मध्य पूर्व में फिर भड़का युद्ध, इजरायल के हवाई हमलों के बाद ईरान का पलटवार, कई शहरों में तबाही की खबर

मध्य पूर्व में फिर भड़का युद्ध, इजरायल के हवाई हमलों के बाद ईरान का पलटवार, कई शहरों में तबाही की खबर

मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है, जहां इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब खुले संघर्ष में बदलता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में इजरायल ने ईरान के चार शहरों पर भीषण हवाई हमले किए हैं, जबकि जवाब में ईरान ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से पलटवार किया है। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।

इजरायल का बड़ा हवाई हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने पश्चिमी और मध्य ईरान में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। इजरायल का दावा है कि ये कार्रवाई “ईरानी आतंकी शासन” से जुड़े सैन्य ढांचे और रणनीतिक ठिकानों के खिलाफ की गई है।

इन हमलों में ईरान के चार प्रमुख शहरों में धमाकों की सूचना मिली है, जिससे वहां भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर दोनों देशों ने नुकसान के आंकड़े साझा नहीं किए हैं।

ईरान का जवाबी हमला

इजरायली हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। 8 अप्रैल के बाद यह पहली बार बताया जा रहा है जब ईरान ने सीधे इजरायल पर इस स्तर का सैन्य जवाब दिया है।

इस जवाबी हमले के बाद इजरायल में कई इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

अमेरिका और वैश्विक राजनीति की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान के साथ किसी डिप्लोमैटिक समझौते की कोशिश कर रहा था, लेकिन इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने हालात को और जटिल बना दिया है।

यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल से संयम बरतने की अपील की थी, लेकिन इसके बावजूद हमलों की श्रृंखला नहीं रुकी।

क्षेत्रीय समूहों की बढ़ती सक्रियता

इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच लेबनान स्थित हिजबुल्लाह और यमन के हूती विद्रोही समूहों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। इन समूहों की बढ़ती भागीदारी से पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष के फैलने का खतरा और बढ़ गया है।

युद्ध की आशंका और वैश्विक चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह केवल दो देशों का संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है।

फिलहाल स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।