नियंत्रण में एक घातक एजेंट बन चुकी होती है। बचपन से उसे मिशनों में ढालकर एक हथियार की तरह तैयार किया गया है। लेकिन जब उसे अपने अतीत और असली सच का पता चलता है, तो उसकी पूरी पहचान टूटने लगती है।

दूसरी ओर, दूसरी बेटी “दुर्गा” (शरवरी) विदेश में पली-बढ़ी होती है। दोनों बहनों का आमना-सामना कहानी को भावनात्मक मोड़ देता है।

कहानी धीरे-धीरे “ऑपरेशन ओडिसी” नामक रहस्य की ओर बढ़ती है, जहां फतेह का असली उद्देश्य सामने आता है। फिल्म का क्लाइमैक्स इन्हीं सवालों पर टिका है कि—

फतेह का असली मिशन क्या है?
अल्फा प्रोजेक्ट का नैतिक आधार कितना सही है?
और क्या सीता अपने अतीत से लड़ पाएगी?
अभिनय: बॉबी देओल सबसे बड़ी ताकत

फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी बॉबी देओल का किरदार है। उनका ग्रे-शेड, शांत लेकिन खतरनाक व्यक्तित्व पूरे स्क्रीनप्ले पर भारी पड़ता है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को कई जगह संभाल लेती है।

Alia Bhatt ने एक्शन सीक्वेंस में काफी मेहनत की है। फिजिकल परफॉर्मेंस प्रभावी है, लेकिन भावनात्मक दृश्यों में उनका किरदार दर्शकों से गहराई से जुड़ नहीं पाता।

शरवरी को सीमित स्क्रीन टाइम मिला, लेकिन उन्होंने अपने हिस्से में संतुलित प्रदर्शन किया है।

Anil Kapoor अपने अनुभवी अंदाज़ में किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं, हालांकि उन्हें पर्याप्त भावनात्मक विस्तार नहीं मिल पाता।

फिल्म के अंत में आया कैमियो (Hrithik Roshan) यशराज स्पाई यूनिवर्स के फैंस के लिए एक बड़ा सरप्राइज साबित होता है और आगे की फिल्मों के लिए उत्सुकता बढ़ाता है।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक शिव रवैल ने फिल्म को एक ग्लोबल स्पाई थ्रिलर की तरह पेश करने की कोशिश की है। सिनेमैटोग्राफी, बड़े सेट्स और लोकेशंस फिल्म को विजुअली आकर्षक बनाते हैं।

एक्शन सीक्वेंस—खासकर आलिया और शरवरी के बीच का शुरुआती फाइट सीन—फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है। फिल्म का टेक्निकल लेवल काफी पॉलिश्ड है, जो इसे बड़े पर्दे के अनुभव के लिए उपयुक्त बनाता है।

कमजोर कड़ी: स्क्रीनप्ले और इमोशनल कनेक्ट

फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसका ढीला स्क्रीनप्ले है। कई घटनाएं बिना ठोस आधार के आगे बढ़ती हैं, जिससे कहानी कई जगह असंगत महसूस होती है।

इमोशनल ट्रैक भी कमजोर रहता है। पिता-बेटी और बहनों के रिश्तों में गहराई की कमी फिल्म के प्रभाव को कम कर देती है। स्पाई एजेंट्स को जरूरत से ज्यादा “सुपरह्यूमन” दिखाना कहानी को यथार्थ से दूर कर देता है।

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर एक्शन और टेंशन को सपोर्ट करता है, लेकिन गाने लंबे समय तक याद रहने वाला प्रभाव नहीं छोड़ते। संगीत तकनीकी रूप से ठीक है, लेकिन भावनात्मक रूप से कमजोर।

अंतिम निष्कर्ष

‘अल्फा’ एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जो बड़े विज़न के साथ बनाया गया है। फिल्म विजुअली मजबूत है, एक्शन दमदार है और बॉबी देओल का प्रदर्शन इसे ऊपर उठाता है। लेकिन कमजोर लेखन और असंतुलित नैरेटिव इसे पूरी तरह प्रभावी बनने से रोक देते हैं।

अगर आप यशराज स्पाई यूनिवर्स और स्टाइलिश एक्शन फिल्मों के फैन हैं, तो यह फिल्म एक बार देखने लायक है। लेकिन गहराई और मजबूत कहानी की उम्मीद करने वाले दर्शकों को यह पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी।