पाकुड़ में 94 दिनों से मनरेगा कर्मियों की हड़ताल, विकास कार्य पूरी तरह ठप; गांवों में गहराया रोजगार संकट
झारखंड के पाकुड़ जिले में मनरेगा कर्मियों की 94 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल अब ग्रामीण विकास व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। लगातार तीन महीने से अधिक समय से चल रही इस हड़ताल के कारण जिले में विकास कार्यों की रफ्तार पूरी तरह थम गई है। पंचायत स्तर पर योजनाओं का संचालन प्रभावित हो गया है, जबकि मनरेगा के तहत रोजगार पाने वाले हजारों ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का संचालन कर्मचारियों की हड़ताल के चलते लगभग ठप हो चुका है। पंचायत कार्यालयों में फाइलें लंबित पड़ी हैं, नई परियोजनाओं की स्वीकृति नहीं हो पा रही है और पहले से स्वीकृत कई योजनाएं अधूरी पड़ी हुई हैं। इसका सीधा असर गांवों की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार पर दिखाई दे रहा है।
विकास योजनाओं पर पड़ा व्यापक असर
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल से सिर्फ रोजगार ही प्रभावित नहीं हुआ है, बल्कि ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का काम भी रुक गया है। दीदी बाड़ी योजना, आबुआ आवास योजना, जल संरक्षण कार्य, तालाब निर्माण, मिट्टीकरण, सड़क निर्माण और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं की प्रगति थम गई है। कई गांवों में निर्माण सामग्री पड़ी हुई है लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित होने से विकास की गति पूरी तरह रुक गई है। इससे सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ समय पर ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
मजदूरों के सामने रोजगार का संकट
मनरेगा ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए रोजगार का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। हड़ताल के चलते नए कार्य शुरू नहीं हो रहे हैं, जिससे मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा। कई परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और कुछ मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे जिलों या राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि खेती का मौसम भी अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है, ऐसे में मनरेगा ही उनकी आय का प्रमुख साधन था। काम बंद होने से परिवारों के सामने दैनिक खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
पंचायतों में कामकाज ठप
जिले की अधिकांश पंचायतों में मनरेगा से जुड़े कार्यालयों का कामकाज प्रभावित है। मजदूरी भुगतान, जॉब कार्ड से जुड़े कार्य, नई योजनाओं की मंजूरी और तकनीकी प्रक्रियाएं लंबित हैं। कई पंचायतों में लाभुकों को समय पर भुगतान भी नहीं मिल पा रहा, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
जल्द समाधान की मांग
ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर हड़ताल का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द बातचीत कर कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण विकास की कई महत्वपूर्ण योजनाएं लंबे समय तक प्रभावित रह सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा जैसी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में लंबे समय तक कामकाज बंद रहने से विकास कार्यों के साथ-साथ गरीब परिवारों की आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
फिलहाल पूरे जिले की निगाहें सरकार और मनरेगा कर्मियों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं। जब तक हड़ताल समाप्त नहीं होती, तब तक गांवों में विकास कार्यों के दोबारा पटरी पर लौटने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है।
news desk MPcg